
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच पिछले 44 वर्षों से चल रहा महानदी जल बंटवारे का विवाद अब सुलझने की ओर अग्रसर है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठकों के बाद इस विवाद के शीघ्र समाधान की उम्मीद जगी है।
सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी की अध्यक्षता वाले ट्रिब्यूनल ने दोनों राज्यों को 28 सितंबर 2026 तक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार, संभावित समझौते के तहत महानदी के कुल 46 मिलियन एकड़ फीट पानी का फार्मूला तैयार किया जा रहा है। इसके अनुसार, लगभग 24 मिलियन एकड़ फीट पानी ओडिशा को और करीब 22 मिलियन एकड़ फीट पानी छत्तीसगढ़ को मिलने की संभावना है।
यह विवाद 1983 से चल रहा है, जब छत्तीसगढ़ का गठन नहीं हुआ था और यह मामला मूल रूप से मध्य प्रदेश और ओडिशा के बीच था। समय के साथ कई समझौते हुए, लेकिन वे प्रभावी नहीं हो सके। 2016 में ओडिशा सरकार ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद, केंद्र सरकार ने 12 मार्च 2018 को महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल का गठन किया।
वर्तमान में ट्रिब्यूनल के समक्ष दोनों राज्यों के बीच बातचीत अंतिम चरण में है। ट्रिब्यूनल का आधिकारिक कार्यकाल 13 जनवरी 2027 तक है, लेकिन बातचीत की प्रगति को देखते हुए उम्मीद है कि दीपावली तक इस मामले पर अंतिम सहमति बन सकती है, जिससे दशकों पुराना जल विवाद समाप्त हो सकता है।