• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • रायपुर

1,000 करोड़ के दिव्यांग कल्याण घोटाले में सीबीआई का बड़ा खुलासा, पूर्व मुख्य सचिवों समेत 5 IAS जांच के घेरे में

छत्तीसगढ़ के चर्चित दिव्यांग कल्याण घोटाले में सीबीआई का शिकंजा कसता जा रहा है। करीब एक हजार करोड़ रुपये की संभावित गड़बड़ी के आरोपों की जांच कर रही क...और पढ़ें

By Satish PandeyEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Sun, 11 Oct 2026 04:21:01 PM (IST)Updated Date: Sun, 11 Oct 2026 04:21:38 PM (IST)
1,000 करोड़ के दिव्यांग कल्याण घोटाले में सीबीआई का बड़ा खुलासा, पूर्व मुख्य सचिवों समेत 5 IAS जांच के घेरे में
1,000 करोड़ के दिव्यांग घोटाले में सीबीआई का बड़ा खुलासा (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. दिव्यांग कल्याण घोटाला मामले में CBI दाखिल करेगी आरोप पत्र
  2. साल 2020 में हाई कोर्ट के निर्देश पर शुरू हुई थी सीबीआई जांच
  3. जांच में 2004 से 2018 के बीच 40 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी

नईदुनिया ब्यूरो, रायपुर। प्रदेश के चर्चित दिव्यांग कल्याण घोटाले (एसआरसी-पीआरआरसी) में सीबीआई का शिकंजा कसता जा रहा है। करीब एक हजार करोड़ रुपये की संभावित गड़बड़ी के आरोपों की जांच कर रही केंद्रीय एजेंसी आरोपपत्र दाखिल करने की तैयारी में है। आरोप पत्र इसी महीने दाखिल किया जा सकता है। मामले में दस्तावेजों की पड़ताल, पूछताछ और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया चल रही है।

मामले से जुड़ी याचिका में कई पूर्व और वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के नाम शामिल हैं। इसमें पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांढ और सुनील कुजूर के साथ डा. आलोक शुक्ला, एमके राउत और बीएल अग्रवाल जैसे नाम प्रमुख हैं। इसके अलावा सतीश पांडेय, पीपी सोती, राजेश तिवारी, अशोक तिवारी और तत्कालीन महिला एवं बाल विकास मंत्री रेणुका सिंह का संदर्भ भी सामने आया है।


35 से 40 करोड़ रुपये का वास्तविक खर्च

शुरुआती जांच में घोटाले में करीब एक हजार करोड़ रुपये की अनियमितता की बात सामने आई थी। आरोप था कि दिव्यांगों के पुनर्वास के लिए संचालित संस्थाओं (एसआरसी और पीआरआरसी) में कागजों पर कर्मचारियों की नियुक्ति दिखाकर वेतन निकाला गया। कुछ मामलों में सरकारी कर्मचारियों के नाम पर नकद भुगतान और वित्तीय गड़बड़ियों के भी आरोप लगे थे। हालांकि, सूत्रों के अनुसार सीबीआई की अब तक की जांच में दोनों संस्थाओं का वास्तविक खर्च महज 35-40 करोड़ रुपये के आसपास पाया गया है। जांच एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही इस पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

इसलिए मिला था सीबीआई को जांच का जिम्मा

हाई कोर्ट ने आशंका जताई थी कि वरिष्ठ पदों पर रहे प्रभावशाली अधिकारियों के नाम सामने आने से स्थानीय स्तर की जांच प्रभावित हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए अदालत ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी।

आरोपित अफसर अन्य मामलों में भी दागी

जांच के दायरे में आए कई अधिकारी पहले से ही अन्य बड़े मामलों में घिरे रहे हैं। विवेक ढांढ का नाम शराब घोटाले में, डा. आलोक शुक्ल का नान घोटाले में और बीएल अग्रवाल का शेयर व फर्जी बैंक खाता घोटाले, आय से अधिक संपत्ति और मनी लांड्रिंग मामलों में आ चुका है। सुनील कुजूर और एमके राउत भी अन्य मामलों की जांच का सामना कर चुके हैं।