यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 08, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
NSUI Chhattisgarh: केंद्रीय और राज्य स्तर पर छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं में मिले आयु सीमा में छूट : एनएसयूआइ
NSUI Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में शिक्षा बचाओ-देश बचाओ अभियान की एनएसयूआइ ने सोमवार को शुरुआत की।
By Kadir KhanEdited By: Kadir Khan
Publish Date: Mon, 08 Nov 2021 03:43:40 PM (IST)Updated Date: Mon, 08 Nov 2021 03:43:40 PM (IST)

NSUI Chhattisgarh: रायपुर। नेशनल स्टूडेंट यूनियन आफ इंडिया (एनएसयूआइ) ने सोमवार को छत्तीसगढ़ में शिक्षा बचाओ-देश बचाओ अभियान की शुरुआत की। एनएसयूआइ के छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडे ने प्रेसवार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि नई शिक्षा नीति केंद्रीकरण और शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा देती है। साथ ही यह शिक्षा विरोधी नीति तब लाई गई, जब पूरे देश में कोविड महामारी का असर अधिक था। उद्देश्य साफ है कि मोदी सरकार शिक्षा को भी सिर्फ अमीरों के लिए एक सुविधा जैसा बनाना चाहती है। गरीब बच्चों के भविष्य के साथ यह सीधा खिलवाड़ है।
शिक्षा बचाओं देश बचाओ अभियान को एनएसयूआइ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्षा नीरज पांडे ने लांच किया। नीरज ने कहा कि बीजेपी सरकार निजीकरण नौकरियां, आरक्षण व भविष्य सब बर्बाद कर देगा। सरकारी संस्थानों के निजीकरण से देश के युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के अवसर खत्म हो जाएंगे। अब तो नई शिक्षा नीति भी निजीकरण को बढ़ावा दे रही या है तो गरीब जाए तो जाए कहां?
साथ ही एसएससी (SSC), नीट (NEET), जेईई (JEE) जैसे सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में घोटाले सामने आना व युवाओं को वर्षों तक नौकरी नहीं देना यह साफ बताता है कि मोदी सरकार छात्र विरोधी है। अगर हम छात्र वर्ग के लिए कोई नीति बना रहें हैं तो हमारा कर्तव्य बनता हैं कि हम उनसे चर्चा करेंं, लेकिन वर्तमान सरकार की आदत बन चुकी हैं कि सभी कार्य तानाशाही तरीके से लागू करते हैं।
एनएसयूआइ छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष नीरज पाण्डेय का कहना है कि जब से बीजेपी सरकार सत्ता में आई हैं तब से छात्रों की फैलोशिप एवं स्कालरशिप रोकी जा रही हैं, प्रवेश परीक्षाओं में घोटाले हो रहें हैं तथा परीक्षाओं के परिणाम देरी से आ रहे हैं। जिसके कारण छात्रों के 2 से 3 साल बर्बाद हो जाते हैं।
एनएसयूआइ केंद्र सरकार से मांग करती हैं कि केंद्रीय स्तर एवं प्रदेश स्तर पर छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं में आयु सीमा में कम से कम 2 साल की छूट दी जाएं, क्योंकि कोरोना काल में छात्रों के 2 साल पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं।
गौरतलब है कि कोरोना काल के नुकसान के बाद छात्र अब तक नुकसान से नहीं उबर पाए है और एनएसयूआइ के इस आंदोलन ने छात्रों की मांगों को आवाज दी है। इस प्रेस-वार्ता के दौरान अमित शर्मा, परमीत हनी बग्गा, हेमन्त पाल, भक्कू कश्यप, कृष्णा सोनकर, तुषार गुहा, मिर्जा असलम मौजूद थे।