
अभिषेक राय, नईदुनिया.रायपुर। छोटे और सीमांत किसानों के बुढ़ापे में हर महीने तीन हजार रुपये का सहारा देने वाली प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (पीएम-केएमवाई) का ‘मान’ ही किसानों तक नहीं पहुंच पा रहा है। प्रदेश में प्रचार-प्रसार इतना सुस्त है कि किसान योजना से अनजान हैं।
प्रदेश में 33.13 लाख से अधिक पात्र किसान हैं, लेकिन सात वर्षों से अधिक समय में महज 2.02 लाख ने ही योजना में पंजीयन कराया है। यानी करीब 94 प्रतिशत पात्र किसान अब भी इससे बाहर हैं। किसान संगठनों का कहना है कि गांव-गांव तक योजना की जानकारी नहीं पहुंचने से बड़ी संख्या में पात्र किसान इसके लाभ से वंचित हैं।
पेंशन का यह ‘मानधन’ सरकारी फाइलों में सिमट गया है। केंद्र सरकार द्वारा 12 सितंबर 2019 को योजना शुरू की गई थी। देशभर में योजना से करीब 25 लाख किसान पंजीकृत हैं।
पंजीयन के लिए किसान की उम्र 18 से 40 वर्ष और अधिकतम दो हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि होना जरूरी है। किसान को उम्र के अनुसार हर महीने 55 से 200 रुपये तक अंशदान करना होता है। उसके अंशदान के बराबर राशि केंद्र सरकार भी जमा करती है। 60 वर्ष की उम्र पूरी होने पर नियमित अंशदान वाले किसान को हर महीने पेंशन मिलती है। पेंशन प्राप्त कर रहे सदस्य की मृत्यु होने पर उसके जीवनसाथी को सदस्य की पेंशन का 50 प्रतिशत यानी 1500 रुपये प्रतिमाह पारिवारिक पेंशन के रूप में देने का प्रविधान है।
हरियाणा- 5,74,510
बिहारी- 3,46,326
झारखंड- 2,53,459
उत्तर प्रदेश- 2,52,528
छत्तीसगढ़ - 2,02,913
ओडिशा- 1,57,785
जम्मू कश्मीर- 1,27,018
मध्यप्रदेश- 1,17,738
तमिलनाडु - 1,10,669
महराष्ट्र - 80,769
(फरवरी-2026 तक की स्थिति)
श्रेणी - कुल किसान
सीमांत (ढाई एकड़ या काम) - 24,34,321
लघु (ढाई से पांच एकड़) - 8,79,477
अल्प सीमांत (पांच से 10 एकड़) - 4,93,056
मध्यम (10 से 25 एकड़) - 1,80,823
बड़े (25 एकड़ से ज्यादा) - 23,095
उठाए जाएंगे आवश्यक कदम
योजना को लेकर अधिकारियों से चर्चा कर समीक्षा की जाएगी। पात्र किसानों को योजना से जोड़ने के लिए पंजीयन की स्थिति, अड़चनों और जागरूकता के स्तर की जानकारी ली जाएगी। राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि पात्र किसानों तक योजना का लाभ पहुंचे और इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
- राम विचार नेताम, कृषि मंत्री
प्रचार प्रसार करे सरकार
योजनाओं का पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में पात्र किसानों तक जानकारी नहीं पहुंच पाती। सरकार को गांव-गांव शिविर लगाकर किसानों को योजना की जानकारी देने के साथ ही मौके पर पंजीयन की सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक पात्र किसान योजना का लाभ उठा सकें।
- नवीन शेष, प्रदेश महामंत्री, भारतीय किसान संघ