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तस्करों, शिकारियों पर लगाम कसने की कवायद, माओवादियों से जंग जीतने के बाद अब जंगलों की पहरेदारी करेंगे डीआरजी जवान

बस्तर में माओवाद के प्रभाव कम होने के बाद अब सरकार वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है। वन विभाग ने जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) जवानों को वन अमले के साथ मिलकर संयुक्त गश्त करने का प्रस्ताव दिया है। यह पहल अवैध शिकार, लकड़ी तस्करी और वन भूमि पर अतिक्रमण जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए एक प्रभावी कदम साबित होगी।

By Satish PandeyEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Sun, 28 Jun 2026 04:10:00 PM (IST)Updated Date: Sun, 28 Jun 2026 04:11:33 PM (IST)
तस्करों, शिकारियों पर लगाम कसने की कवायद, माओवादियों से जंग जीतने के बाद अब जंगलों की पहरेदारी करेंगे डीआरजी जवान
डीआरजी महिला कमांडो। अर्काइव

HighLights

  1. बस्तर में वन सुरक्षा के लिए नई रणनीति
  2. डीआरजी और वन विभाग करेंगे संयुक्त गश्त
  3. अवैध शिकार और तस्करी पर लगेगी लगाम

राज्य ब्यूरो,नईदुनिया,रायपुर। बस्तर में माओवाद के खात्मे के बाद अब सरकार की नजर जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा पर है। वन विभाग ने जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के जवानों को वन सुरक्षा कार्यों में लगाने की पहल की है। इस संबंध में प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने पुलिस महानिदेशक को प्रस्ताव भेजकर स्थानीय परिस्थितियों से परिचित डीआरजी जवानों की सेवाएं वन अमले के साथ लेने का सुझाव दिया है।

भेजे गए प्रस्ताव में कहा गया है कि माओवादी विरोधी अभियानों में वर्षों तक सक्रिय रहे डीआरजी जवान दुर्गम पहाड़ी और वन क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों से भलीभांति परिचित हैं। ऐसे में उनकी वन अमले के साथ तैनाती से जंगलों में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।


जंगलों की सुरक्षा के लिए नई रणनीति

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव वार्डन अरुण कुमार पाण्डेय ने डीजीपी को लिखे पत्र में कहा है कि प्रस्तावित योजना के तहत डीआरजी जवानों को बीट गार्ड, वनरक्षक और मैदानी अधिकारियों के साथ संयुक्त गश्त में लगाया जा सकता है। जिला स्तर पर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को समन्वय की जिम्मेदारी दिए जाने पर भी विचार किया जा रहा है। पुलिस मुख्यालय की सहमति मिलने के बाद राज्य सरकार इस पर नीतिगत फैसला ले सकती है। यदि योजना लागू होती है तो माओवाद के बाद बस्तर के जंगलों की सुरक्षा के लिए यह एक नई रणनीति साबित होगी।

वन्यजीव प्रेमी जता रहे आशंका

वन्यजीव संरक्षण से जुड़े नितिन सिंघवी ने शासन को भेजे पत्र में आशंका जताई है कि बस्तर क्षेत्र में माओवादी प्रभाव कम होने के बाद जंगलों में अवैध गतिविधियों का खतरा बढ़ सकता है।जिन क्षेत्रों में पहले माओवादियों के भय से शिकारी, लकड़ी तस्कर और भूमाफिया नहीं पहुंच पाते थे, वहां अब अवैध शिकार, पेड़ों की कटाई और वन भूमि पर अतिक्रमण की घटनाएं बढ़ सकती हैं।

संयुक्त अभियान का प्रस्ताव

माओवाद के खात्मे के बाद अब बस्तर के जंगलों की सुरक्षा के लिए पुलिस के साथ संयुक्त अभियान चलाने का प्रस्ताव दिया गया है। इस संबंध में डीजीपी से विस्तृत चर्चा भी हुई है। जल्द ही इस पर फैसला लिया जाएगा। उम्मीद है कि वन्यजीवों के शिकार, पेड़ों की कटाई और वन भूमि पर अतिक्रमण आदि घटनाओं पर पुलिस के साथ वन अमला प्रभावी तरीके से अंकुश लगाने में सफल होगा।

-अरुण कुमार पांडेय,पीसीसीएफ,छत्तीसगढ़

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