
रायपुर। झीरम घाटी में कांग्रेस के काफिले पर नक्सली हमले की सीबीआई जांच की घोषणा भले ही सरकार ने कर दी है, लेकिन सीबीआई किस तरह जांच कर पाएगी यह कहना अभी मुश्किल है। सीबीआई की अपराध अनुसंधान प्रणाली के जानकारों के मुताबिक वारदात के तीन साल बाद झीरम घाटी से जुड़े सभी साक्ष्यों को सिलसिलेवार एकत्र करना, अपराधियों को पकड़ना और एक विस्तृत अभियोग पत्र तैयार करना सीबीआई के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
छत्तीसगढ़ में दशकों से चल रहे नक्सली वारदातों के बीच ऐसे अवसर कम ही आए हैं जब सीबीआई जैसी संस्था को जांच सौंपी गई। करीब पांच साल पहले बस्तर के ही ताड़मेटला में हुई आगजनी की घटना की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी, लेकिन यह जांच अब तक पूरी नहीं हो पाई है। पुलिस के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार जांच पूरी न होने के पीछे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि सीबीआई अब तक इस अपराध से जुड़े साक्ष्य एकत्र नहीं कर पाई है।
नक्सल मामले में सीबीआई को इससे पहले ताड़मेटला, तिम्मापुर और मोरपल्ली गांवों में आगजनी की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सुकमा जिले के यह तीनों गांव अति नक्सल प्रभावित इलाकों में हैं तथा वहां तक पहुंचने में सीबीआई को पांच साल लग गए।
नक्सली इलाकों में जाने के लिए सीबीआई के अफसरों को पुलिस व अर्धसैन्य बलों की सुरक्षा की जरूरत होती है, ऐसे में पुलिस से जुड़े मामलों की जांच कर पाना सीबीआई के लिए भी आसान नहीं है। ताड़मेटला में आगजनी के बाद वहां पहुंचे स्वामी अग्निवेश पर सलवा जुडूम से जुड़े आदिवासियों ने हमला किया था। इसकी जांच भी सीबीआई अब तक नहीं कर पाई है। ये दोनों मामले मार्च 2011 के हैं।
सीबीआई पर भी हो चुका है हमला
ताड़मेटला कांड की जांच के लिए बस्तर गए सीबीआई के अफसरों पर भी जानलेवा हमला हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आगजनी व स्वामी अग्निवेश पर हमले की जांच कर सीबीआई की टीम 2011 में सुकमा जिले के दोरनापाल में रेस्ट हाउस में रुकी थी, तभी रात में अचानक सलवा जुडूम के सैकड़ों लोगों ने रेस्ट हाउस पर हमला बोल दिया था। सीबीआई के अफसरों ने खुद को कमरे में बंद कर अपनी जान बचाई थी। इस हमले के संबंध में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर सुरक्षा की मांग की थी।
जंगल में जाना आसान नहीं
बस्तर के नक्सल प्रभावित इलाकों में जांच के लिए किसी भी टीम का पहुंच पाना आसान नहीं होता। मुख्य सड़क से कई किलोमीटर अंदर स्थित गांवों तक जंगलों के रास्ते पैदल जाना होता है। नक्सली हमले का खतरा भी रहता है। रास्तों में जगह-जगह प्रेशर बम का भी अंदेशा बना रहता है। ऐसे में पुलिस व अर्धसैन्य बलों की मदद के बिना सीबीआई मामले की जांच कर नहीं सकती।
ताड़मेटला की हो रही जांच
पांच साल पहले हुए ताड़मेटला कांड की जांच चल रही है। सीबीआई के एसपी तन्मय बेहरा ने बताया कि पिछले महीने ही सीबीआई की टीम ताड़मेटला, मोरपल्ली व तिम्मापुर गांवों में गई थी। हालांकि इसके लिए टीम को चिंतलनार तक हेलिकॉप्टर से भेजा गया था तथा पूरी सुरक्षा दी गई थी।
पाठक हत्याकांड में डाली क्लोजर रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ में इससे पहले सीबीआई एक चर्चित मामले में असफल हो चुकी है। बिलासपुर के पत्रकार सुशील पाठक हत्याकांड में सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है। छुरा के पत्रकार उमेश राजपूत की 2011 में हुई हत्या की जांच भी पांच साल से चल रही है व सीबीआई अब तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है।
झीरम मामले में सबको पता है कि अपराध नक्सलियों ने किया है। जो प्रत्यक्षदर्शी जिंदा बचे हैं, उनके बयान पहले ही हो चुके हैं। मुझे लगता है सीबीआई यह पता करने की कोशिश करेगी कि किसने यह करवाया था। - फरहान, अधिवक्ता
जांच की अनुशंसा जल्द केंद्र को भेजेगी सरकार
झीरम घाटी में हुए नक्सली हमले की जांच सीबीआई से कराने की अनुशंसा राज्य सरकार जल्द ही केंद्र सरकार को भेजेगी। गृहमंत्री अजय चंद्राकर ने नईदुनिया को बताया कि राज्य सरकार ने विधानसभा में सीबीआई जांच कराने की घोषणा की है। अब इसकी अनुशंसा जल्द ही केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। बताया गया है कि इस संबंध में गृह विभाग द्वारा प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। इसे सामान्य प्रशासन विभाग को भेजा जाएगा। विधि विभाग से इस पर अभिमत लिया जा सकता है। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक गृह विभाग में प्रस्ताव का मसौदा तैयार करना शुरू कर दिया है। प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा राज्य मंत्रिमंडल की आगामी बैठक में इसका अनुमोदन लिया जाएगा।
उच्च प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार गुरुवार को विधानसभा भवन के समिति कक्ष में हुई कैबिनेट की बैठक में मसौदा तैयार नहीं होने के कारण सीबीआई जांच के मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई। इससे पहले बुधवार को गृहमंत्री अजय चंद्राकर ने विधानसभा में अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए विपक्ष की मांग को झीरम घाटी नक्सली हमले की सीबीआई जांच कराने की घोषणा की थी।
बताया जा रहा है कि विधानसभा में घोषणा से पहले मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय, बृजमोहन अग्रवाल और अजय चंद्राकर ने चर्चा की थी कि कांग्रेसी लगातार सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। इसे देखते हुए क्यों न सरकार की ओर से सीबीआई जांच कराने की घोषणा कर दी जाए, ताकि यह मामला विपक्षी बार-बार न उठा सकें। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के दिल्ली से लौटने के बाद अजय चंद्राकर ने चर्चा की और उनकी सहमति मिलने के बाद सदन में घोषणा करने का निर्णय लिया गया।