
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। त्योहार की खुशियां मनाने की तैयारी के बीच रसोई का हिसाब बिगड़ने लगा है। थाली में दाल कितनी होगी, चावल कौन-सा आएगा और सब्जी के साथ सलाद का खर्च कितना बैठेगा, अब इन सवालों का जवाब जेब की हालत देखकर तय करना पड़ रहा है।
महीनेभर में दूसरी बार दाल-चावल के दाम बढ़ने से आम परिवारों का बजट दबाव में है। अरहर दाल 150 रुपये किलो तक पहुंच गई है तो चावल की प्रमुख किस्में भी 10 से 15 रुपये किलो महंगी हो गई हैं। शक्कर के भाव में भी फिर तेजी है।
हरी सब्जियों के दाम पहले से ही ऊंचे हैं। ऐसे में महीने का राशन खरीदने निकले परिवारों को अब पहले से ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। थोक बाजार में अरहर दाल और चावल के भाव में प्रति क्विंटल करीब 1,000 रुपये तक की तेजी दर्ज की गई है। इसका सीधा असर फुटकर बाजार पर भी पड़ा है।
रायपुर के थोक और फुटकर बाजार में अरहर दाल सबसे ज्यादा चर्चा में है। अरहर दाल की कीमत अलग-अलग किस्म के हिसाब से 110 से 150 रुपये किलो तक पहुंच गई है। चना दाल 80 से 100 रुपये किलो बिक रही है।
व्यापारियों के मुताबिक, पिछले महीने भी दाल की कीमतों में 20 रुपये और कुछ चावलों में 10 रुपये किलो तक की वृद्धि हुई थी। अब दोबारा तेजी आने से त्योहारी खरीदारी महंगी पड़ रही है।
रामसागरपारा स्थित बालाजी ग्रेंस के संचालक प्रकाश अग्रवाल के अनुसार, अरहर दाल 150 रुपये किलो तक पहुंच गई है। पहले 10 रुपये की बढ़ोतरी के बाद यह 140 रुपये किलो बिक रही थी। चना दाल के दाम भी 10 से 12 रुपये किलो बढ़कर 80 से 100 रुपये तक पहुंच गए हैं।
लाखे नगर स्थित रामजी अनाज भंडार के संचालक निकेश अग्रवाल के मुताबिक, बगैर पालिश वाली अरहर दाल 150 रुपये और पालिश वाली 140 रुपये किलो बिक रही है। मूंगफली दाना भी 160 से बढ़कर 170 रुपये किलो हो गया है।
चावल के बाजार में भी तेजी का असर साफ है। अब्बा हजूर चावल थोक में 90 रुपये किलो तक पहुंच गया है। एचएमटी चावल 60 से 70 रुपये, कालीमूंछ 68 से 78 रुपये और श्रीराम चावल 75 से 88 रुपये किलो तक बिक रहा है। इन बढ़े भावों का सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जिनकी महीने की खरीदारी में दाल और चावल सबसे बड़ी जरूरत हैं।
शक्कर के भाव में उतार-चढ़ाव के बाद एक बार फिर तेजी आई है। पहले 70 रुपये किलो तक पहुंचने के बाद कीमतें घटकर 46 से 48 रुपये किलो तक आ गई थीं। तीन दिन पहले थोक में शक्कर 50 रुपये और फुटकर में 52 रुपये किलो बिक रही थी। अब दो से तीन रुपये की बढ़ोतरी के बाद थोक भाव 52 और फुटकर भाव 55 रुपये किलो तक पहुंच गया है। त्योहार के दौरान मिठाई और पकवान बनाने की तैयारी कर रहे परिवारों के खर्च में इससे और इजाफा होगा।
रसोई का बजट केवल दाल-चावल से नहीं बिगड़ रहा। सब्जियों के दाम भी जेब पर भारी पड़ रहे हैं। साप्ताहिक बाजार में टमाटर 20 से बढ़कर 30 रुपये किलो हो गया है। बैंगन, फूलगोभी और करेला 80 रुपये किलो बिक रहे हैं। भिंडी 60 रुपये, जबकि लौकी, पत्तागोभी और कच्चा केला 40 रुपये किलो है। धनिया 160 और मिर्च 80 रुपये किलो तक पहुंच गई है।
आलू और प्याज ही थोड़ी राहत दे रहे हैं। आलू थोक में 10 रुपये किलो और प्याज 35 से 40 रुपये किलो बिक रहा है। लेकिन सब्जियों की पूरी खरीदारी में इन दो वस्तुओं से मिलने वाली राहत पर्याप्त नहीं है।
थोक और फुटकर बाजार में रोजमर्रा की चीजों के नए रेट इस तरह हैं। अरहर दाल पहले 140 रुपये थी, अब 150 रुपये हो गई है, यानी 10 रुपये की बढ़ोतरी। चना दाल 70-85 रुपये से बढ़कर 80-100 रुपये हो गई है। मूंगफली दाना 160 से 170 रुपये हुआ है।
एचएमटी चावल 50-60 रुपये से बढ़कर 60-70 रुपये, कालीमूंछ चावल 58-68 रुपये से 68-78 रुपये, श्रीराम चावल 65-75 रुपये से 75-88 रुपये और अब्बा हजूर चावल 75 रुपये से 90 रुपये किलो तक पहुंच गया है। इसमें 10 से 15 रुपये तक की बढ़ोतरी है। शक्कर फुटकर में 52 रुपये से बढ़कर 55 रुपये किलो हो गई है।
टिकरापारा निवासी शुभ्रता साव का कहना है कि महंगाई का सबसे ज्यादा असर मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है। राशन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च लगातार बढ़ रहा है, लेकिन आमदनी उसी अनुपात में नहीं बढ़ रही। ऐसे में परिवारों को अपनी जरूरतों और इच्छाओं के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है। अब त्योहार का मौसम भी है। शक्कर की कीमत भी ऐसी बढ गई है कि क्या मिठाई बनाएं समझ नहीं आ रहा। खाने के तेल की कीमत भी 15 से 40 रुपये लीटर बढ़ गया है। व्यक्ति क्या खाएं समझ नहीं आ रहा।
शुभ्रता साव, गृहणी
समाजसेविका मधु यादव का कहना है कि बढ़ती महंगाई ने मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट बिगाड़ दिया है। रसोई में हर सामाग्री महंगी हो गई है। सस्ती मिलने वाली लौकी जैसी सब्जी का दाम भी आसमान छू रहा है। एक मध्यम वर्गीय परिवार चावल, दाल, सब्जी ही लेता है, लेकिन हर अनाज की कीमत बढ़ जाने के कारण खर्च बढ़ रहा है। परिवारों को अब छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी सोच-समझकर खर्च करना पड़ता है। महंगाई पर नियंत्रण और राहत के उपाय जरूरी हैं।
मधु यादव, गृहणी