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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 18, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अब कागज नहीं, ‘MY DEED’ से होगा संपत्ति का रजिस्ट्रेशन, जानिए क्या है यह नयी व्यवस्था

छत्तीसगढ़ में संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन डिजिटल करने के लिए प्रशासन की ओर से खास पहल किया गया है। राज्य में अब संपत्तियों का पंजीयन कागज पर नहीं बल्की ...और पढ़ें

By Roman TiwariEdited By: Roman Tiwari
Publish Date: Fri, 18 Jul 2025 12:12:05 PM (IST)Updated Date: Fri, 18 Jul 2025 12:17:25 PM (IST)
अब कागज नहीं, ‘MY DEED’ से होगा संपत्ति का रजिस्ट्रेशन, जानिए क्या है यह नयी व्यवस्था
माय डीड के जरिए ऑनालाइन संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर: प्रदेश में अब जमीन की रजिस्ट्री पूरी तरह ऑनलाइन और कागज रहित (पेपरलेस) हो गई है। सरकार ने ‘माय डीड’ डिजिटल व्यवस्था को राज्य के सभी पंजीयन कार्यालयों में 10 जुलाई से अनिवार्य कर दिया है। अब दस्तावेज तैयार करने से लेकर रजिस्ट्री तक की प्रक्रिया कंप्यूटर और इंटरनेट के माध्यम से ही होगी।

बता दें कि पहले चरण में यह व्यवस्था नवागढ़ (बेमेतरा), डौंडीलोहारा (बालोद), नगरी (धमतरी) और पथरिया (मुंगेली) में 27 जून से लागू की गई थी। अब दूसरे चरण में 18 और कार्यालयों में इसे शुरू किया गया है। इसके साथ ही पूरे राज्य में यह प्रणाली अनिवार्य हो गई है।


यह है सरकार का उद्देश्य

‘माय डीड’ प्रणाली का उद्देश्य पंजीयन प्रक्रिया को पारदर्शी, तेज और भ्रष्टाचार मुक्त बनाना है। इससे दस्तावेजों की जांच, स्वीकृति और रजिस्ट्री घर बैठे हो सकेगी। रजिस्ट्री कार्यालयों में लगने वाली भीड़ कम होगी और अधिकारियों पर काम का बोझ भी घटेगा।

जानिए क्या है माय डीड

माय डीड एक डिजिटल प्लेटफार्म है जो दस्तावेजों के ऑनलाइन निर्माण, सत्यापन और रजिस्ट्री की प्रक्रिया को पूरी तरह पेपरलेस और पारदर्शी बनाता है। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की संभावनाएं भी कम होंगी।

आ सकती हैं ये दिक्कतें

  • ग्रामीण व बुजुर्गों की परेशानी : जो लोग कंप्यूटर या मोबाइल चलाने में सहज नहीं हैं, उन्हें दस्तावेज तैयार करने में कठिनाई हो सकती है।
  • सर्वर और सिस्टम की दिक्कतें : कई जगहों पर इंटरनेट की धीमी गति और साइबर कैफे में सुविधा की कमी के कारण आमजन को भागदौड़ करनी पड़ सकती है।
  • दलालों की वापसी : तकनीकी जानकारी के अभाव में लोग फिर से बिचौलियों पर निर्भर हो सकते हैं।
  • त्रुटिपूर्ण दस्तावेज : यदि आनलाइन फार्म भरते समय कोई गलती हुई तो पूरी पंजीयन प्रक्रिया अटक सकती है।

इन जिलों में अब अनिवार्य

बालोद (डल्लीराजहरा), बलौदाबाजार (कसडोल), बलरामपुर (राजपुर), बस्तर (कोण्डागांव), बेमेतरा (साजा), बिलासपुर (मरवाही), दुर्ग (बोरी), गरियाबंद, जांजगीर (अकलतरा), जशपुर (कुनकुरी), कबीरधाम (बोड़ला), कांकेर (भानुप्रतापपुर), कोरबा (पाली), कोरिया (बैकुंठपुर), रायपुर (टिल्दा-नेवरा), राजनांदगांव (मोहला), सुरजपुर (प्रतापपुर), सरगुजा (सीतापुर)।

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अधिकारियों को निर्देश

महानिरीक्षक पंजीयन ने एनआइसी पुणे और मंत्रालय के तकनीकी विशेषज्ञों को व्यवस्था करने और सभी कार्यालयों को आवश्यक तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जिला और उप पंजीयकों को भी आदेश दिए गए हैं कि आम जनता को इस व्यवस्था की जानकारी समय रहते दी जाए।