
National Education Confrence: रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी ने रविवार को यूएसए बोस्टन से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय शिक्षा समागम में आनलाइन शिरकत की। विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल बनर्जी ने कोरोना काल में बच्चों के शिक्षण पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अभी बच्चों के लर्निंग लास की भरपाई के लिए उनके सिलेबस को पूरा करने के बजाय उनके सीखने की क्षमता पर जोर दें।
उन्होंने कहा कि कोरोना काल में औपचारिक शिक्षा संस्थान बंद हो चुके थे तो इसका दूरगामी प्रभाव स्कूल शिक्षा पर विशेष रूप से पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। उन्होंने पाकिस्तान का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां पर भूकंप के प्रभाव के कारण लगभग ढाई महीने स्कूल बंद थे और रिसर्च में यह बात सामने आई ढाई महीने का प्रभाव जो शिक्षा पर पड़ा उसकी भरपाई एक वर्ष से भी अधिक समय में संभव थी और अब जबकि कोविड-19 का इतना लंबा अंतराल रहा है तो हम शिक्षा के सीखने और सिखाने की प्रक्रिया पर इसके असर की कल्पना कर सकते हैं।
अब परिस्थितियों के अनुसार बनाएं शिक्षा की रणनीति
उन्होंने कहा कि हमें वर्तमान में बच्चों की सीखने की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान देना होगा और विषय वस्तु को ध्यान में रखकर अध्यापन की प्रक्रिया संचालित करना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने युगांडा पर हुए शोध को भी उद्धृत किया। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षित शिक्षक और अप्रशिक्षित शिक्षकों के अध्यापन की परिणाम स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। अत: हमें शिक्षा के क्षेत्र में विशेष रूप से बदली हुई परिस्थितियों को ध्यान में रखकर अपनी रणनीति तैयार करनी होगी, ताकि हम कोविड-19 की परिस्थितियों को अवसर में परिणित कर लक्ष्य की ओर अग्रसर हो सकें।
वर्चुअल कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने की तारीफ
वर्चुअल कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अभिजीत बनर्जी के नेहरू के कोट को लेकर तारीफ की और माहौल खुशनुमा हो गया। अभिजीत बनर्जी ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने कोरोना काल में शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य किया है। कार्यक्रम की एंकरिंग राज्य योजना आयोग की शिक्षा सलाहकार सुश्री मिताक्षरा कुमारी ने किया।