
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। कभी यह प्रतिमा एक गांव तक पहुंचने के लिए बनाई गई थी, लेकिन उसका सफर बीच रास्ते में थम गया। आज वही ठहराव आस्था का केंद्र बन चुका है। राजधानी रायपुर के नजदीक ग्राम निमोरा में स्थापित सद्गुरु कबीर साहेब की 33 फीट ऊंची और 80 टन वजनी विशाल प्रतिमा अब श्रद्धा, समाज और संकल्प का प्रतीक बन गई है।
रविवार को यहां कबीर साहेब का प्राकट्य उत्सव भक्तिभाव, भजन और सामाजिक संदेशों के बीच उत्साहपूर्वक मनाया गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी। विशाल प्रतिमा के समक्ष शोभायात्रा निकाली गई, निशाना पूजा हुई, भजन-सत्संग का आयोजन किया गया और प्रसादी वितरण के साथ माहौल आध्यात्मिक रंग में रंग गया। आयोजन में कबीरपंथी साहू समाज, कबीर सैनिक सेवार्थी संघ, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में संत समाज की भागीदारी रही।
इस प्रतिमा के पीछे भी एक रोचक कहानी छिपी है। मूर्तिकार पीलूराम साहू बताते हैं कि सात वर्ष पहले इस प्रतिमा को आरंग क्षेत्र के फरसौद गांव में स्थापित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। लेकिन जब इसे स्थानांतरित करने का समय आया तो इसकी विशालता चुनौती बन गई। प्रतिमा को उठाने के लिए 80-80 टन क्षमता की दो क्रेन और 14-14 टन क्षमता की दो अतिरिक्त क्रेन लगाई गईं, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद प्रतिमा केवल एक फीट तक ही उठ सकी।
कई प्रयासों के बाद यह तय किया गया कि प्रतिमा को वहीं स्थापित किया जाए, जहां यह बनी थी। समय के साथ यही स्थान श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बन गया।