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छत्तीसगढ़ के नुआखाई पर्व को राष्ट्रपति भवन में मिला सम्मान: राष्ट्रीय गांड़ा महासमाज ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का जताया आभार

रायपुर में गोंड-गांड़ा और जनजातीय परंपरा से जुड़े लोकपर्व नुआखाई को राष्ट्रपति भवन में सम्मान मिलने पर राष्ट्रीय गांड़ा महासमाज ने प्रसन्नता जताई।

By Digital DeskEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Fri, 18 Sep 2026 03:43:35 PM (IST)Updated Date: Fri, 18 Sep 2026 03:43:35 PM (IST)
छत्तीसगढ़ के नुआखाई पर्व को राष्ट्रपति भवन में मिला सम्मान: राष्ट्रीय गांड़ा महासमाज ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का जताया आभार
नुआखाई पर्व को राष्ट्रपति भवन में मिला सम्मान

HighLights

  1. गोंड-गांड़ा, ओड़िया और जनजातीय परंपरा से जुड़ा लोकपर्व
  2. भगवानू नायक बोले- करोड़ों लोगों के लिए गौरव का विषय
  3. गांव, खेत और जंगलों में बसी है सांस्कृतिक शक्ति

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। गोंड-गांड़ा, ओड़िया और जनजातीय समुदाय की सांस्कृतिक परंपरा से गहराई से जुड़े प्रमुख लोकपर्व नुआखाई को राष्ट्रपति भवन में गरिमामय स्थान मिलने पर राष्ट्रीय गांड़ा महासमाज ने प्रसन्नता व्यक्त की है। समाज ने इस सम्मान के लिए भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के प्रति आभार व्यक्त किया है।

राष्ट्रपति के प्रति आभार व्यक्त किया

राष्ट्रीय गांड़ा महासमाज के संस्थापक अधिवक्ता भगवानू नायक ने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक संस्थान राष्ट्रपति भवन में नुआखाई जैसे लोकपर्व और लोक-संस्कृति को सम्मान मिलना उन करोड़ों लोगों के लिए गौरव का विषय है, जो पीढ़ियों से प्रकृति, कृषि, श्रम और सामुदायिक जीवन से जुड़ी इन परंपराओं को जीवित रखे हुए हैं।


उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल एक पर्व का सम्मान नहीं है, बल्कि उन सभी समुदायों का सम्मान है जो अपनी जड़ों से जुड़े रहकर भारतीय संस्कृति को समृद्ध कर रहे हैं।

राष्ट्रपति भवन विविधता में एकता का प्रतीक

भगवानू नायक ने कहा, “राष्ट्रपति भवन केवल एक भव्य भवन नहीं, बल्कि भारत के संविधान, लोकतंत्र और हमारी विविधता में एकता का राष्ट्रीय प्रतीक है। इसलिए वहां देश के विभिन्न समुदायों की लोक-संस्कृति को स्थान मिलना सांस्कृतिक समावेश का सकारात्मक संदेश देता है।”

उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक सांस्कृतिक शक्ति केवल महानगरों में नहीं, बल्कि गांवों, खेतों, जंगलों और उन समुदायों के बीच भी मौजूद है जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपनी परंपराओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित रखा है।

वंचित वर्गों को जोड़ने की पहल

राष्ट्रीय गांड़ा महासमाज के संस्थापक ने कहा कि राष्ट्रपति भवन द्वारा पिछले वर्षों में आम नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने और विशेषकर वंचित एवं पिछड़े वर्गों को देश की विकास यात्रा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है। नुआखाई जैसे लोकपर्व को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देना इसी सोच का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि इससे आदिवासी और पिछड़े समुदायों में अपनी संस्कृति को लेकर गर्व और आत्मविश्वास बढ़ेगा और युवा पीढ़ी भी अपनी परंपराओं से जुड़ने के लिए प्रेरित होगी।

गांडा समाज की लोककला को भी मिले मंच

भगवानू नायक ने कहा कि राष्ट्रीय गांड़ा महासमाज को अपेक्षा है कि भविष्य में राष्ट्रपति भवन में गांड़ा समाज के लोकपर्वों, लोककलाओं, लोकवाद्यों और सांस्कृतिक विरासत को भी इसी प्रकार राष्ट्रीय मंच एवं सम्मान प्राप्त होगा।

उन्होंने कहा, “इसी आशा और विश्वास के साथ नुआखाई लोक-संस्कृति को मिले सम्मान के लिए राष्ट्रीय गांड़ा महासमाज माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी के प्रति हृदय से कृतज्ञता व्यक्त करता है।”