
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। राजधानी के कलेक्टोरेट परिसर स्थित ऑक्सीजोन में एक आम का पेड़ सिस्टम की अनदेखी का शिकार हो गया। कुछ दिन पहले 15 अगस्त को तिरंगे के केसरिया, सफेद और हरे रंग से सजा यह पेड़ शान से खड़ा था, लेकिन अब उसे काट दिया गया है। खास बात यह है कि पेड़ काटे जाने की जानकारी महापौर मीनल चौबे और कमिश्नर को भी नहीं है।
पेड़ की खराब स्थिति को लेकर ‘नईदुनिया’ ने 22 अगस्त को प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। खबर में बताया गया था कि कंक्रीट के चबूतरे और आसपास हो रहे निर्माण के कारण पेड़ की जड़ों का दम घुट रहा था। पेड़ कमजोर होकर चारदीवारी के लोहे के सहारे खड़ा था और तेज हवा में उसके गिरने का खतरा बना हुआ था।
खबर सामने आने के बाद नगर निगम की महापौर मीनल चौबे ने आश्वासन दिया था कि यदि पेड़ को बचाने की थोड़ी भी संभावना होगी तो तत्काल उपचार और सुरक्षा के उपाय किए जाएंगे। आश्वासन के कुछ ही दिनों बाद पेड़ को काट दिया गया।
पेड़ काटे जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इसे कटवाने का आदेश किसने दिया। मामले में जिम्मेदार अधिकारी भी इस संबंध में अनजान बने हुए हैं। महापौर और कमिश्नर को भी यह जानकारी नहीं है कि पेड़ किसके निर्देश पर काटा गया।
कलेक्टोरेट परिसर के पिछले हिस्से में करीब 19 एकड़ क्षेत्र में फैला ऑक्सीजोन रायपुर शहर के बीच हरियाली का प्रमुख केंद्र है। इसे छह वर्ष पहले आम लोगों के लिए शुरू किया गया था। यहां पांच हजार से अधिक पेड़-पौधे मौजूद हैं।
यह भी पढ़ें- नवा रायपुर में बढ़ेगा आवासीय विस्तार, 119.89 करोड़ की परियोजना से 704 फ्लैट समेत बनेंगे 348 भवन
21 अगस्त को कैमरे में कैद तस्वीर में यह आम का पेड़ जीवंत नजर आ रहा था। कुछ ही दिनों बाद उसी स्थान पर उसका अस्तित्व खत्म हो गया। पेड़ को काटना भले आसान हो, लेकिन उसे बड़ा करने में वर्षों लगते हैं। अब यह घटना संरक्षण और जिम्मेदारी को लेकर कई सवाल खड़े कर रही है।
आम के पेड़ को कटवाने के संबंध में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस मामले की गुरुवार को तथ्यात्मक जांच कराई जाएगी। दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
-मीनल चौबे, महापौर, रायपुर
पेड़ को काटने के लिए हमसे किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई है। पेड़ किसने काटा है यह जानकारी नहीं है। आप हमें जानकारी उपलब्ध करा दीजिए हम इसकी जांच करेंगे।
-दिव्या चंद्रवंशी, जोन चार कमिश्नर