
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) 2022 परीक्षा घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आरोपित उत्कर्ष चंद्राकर को गिरफ्तार किया है। उत्कर्ष पर अभ्यर्थियों से 25 लाख रुपये लेकर परीक्षा में चयन कराने और लीक हुए प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का आरोप है। ईडी ने आरोपित को पांच दिन की रिमांड पर लिया है। मामले में अन्य आरोपितों और पैसों के लेनदेन से जुड़े तथ्यों को लेकर पूछताछ की जा रही है।
उत्कर्ष चंद्राकर रायपुर के शांति नगर का रहने वाला बताया गया है। घोटाले में नाम सामने आने के बाद से वह फरार चल रहा था। इससे पहले उसकी ओर से हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया गया था, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि प्रश्नपत्र लीक करना मेहनत और ईमानदारी से परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ है।
पूर्व में सीबीआइ की जांच में उत्कर्ष के खिलाफ अहम तथ्य सामने आए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, उसने एक अभ्यर्थी से 25 लाख रुपये लिए थे। आरोप है कि इसके बाद उसने करीब 30 से 35 उम्मीदवारों को सीजीपीएससी की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए। चयन के लिए अभ्यर्थियों से कथित तौर पर 50 से 60 लाख रुपये तक की रकम मांगी गई थी।
मामले की अहम गवाह सुषमा अग्रवाल ने धारा 164 के तहत दिए बयान में उत्कर्ष से जुड़े कई महत्वपूर्ण राजफाश किए हैं। उसके बयान के मुताबिक उत्कर्ष ने उससे 25 लाख रुपये लिए थे। इसके बाद परीक्षा की तैयारी के लिए अभ्यर्थियों को विशेष इंतजाम के साथ अलग-अलग स्थानों पर ठहराया गया।
गवाह के बयान के अनुसार, आठ मई 2022 को बुक की गई बस से अभ्यर्थियों को बारनवापारा के एक रिजार्ट ले जाया गया था। यहां कथित रूप से लीक प्रश्नपत्रों के आधार पर मुख्य परीक्षा की तैयारी कराई गई। प्रारंभिक परीक्षा से एक दिन पहले 12 फरवरी 2022 को उम्मीदवारों को प्रश्नपत्र और उसके उत्तर उपलब्ध कराने का भी आरोप है।
जांच में यह भी सामने आया कि मुख्य परीक्षा के दौरान मोबाइल के माध्यम से प्रश्नपत्र मंगवाकर रिजार्ट में ठहरे उम्मीदवारों को प्रश्नों के उत्तर याद करवाए जाते थे। परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को रायपुर के सिद्धि विनायक पैलेस, बारनवापारा रिजार्ट और होटल वेंकटेश इंटरनेशनल में ठहराने की बात भी जांच में सामने आई है।
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जांच में प्रश्नपत्र छपाई से लेकर उसके लीक होने तक की कड़ी भी सामने आई है। प्रश्नपत्र छपवाने का काम कोलकाता की प्रिंटिंग कंपनी को दिया गया था। जनवरी 2021 में कंपनी का कर्मचारी महेश दास सात सेट प्रश्नपत्र लेकर रायपुर आया था। उसने ये प्रश्नपत्र तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक को सौंपे थे।
आरोप है कि प्रश्नपत्र आरती वासनिक के घर ले जाए गए, जहां टामन सिंह सोनवानी और ललित गणवीर के साथ मिलकर उनकी कापी तैयार की गई। इसके बाद प्रश्नपत्रों को दोबारा सील कर प्रिंटिंग के लिए भेजे जाने की बात जांच में सामने आ चुकी है।