झीरम घाटी हत्याकांड में आज 10 दोषी माओवादियों को सजा, फांसी या उम्रकैद पर अदालत सुनाएगी फैसला
झीरम घाटी हत्याकांड मामले में एनआईए की विशेष अदालत आज 10 दोषी माओवादियों की सजा पर फैसला सुनाएगी। 2013 के हमले में 32 लोगों की मौत हुई थी।
Publish Date: Wed, 16 Sep 2026 12:58:15 PM (IST)Updated Date: Wed, 16 Sep 2026 01:48:33 PM (IST)
झीरम घाटी हत्याकांड में आज 10 दोषी माओवादियों को सजा। (फाइल फोटो)HighLights
- झीरम घाटी मामले में आज दस दोषी माओवादियों को सजा मिलेगी।
- विशेष अदालत ने पांच सितंबर को दस आरोपियों को दोषी ठहराया।
- 2013 के हमले में कांग्रेस नेताओं समेत 32 लोगों की मौत।
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। 25 मई 2013 का वह काला दिन छत्तीसगढ़ के इतिहास में हमेशा एक गहरे घाव की तरह याद किया जाता है। झीरम घाटी में हुए उस दिल दहला देने वाले नरसंहार के मामले में आज (बुधवार, 16 सितंबर) राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत अपना बड़ा फैसला सुनाने जा रही है।
विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने बीते 5 सितंबर को 10 माओवादियों को इस जघन्य हत्याकांड में दोषी करार दिया था। आज अदालत तय करेगी कि इन हत्यारों को क्या सजा मिलेगी। फिलहाल ये सभी जगदलपुर की सेंट्रल जेल की सलाखों के पीछे अपने अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
11 आरोपियों पर चला था केस, एक की हो चुकी है मौत
- इस खौफनाक हमले में कुल 11 नक्सलियों को कटघरे में खड़ा किया गया था, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई।
- अब जिन 10 दोषियों को सजा मिलनी है, उनमें प्रमिला मोडियाम, सुमित्रा पुनेम, मुक्का मांडवी, मड़कामी देवा, कोसा कवासी, आयत मरकाम, बंजामी सेना, चैतू लेकाम, जोगा मड़कामी और महादेव नागा शामिल हैं।
- दोषियों को उनके अंजाम तक पहुंचाने के लिए एनआईए ने 2015 में एक हजार पन्नों की लंबी-चौड़ी चार्जशीट पेश की थी और 101 गवाहों ने अदालत के सामने चश्मदीद बयान दर्ज कराए थे।
वह हमला, जिसने पूरे देश को रुला दिया था
- आज से करीब 13 साल पहले जगदलपुर से 42 किलोमीटर दूर एनएच-30 पर माओवादियों ने मौत का वह जाल बिछाया था। कांग्रेस की 'परिवर्तन यात्रा' का काफिला झीरम घाटी से गुजर रहा था, तभी नक्सलियों ने अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं।
- इस दर्दनाक वारदात में दिग्गज नेता विद्याचरण शुक्ल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और पूर्व विधायक उदय मुदलियार समेत 32 लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई थी। सुरक्षाबलों और आम नागरिकों समेत 38 लोग इस हमले में बुरी तरह जख्मी हुए थे।
फांसी या आजीवन कारावास?
