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रायपुर में रेत माफिया को संरक्षण देने वाले अफसरों पर गिरेगी गाज, NGT सख्त, 42 दिन में मांगी जांच रिपोर्ट

जिले में लंबे समय से चल रहे अवैध रेत खनन और परिवहन के मामलों को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी के निर्देश पर खनन माफिया पर क...और पढ़ें

By Akash PandeyEdited By: Akash Pandey
Publish Date: Fri, 23 Jan 2026 12:14:09 PM (IST)Updated Date: Fri, 23 Jan 2026 12:14:09 PM (IST)
रायपुर में रेत माफिया को संरक्षण देने वाले अफसरों पर गिरेगी गाज, NGT सख्त, 42 दिन में मांगी जांच रिपोर्ट
अवैध रेत खनन(फाइल फोटो)

नईदुनिया प्रतिनिधि,रायपुर। जिले में लंबे समय से चल रहे अवैध रेत खनन और परिवहन के मामलों को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी के निर्देश पर खनन माफिया पर कार्रवाई नहीं करने वाले अफसरों पर अब शिकंजा कसा गया है। मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिए जिला मजिस्ट्रेट और छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के प्रतिनिधि संयुक्त रूप से जांच करेंगे और 42 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।

जिला खनिज विभाग ने बीते एक वर्ष में रेत, मुरुम, गिट्टी और फर्शी पत्थर के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के मामलों में कार्रवाई करते हुए 1,132 वाहनों को पकड़ा। साथ ही पोकलेन और चेन माउंटेन सहित करीब 40 मशीनें जब्त की गईं। इन प्रकरणों में कुल तीन करोड़ 85 लाख रुपये का अर्थदंड वसूला गया। इसके बावजूद किसी भी गंभीर मामले में कठोर कार्रवाई नहीं की गई। अधिकांश मामलों में मौके पर जुर्माना वसूल कर प्रकरण समाप्त कर दिया गया और एनजीटी को भेजा ही नहीं गया।


एनजीटी के स्पष्ट निर्देश

एनजीटी ने कहा है कि अवैध रेत खनन केवल राजस्व की चोरी नहीं, बल्कि गंभीर पर्यावरणीय खतरा है। ऐसे मामलों में सिर्फ वाहन जब्ती या जुर्माना पर्याप्त नहीं है। दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई के साथ पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति भी अनिवार्य है। इसी आधार पर एनजीटी ने सीईसीबी के सदस्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि अवैध रेत खनन में संलिप्त व्यक्तियों और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए और 42 दिनों के भीतर रिपोर्ट एनजीटी की केंद्रीय पीठ, भोपाल में प्रस्तुत की जाए। मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल 2026 को तय की गई है।

वाहन जब्त, माफिया पर असर नहीं

एनजीटी के न्यायिक सदस्य श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल की पीठ ने टिप्पणी की कि खनिज विभाग ने अवैध परिवहन में लगे कई वाहन जब्त किए, लेकिन वास्तविक अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। कुछ मामलों को आधिकारिक फाइलों से हटाने की बात भी सामने आई है। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं।

जिम्मेदारों की अनदेखी

एनजीटी ने पाया कि जिला खनिज विभाग के संज्ञान में मामला आने के बाद भी संबंधित अधिकारियों ने कार्रवाई के बजाय अनदेखी की। इसी कारण सीईसीबी के सदस्य सचिव, खनिज विभाग के उप निदेशक छत्तीसगढ़ और जिला खनन अधिकारी रायपुर को प्रतिवादी बनाया गया है।

नियमों की अवहेलना

नियमों के अनुसार स्वीकृत क्षेत्र से बाहर खनन, भारी मशीनों का उपयोग, नदी प्रवाह से छेड़छाड़ और पर्यावरण क्षति जैसे मामलों में एफआइआर दर्ज करना अनिवार्य है। अवैध खनन गंभीर अपराध है, जिसमें दो से पांच साल की सजा और पांच लाख रुपये या उससे अधिक का जुर्माना हो सकता है। इसके अतिरिक्त एनजीटी द्वारा पर्यावरणीय क्षति के लिए अलग से भारी मुआवजा भी लगाया जाता है, इसके बावजूद जिला स्तर पर मामलों को एनजीटी तक नहीं भेजा गया।

हरदीडीह एनीकट का मामला

हरदीडीह एनीकट का गेट बार-बार खोलकर खनन करने का खुलासा नईदुनिया ने किया था। यहां रेत खदान में प्रदेश हाईवा परिवहन संघ के अध्यक्ष विनोद अग्रवाल द्वारा खनन का मामला सामने आया। खबर के अगले ही दिन नदी में चेन माउंटेन उतारकर फिर से अवैध खनन शुरू हो गया। न एफआइआर दर्ज हुई और न ही मशीनें पूरी तरह जब्त की गईं। खनिज विभाग ने प्रकरण बनाया, लेकिन तीन चेन माउंटेन और एक पनडुब्बी मशीन मौजूद होने के बावजूद कार्रवाई केवल एक चेन माउंटेन और पनडुब्बी मशीन तक सीमित रही। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश के दतिया में इसी तरह के मामले में एनजीटी ने 17 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था।

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