
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण एक तरफ नवा रायपुर को पीपल सिटी बनाने के लिए करीब 20 करोड़ रुपये के वृक्षारोपण और हरियाली प्रोजेक्ट की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर मातृछाया परिसर में पिछले वर्ष लगाए गए 22 हजार से अधिक पौधे गायब हो चुके हैं। प्रधानमंत्री के एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत लगाए गए अधिकांश पौधे पहले ही साल में सूख गए थे।
हालात यह हैं कि जहां कभी पौधे लगाए गए थे, वहां अब केवल घास और सूखे ठूंठ नजर आ रहे हैं। नेताओं और अफसरों के नाम की तख्तियां भी कबाड़ में पड़ी मिलीं। अब सवाल उठ रहा है कि जब पुराने पौधों को बचाया नहीं जा सका, तब नए वृक्षारोपण अभियान की निगरानी कैसे होगी।
मातृछाया परिसर में जुलाई 2024 में मुख्यमंत्री, डिप्टी सीएम, मंत्रियों और अफसरों ने पौधे लगाए थे। दावा था कि यहां हरियाली का बड़ा माडल तैयार होगा, लेकिन एक साल के भीतर अधिकांश पौधे सूख गए। मौके पर अब केवल कुछ ही पौधे जीवित दिखाई दे रहे हैं।
पौधों के सामने लगाई गई नाम पट्टिकाएं अब कबाड़ में पड़ी मिलीं। इनमें डिप्टी सीएम, सांसद, चीफ सेक्रेटरी और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल हैं। हालत यह है कि अब यह पहचानना भी मुश्किल हो गया है कि कौन सा पौधा किसने लगाया था।
वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग अब मातृछाया परिसर में ड्रिप सिंचाई सिस्टम लगाने की तैयारी कर रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि शुरुआत में ही सिंचाई और रखरखाव की व्यवस्था होती तो हजारों पौधे सूखने से बच सकते थे। विभागीय लापरवाही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
पुराने अभियान की असफलता के बीच अब नवा रायपुर में पीपल वृक्षारोपण, गार्डन, सड़क और फेंसिंग सहित नए हरियाली प्रोजेक्ट शुरू किए जा रहे हैं। प्राधिकरण का दावा है कि इस बार पौधों के रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। हालांकि पिछली तस्वीरों के सामने आने के बाद लोगों में नए अभियान को लेकर संदेह भी दिखाई दे रहा है।
साल - पौधरोपण
2024-25 — 3.5 करोड़ रु.
2023-24 — 3.85 करोड़ रु.
2022-23 — 2.49 करोड़ रु.
नवा रायपुर में झांझ लेक एवं सेंध लेक क्षेत्र में किए जा रहे वृक्षारोपण और पीपल प्लांटेशन का अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया गया। पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने की दिशा में यह अभियान महत्वपूर्ण है। अधिकारियों को पौधों के संरक्षण, नियमित देखरेख और जल प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि लगाए गए पौधे लंबे समय तक सुरक्षित रह सकें।”
- ओपी चौधरी, मंत्री, पर्यावरण विभाग