कानूनी जानकारों और दोनों पक्षों (अभियोजन व बचाव) के वकीलों का कहना है कि इन माओवादियों पर जिन गंभीर धाराओं के तहत दोष सिद्ध हुआ है, उनमें सजा के प्रावधान बेहद सख्त हैं। इन धाराओं में कम से कम उम्रकैद और अधिकतम मृत्युदंड (फांसी) तक की सजा मिल सकती है। सबकी निगाहें अदालत के निर्णय पर टिकी हैं।
झीरम के फैसले पर फिर भड़की सियासी आग
- अदालत द्वारा इन नक्सलियों को दोषी ठहराए जाने के बाद से ही सूबे में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष में जुबानी जंग तेज है।
- राज्य के उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेता विजय शर्मा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वे पांच साल सत्ता में रहे, लेकिन इस मामले में कुछ नहीं कर सके।
- वहीं, इसके पलटवार में कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एनआईए की जांच पर ही उंगली उठा दी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी जांच में बड़े माओवादी चेहरों और असल साजिशकर्ताओं को बचा लिया गया है।
ये नेता मारे गए थे
महेंद्र कर्मा
महेंद्र कर्मा छत्तीसगढ़ की राजनीति में आदिवासी समाज के प्रभावशाली नेताओं में शामिल थे। वे विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रह चुके थे और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे। बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ सलवा जुडूम आंदोलन से उनका नाम प्रमुखता से जुड़ा था। 25 मई 2013 को झीरम घाटी हमले में उनकी हत्या कर दी गई।
नंद कुमार पटेल
नंद कुमार पटेल छत्तीसगढ़ कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश की राजनीति के प्रमुख नेताओं में थे। वे मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री भी रह चुके थे तथा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाई थी। झीरम हमले के दौरान उन्हें उनके बेटे दिनेश पटेल के साथ माओवादियों ने अगवा कर लिया था। दोनों की हत्या कर दी गई।
विद्याचरण शुक्ल
विद्याचरण शुक्ल छत्तीसगढ़ से राष्ट्रीय राजनीति में पहचान बनाने वाले दिग्गज कांग्रेस नेता थे। वे कई बार केंद्रीय मंत्री रहे और देश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। झीरम घाटी हमले में वे गंभीर रूप से घायल हुए थे। उपचार के दौरान 11 जून 2013 को उनका निधन हो गया।
उदय मुदलियार
उदय मुदलियार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजनांदगांव से विधायक रह चुके थे। वे 1993-98 और 2003-08 के दौरान विधानसभा के सदस्य रहे। 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर हुए झीरम हमले में माओवादियों ने उनकी हत्या कर दी। वे बस्तर और प्रदेश कांग्रेस संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते थे।
योगेंद्र शर्मा
योगेंद्र शर्मा छत्तीसगढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शामिल थे और झीरम घाटी में परिवर्तन यात्रा के काफिले के साथ थे। 25 मई 2013 को माओवादियों के हमले में उनकी भी हत्या कर दी गई। झीरम हमले में मारे गए प्रमुख राजनीतिक नेताओं में उनका नाम दर्ज है। उनकी पत्नी अनीता शर्मा कांग्रेस से विधायक रह चुकी है।
झीरम घाटी में मारे गए 32 लोग
- नंद कुमार पटेल- तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
- दिनेश पटेल- नंद कुमार पटेल के पुत्र
- महेंद्र कर्मा- पूर्व नेता प्रतिपक्ष, बस्तर टाइगर
- उदय मुदलियार- पूर्व विधायक, राजनांदगांव
- गोपीचंद माधवानी- कांग्रेस नेता
- विद्याचरण शुक्ल पूर्व केंद्रीय मंत्री- - हमले में घायल हुए, बाद में उपचार के दौरान निधन
- योगेंद्र शर्मा- कांग्रेस नेता
- राजेश चंद्राकर- कांग्रेस कार्यकर्ता
- मनोज जोशी- कांग्रेस कार्यकर्ता
- अभिषेक गोलछा- कांग्रेस कार्यकर्ता
- गणपत नाग- कांग्रेस कार्यकर्ता
- अल्लाहनूर (अलानूर)- भिंडसरा कांग्रेस कार्यकर्ता
- सदाशिव नाग- स्थानीय कार्यकर्ता
- भागीरथी- स्थानीय कार्यकर्ता
- राजकुमार- कार्यकर्ता
- चंदर माझी- कार्यकर्ता
- प्रहलाद मांझी- कार्यकर्ता
- मुकेश कर्मा- महेंद्र कर्मा के पुत्र/परिवार से संबंधित
- इमानुएल केरकेट्टा- एएसआई, पुलिस
- पात्रिक खलखो- पुलिस जवान
- चंद्रहास ध्रुव- पुलिस जवान
- राहुल प्रताप सिंह- पुलिस जवान
- पवन कोंड्रा- पुलिस जवान
- तरुण देशमुख- पुलिस जवान
- दीपक उपाध्याय- पुलिस जवान
- अशोक कुमार- पुलिस जवान
- प्रफुल्ल शुक्ला- पुलिस जवान
- सियाराम- पुलिस जवान
- लव कुमार भगत- पुलिस जवान
- कृष्णपाल सिंह- पुलिस जवान
- मनारूराम बेंजाम- पुलिस जवान
- बेंजामी हांदो- पुलिस जवान
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