
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (आईजीकेवी) की बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष द्वितीय सेमेस्टर की कीटशास्त्र परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक करने के मामले में रायपुर पुलिस ने 36 घंटे के भीतर छह आरोपितों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों में दुर्ग के भारती एग्रीकल्चर कॉलेज का प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया भी शामिल है। पुलिस के अनुसार योगेश ही इस पूरे मामले का मुख्य आरोपित और मास्टरमाइंड है। उसने प्रश्नपत्र की वीडियो रिकॉर्डिंग कर उसकी सामग्री तैयार की और अपने कॉलेज के छात्रों को 11 हजार रुपये में बेच दिया था।
मामले में पेपर खरीदने वाले पांचों आरोपित भी भारती एग्रीकल्चर कॉलेज, दुर्ग के छात्र हैं। पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से 11 हजार रुपये नकद, छह मोबाइल फोन, वीडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस, केबल तार, मोबाइल कनेक्टर, सुई, सुजा, कॉपी और फेविकोल समेत अन्य सामग्री जब्त की है। मामले में दो अन्य आरोपितों के फरार होने की जानकारी सामने आई है, जिनकी तलाश की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक 20 अगस्त को सुबह 10 से दोपहर एक बजे तक आईजीकेवी के अधीन सभी 28 कृषि महाविद्यालयों में बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष द्वितीय सेमेस्टर के एजीसीएच-221 कीटशास्त्र विषय की परीक्षा आयोजित होनी थी। परीक्षा शुरू होने से पहले ही सुबह करीब 8:41 बजे कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, कवर्धा के ई-मेल पर प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना मिली। करीब 8:54 बजे संबंधित अधिकारियों के ई-मेल पर भी इसकी जानकारी पहुंची।
इसके साथ ही छात्रों और छात्र प्रतिनिधियों ने वाट्सएप के माध्यम से प्रश्नपत्र के कुछ प्रश्नों का कंटेंट वायरल होने की सूचना विश्वविद्यालय को दी। जांच में प्रश्नपत्र के सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित होने की पुष्टि हुई। इसके बाद वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं स्नातक परीक्षा प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. एनआर रंगारे की रिपोर्ट पर तेलीबांधा थाने में अपराध क्रमांक 360/26 दर्ज किया गया। आरोपितों के खिलाफ छत्तीसगढ़ सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम 2008 की धारा 4, 5 एवं 10 और धारा 316 बीएनएस के तहत कार्रवाई की गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अमित तुकाराम कांबले के मार्गदर्शन तथा डीसीपी क्राइम एवं साइबर स्मृतिक राजनाला और डीसीपी मध्य जोन तारकेश्वर पटेल की निगरानी में एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और तेलीबांधा पुलिस की संयुक्त टीम बनाई गई।
जांच में 100 से अधिक पुलिसकर्मियों को लगाया गया। पुलिस टीमों को रायपुर, दुर्ग, कबीरधाम, बिलासपुर और आसपास के जिलों में भेजा गया। परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की गई। वहीं साइबर विंग ने वायरल प्रश्नपत्र, स्क्रीनशॉट, फोटो, मैसेज और सोशल मीडिया पोस्ट का तकनीकी विश्लेषण किया।
पुलिस ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि प्रश्नपत्र सबसे पहले किस अकाउंट, मोबाइल नंबर या डिजिटल माध्यम से प्रसारित हुआ। वायरल सामग्री की टाइमलाइन और उसके प्रसारण की पूरी श्रृंखला खंगाली गई। संदिग्ध मोबाइल नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट, ग्रुप और आपसी डिजिटल संपर्कों की जांच के साथ संबंधित लोगों की गतिविधियों और लोकेशन का भी तकनीकी परीक्षण किया गया।
तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पुलिस को दुर्ग निवासी अनुज मिंज के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। इसके बाद टीम दुर्ग पहुंची और अनुज को पकड़ा। उससे पूछताछ और मिले साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने अन्य आरोपितों तक पहुंच बनाई।
लगातार 36 घंटे की जांच के दौरान पुलिस ने प्रश्नपत्र लीक होने के स्रोत का पता लगा लिया। पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर भारती एग्रीकल्चर कॉलेज, दुर्ग के प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया की भूमिका सामने आई।
पुलिस के अनुसार योगेश सोनकेसरिया वर्ष 2019 से भारती एग्रीकल्चर कॉलेज, दुर्ग में प्रोफेसर के पद पर पदस्थ है। पिछले करीब एक वर्ष से वह अपने कॉलेज की उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने और आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र प्राप्त कर उन्हें कॉलेज तक ले जाने का काम कर रहा था।
17 अगस्त को वह भारती एग्रीकल्चर कॉलेज की उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने जोरा स्थित कृषि महाविद्यालय, रायपुर पहुंचा था। उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने के बाद उसने आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र प्राप्त किए और उन्हें दुर्ग स्थित अपने कॉलेज ले गया। पुलिस के मुताबिक उसने सभी प्रश्नपत्रों के लिफाफे कॉलेज में रख दिए, लेकिन 20 अगस्त को होने वाली कीटशास्त्र परीक्षा का प्रश्नपत्र अपने घर ले गया।
घर पहुंचने के बाद उसने लिफाफे से छेड़छाड़ की। सुई और नुकीले उपकरण की मदद से लिफाफे में छोटा छेद किया और उसी छेद से मोबाइल कैमरा अंदर डालकर प्रश्नपत्र की वीडियो रिकॉर्डिंग कर ली। इसके बाद प्रश्नपत्र की सामग्री की नकल तैयार की।
पुलिस के अनुसार योगेश ने प्रश्नपत्र की सामग्री अपने कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र अजय नायक और दो अन्य छात्रों को कुल 11 हजार रुपये में बेची। इसके बाद अजय नायक ने प्रश्नपत्र त्रिदेव पटेल, नितिन पाण्डेय, अनुज मिंज और आदित्य साहू को उपलब्ध कराया। इस तरह प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से पहले ही कई छात्रों तक पहुंच गया और सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
पुलिस ने मामले में योगेश सोनकेसरिया, अजय नायक, त्रिदेव पटेल, नितिन पाण्डेय, अनुज मिंज और आदित्य साहू को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार मामले में दो अन्य आरोपितों की भूमिका भी सामने आई है, जो फिलहाल फरार हैं। उनकी तलाश के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ कर यह भी पता लगाया जा रहा है कि प्रश्नपत्र लीक करने के पीछे किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका थी या नहीं। साथ ही प्रश्नपत्र किन-किन लोगों तक पहुंचा और इसमें अन्य लोगों की क्या भूमिका रही, इसकी भी जांच की जा रही है।
1. योगेश सोनकेसरिया (38) — पिता गुलाब चंद सोनकेसरिया, निवासी ग्राम भैरोगंज, तहसील, थाना व जिला सिवनी (मध्यप्रदेश), वर्तमान पता चंदखुरी दुर्गा चौक, थाना पुलगांव, जिला दुर्ग।
2. अजय नायक (20) — पिता वीरेंद्र कुमार नायक, निवासी ग्राम कुशभाटा, पोस्ट नगरदा, जिला बलौदाबाजार, वर्तमान पता मीनाक्षी नगर, बोरसी, जिला दुर्ग।
3. त्रिदेव पटेल (22) — पिता जगदीश पटेल, निवासी ग्राम कनकेवा, थाना सरायपाली, जिला महासमुंद, वर्तमान पता फेस-2, ब्लॉक ई-107, आनंद विहार, जिला दुर्ग।
4. नितिन पाण्डेय (22) — पिता कुशल प्रसाद पाण्डेय, निवासी ग्राम आसना तामाकोनी, थाना कोतवाली, जिला बस्तर, वर्तमान पता मीनाक्षी नगर, बोरसी, जिला दुर्ग।
5. अनुज मिंज (22) — पिता रेनू मिंज, निवासी ग्राम पाकरगांव, थाना पत्थलगांव, जिला जशपुर, वर्तमान पता संजय साहू हॉस्टल, पोटिया चौक, जिला दुर्ग।
6. आदित्य साहू (20) — पिता लेखराम साहू, निवासी हथौद, थाना बालोद, जिला बालोद, वर्तमान पता मीनाक्षी नगर, बोरसी, जिला दुर्ग।