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महानदी जल विवाद: साझा जल प्रबंधन पर छत्तीसगढ़-ओडिशा के बीच बनी सहमति, 43 साल का टकराव खत्म

नई दिल्ली में हुई बैठक में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों ने महानदी जल विवाद को आपसी संवाद, वैज्ञानिक अध्ययन और संयुक्त प्रबंधन तंत्र के जरिए हल...और पढ़ें

By Satish PandeyEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Fri, 31 Jul 2026 11:16:28 AM (IST)Updated Date: Fri, 31 Jul 2026 11:40:24 AM (IST)
महानदी जल विवाद: साझा जल प्रबंधन पर छत्तीसगढ़-ओडिशा के बीच बनी सहमति, 43 साल का टकराव खत्म
महानदी जल विवाद को लेकर छत्तीसगढ़-ओडिशा के बीच अहम बैठक। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. विष्णु देव साय-मोहन चरण माझी ने महानदी जल विवाद पर सहमति व्यक्त की
  2. पानी के निष्पक्ष वितरण के लिए Water Distribution Panel बनाया जाएगा
  3. समझौते से छत्तीसगढ़ को अपनी भविष्य की सिंचाई-औद्योगिक जरूरतों पर बात की

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। वर्षों से लंबित महानदी जल बंटवारा विवाद में गुरुवार को नई दिल्ली के श्रम शक्ति भवन में एक ऐतिहासिक पहल हुई। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक हुई। इसमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पहली बार आमने-सामने बैठ कर चर्चा की। बैठक में दोनों राज्यों ने कानूनी टकराव के बजाय आपसी संवाद, सहयोग और वैज्ञानिक आधार पर विवाद का स्थायी समाधान निकालने पर पूर्ण सहमति जताई।

साय बोले- महानदी दोनों राज्यों की समृद्धि का आधार बने

बैठक में छत्तीसगढ़ के CM विष्णु देव साय ने कहा- राज्य सरकार इस चर्चा को पुराने विवाद की निरंतरता नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत के रूप में देखती है। महानदी केवल विवाद का विषय नहीं, बल्कि दोनों राज्यों की तरक्की का आधार है। हम ओडिशा की सिंचाई, पेयजल और हीराकुंड परियोजना की जरूरतों का पूरा सम्मान करते हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ के किसानों, आदिवासी अंचलों, सूखा प्रभावित क्षेत्रों और भविष्य की विकास जरूरतों को भी समान प्राथमिकता मिलनी चाहिए। दोनों राज्यों के हित एक-दूसरे के पूरक हैं।


वैज्ञािनक अध्ययन और स्थायी तंत्र बनाने पर जोर

बैठक में दोनों राज्यों के बीच पानी के बेहतर उपयोग के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। दोनों ने कई सुझाव दिए, जैसे-

  • जल संसाधनों का वैज्ञानिक अध्ययन कराकर भविष्य के लिए जल प्रबंधन व्यवस्था तैयार करना।
  • कम वर्षा वाले साल में दोनों राज्यों के लिए एक वॉटर डिस्ट्रीब्यूशन पैनल बनाना।
  • जल उपलब्धता और उसके उपयोग की नियमित समीक्षा के लिए एक स्थायी कमेटी बनाना, जो प्रशासनिक-तकनीकी स्तर पर मामलों को सुलझा सके।
  • निष्पक्ष तकनीकी सहयोग और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कराने में मध्यस्थता का आग्रह किया।

समाधान से दोनों राज्यों को क्या होगा फायदा?

सभी के सुझाव में दोनों ही राज्यों को फायदा मिल सकते है। छत्तीसगढ़ को जल संसाधनों पर स्पष्ट कानूनी अधिकार मिलेंगे, जिससे सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक परियोजनाओं के विस्तार का रास्ता साफ होगा। वहीं, ओडिशा को हीराकुंड जलाशय में जलस्तर बेहतर रहेगा, गैर-मानसून अवधि (सूखे के दिनों) में पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और नदी का संतुलन सुरक्षित रहेगा।

बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकास शील, प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह सहित दोनों राज्यों के जल संसाधन विभाग के शीर्ष अधिकारी भी मौजूद रहे।

महानदी विवाद: इतिहास के पन्नों से

  • 1983: तत्कालीन मध्य प्रदेश और ओडिशा के बीच विवाद की शुरुआत हुआ।
  • 2016: छत्तीसगढ़ द्वारा महानदी पर बैराज निर्माण को लेकर विवाद और अधिक गहरा गया।
  • 12 मार्च 2018: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्र सरकार ने 'महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण' (Tribunal) का गठन किया।