
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। देश के सबसे पुराने रेल रूटों में से एक हावड़ा और मुंबई के बीच रेलगाड़ियां रेंग रही हैं। हालत ऐसी हो गई है कि इस रूट पर चलने वाली सभी आठ गाड़ियां औसतन पांच से आठ घंटे की देरी से चल रही हैं। कभी-कभी तो यह देरी 12-12 घंटे की हो जा रही है। गुरुवार को भी छत्रपति शिवाजी टर्मिनस-हावड़ा के बीच चलने वाली दुरंतो एक्सप्रेस 13 घंटे देरी से चली। यही हाल इस रूट की अन्य ट्रेनों का भी है।
ट्रेनों की लेटलतीफी के कारण राजधानी से मुंबई, हावड़ा, पुणे, अहमदाबाद जैसे शहरों के लिए जाने वाले यात्री परेशान हो रहे हैं। रेलवे सूत्रों के अनुसार रायगढ़ से आगे ईब और झारसुगुड़ा के बीच चौथी रेल लाइन के निर्माण और शुरू होने में देरी के कारण ट्रेनों की समय सारिणी प्रभावित हुई हैं।
रेलवे सूत्रों के अनुसार बिलासपुर से झारसुगड़ा के बीच 206 किलोमीटर के रेलखंड पर अगस्त तक 150 किलोमीटर चौथी लाइन का काम पूरा हो गया था। ईब से लेकर झारसुगुड़ा के बीच चौथी लाइन का काम पूरा होने, उसे सुरक्षा आयुक्त की मंजूरी मिलने और संचालन शुरू होने से इस रूट पर ट्रेनों की समय सारिणी सुधरेगी। जब तक ऐसा नहीं होता है, तब तक यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ेगी।
पटरियों पर दबाव बढ़ा
रेलवे सूत्रों के अनुसार बीते कई दशकों में नई रेलगाड़ियों की संख्या तो बढ़ाई गई है, लेकिन नई पटरियों के बिछाने में देरी की गई। सिग्नलिंग प्रणाली में सुधार भी देरी का कारण बना। इससे गाड़ियों का संचालन प्रभावित हुआ। रेलवे की रिपोर्ट बताती है कि पटरियों पर ट्रेनों की परिचालन क्षमता का 158 फीसदी उपयोग किया जा रहा है। इसका मतलब है कि तय गति में जिन पटरियों पर 100 ट्रेनों का संचालन होना चाहिए, उनपर 158 का संचालन हो रहा है।