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पितृ मोक्ष अमावस्या पर नदी, तालाबों के घाट पर उमड़े लोग, महानदी, शिवनाथ, खारुन, हसदेव तटों पर हुआ तर्पण

पितृ पक्ष के अंतिम दिन पितृ मोक्ष अमावस्या पर रायपुर में खारून नदी और जलाशयों पर सामूहिक तर्पण और पिंडदान का आयोजन किया गया। समता कॉलोनी स्थित गायत्री...और पढ़ें

By Manish MishraEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Sat, 10 Oct 2026 10:56:59 AM (IST)Updated Date: Sat, 10 Oct 2026 11:01:05 AM (IST)
पितृ मोक्ष अमावस्या पर नदी, तालाबों के घाट पर उमड़े  लोग, महानदी, शिवनाथ, खारुन, हसदेव तटों पर हुआ तर्पण
खारुन नदी के तट पर तर्पण करते लोग। - नईदुनिया

HighLights

  1. खारून नदी तट पर हुआ सामूहिक पिंडदान तर्पण
  2. गायत्री शक्ति पीठ में की गई थी विशेष व्यवस्था
  3. सरजू बांधा में लावारिस मृतकों के लिए हुआ शांति हवन

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। पितृ मोक्ष अमावस्या पर राजधानी रायपुर सहित पूरे अंचल में लोगों ने अपने पूर्वजों का तर्पण किया। परिवारों ने पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध कर्म संपन्न किए। जिनके वार्षिक श्राद्ध किसी कारणवश छूट गए थे, वे सभी आज पितरों के निमित्त तर्पण और पिंडदान करने जलाशयों के तट पर पहुंचे। महादेव घाट स्थित खारून नदी और शहर के विभिन्न ऐतिहासिक तालाबों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतार लगी रही।

धार्मिक मान्यताओं और धर्मशास्त्रों के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक का समय पितरों की आराधना के लिए समर्पित होता है। ज्योतिषविदों का कहना है कि इन दिनों पितर देव पृथ्वी लोक पर आते हैं और परिजनों द्वारा दिए गए जल, तिल, कुशा, दूध और अक्षत से तृप्त होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। शास्त्रों में "श्रद्धा दीयते यत् तत् श्राद्धम्" का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि निष्ठा और प्रेम से किया गया दान ही सच्चा श्राद्ध है। यह दिन न केवल परलोक गमन कर चुके पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करने का माध्यम है, बल्कि जीवित माता-पिता और वरिष्ठजनों की सेवा का भी संदेश देता है।


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गायत्री शक्ति पीठ में तर्पण

समता कॉलोनी स्थित गायत्री शक्ति पीठ में सर्व पितृ अमावस्या पर विशेष अनुष्ठान का आयोजन किया गया। यहां विधि-विधान से पिंडदान और तर्पण कराए गए। आचार्यों की उपस्थिति में व्यापक प्रबंध किए गए थे। जिन लोगों को अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है, उनके लिए इस दिन किया गया कर्मकांड अक्षय फलदायी माना जाता है।

सरजू बांधा में लावारिस मृतकों की आत्मशांति हेतु हवन

कृष्ण मित्र फाउंडेशन की ओर सेस सरजू बांधा श्मशान घाट परिसर में अज्ञात और लावारिस मृतकों की आत्मशांति केलिए सामूहिक पिंडदान और शांति हवन किया गया। संस्था बीते तीन वर्षों से लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने के साथ ही पितृ मोक्ष अमावस्या पर उनकी आत्मा की शांति हेतु यह अनुष्ठान कर रही है। धार्मिक अनुष्ठान के उपरांत मुक्तिधाम में पूर्वजों की पावन स्मृति में पौधरोपण भी किया गया।