• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • रायपुर

13 साल में मिले 4,000 अज्ञात शव, कफन तो मिला पर अपना कोई नहीं, शिनाख्त केवल आठ की

मौत के बाद हर इंसान सम्मानजनक विदाई और अपनों के कंधे की उम्मीद करता है, लेकिन रायपुर में पिछले 13 सालों में चार हजार से अधिक ऐसे शव पहुंचे।

By Digital DeskEdited By: Akash Pandey
Publish Date: Fri, 20 Feb 2026 09:52:40 AM (IST)Updated Date: Fri, 20 Feb 2026 09:52:40 AM (IST)
13 साल में मिले 4,000 अज्ञात शव, कफन तो मिला पर अपना कोई नहीं, शिनाख्त केवल आठ की
4,000 अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। मौत के बाद हर इंसान सम्मानजनक विदाई और अपनों के कंधे की उम्मीद करता है, लेकिन रायपुर में पिछले 13 सालों में चार हजार से अधिक ऐसे शव पहुंचे, जिन्हें उनके परिवार का साथ नसीब नहीं हुआ।

संस्थान के संचालक सैय्यद जमीर अली बताते हैं कि रायपुर संभाग में एम्स, पंडरी और आंबेडकर अस्पताल में आने वाले हर अज्ञात लाश का कफन दफन वही करते हैं। उनके पास मौजूद आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2013 से लेकर अब तक लगभग 4,000 से अधिक अज्ञात शव बरामद किए गए हैं। पुलिस और समाज सेवी संस्थाओं ने इन शवों का कफन-दफन तो कर दिया, लेकिन इनमें से अपनों की पहचान कर पाने का आंकड़ा बेहद निराशाजनक है। इन हजारों शवों में से 13 सालों में केवल आठ लोगों के परिजन ही उन्हें तलाशते हुए यहां तक पहुंच पाए।


सिस्टम के पास फाइल, परिवारों के पास इंतजार

हजारों शवों का अज्ञात रह जाना पुलिस की शिनाख्त प्रणाली और मिसिंग पर्सन ट्रैकिंग सिस्टम पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। ये 4,000 लोग केवल आंकड़े नहीं हैं, ये किसी के बेटे, पिता या भाई थे, जिनका परिवार शायद आज भी उनकी घर वापसी की राह देख रहा होगा। लावारिस लाशों का यह अंबार बताता है कि शहर की भागदौड़ में मानवीय संवेदनाएं कहीं पीछे छूट गई हैं।

कब्र से निकालकर अपनों को सौंपे गए आठ मामले

आठ मामले भी बेहद भावुक और जटिल रहे। जब महीनों या सालों बाद स्वजन को पता चला कि उनके लापता सदस्य की मौत हो चुकी है और उसे लावारिस मानकर दफना दिया गया है, तो प्रशासन की मदद से कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई। इसके बाद कब्रिस्तान से शवों को खोदकर बाहर निकाला गया और अंतिम संस्कार के लिए स्वजन को सौंपा गया।

केस 1

25 जुलाई 2023 को महासमुंद के बलौदा थाना क्षेत्र (शिशुपाल पहाड़) में एक शव मिला। पोस्टमार्टम के लिए शव रायपुर लाया गया और शिनाख्त न होने पर मोक्ष संस्थान ने दफना दिया। 2025 में मृतक की पहचान ओंकेश्वर सिदार के रूप में हुई। पिता दौलत राम सिदार श्मशान से बची हुई अस्थियां साथ ले गए।

केस 2

11 सितंबर 2025 को आमानाका ब्रिज के पास अज्ञात शव मिला। 18 दिन बाद मृतक के भाई ने उसकी पहचान केशव सिंह ठाकुर के रूप में की।

केस 3

7 मार्च 2022 को एम्स अस्पताल के पीछे रेलवे लाइन के पास एक शव मिला। तीन दिन बाद कबीर नगर निवासी पिता ने उसकी पहचान जाहिद खान के रूप में की।

इनका क्या कहना

“13 सालों में 4,000 से अधिक शवों को दफना चुका हूं। इसमें से केवल आठ की ही पहचान हो पाई है। पहचान होने पर प्रशासन से मिले पत्र के आधार पर हम शव का उत्खनन कर उसे दोबारा परिवार को सौंपते हैं।” सैय्यद जमीर अली (संचालक, मोक्ष श्रद्धांजलि सेवा संस्थान)

“शव की पहचान के लिए स्थानीय मीडिया में सूचना और गजट प्रकाशन कराते हैं। सीसीटीएनएस पोर्टल में जानकारी डालकर आसपास और सरहदी थानों में भेजते हैं। इसके अलावा शव की डीएनए प्रोफाइलिंग करके सुरक्षित रख लिया जाता है, ताकि भविष्य में पहचान होने पर डीएनए मैच कराया जा सके। डॉ. संजीव शुक्ला (कमिश्नर, रायपुर)

यह भी पढ़ें- CG में कार्रवाई के बाद फिर अवैध प्लाटिंग! 200 प्लाट की रजिस्ट्री से मचा हड़कंप, नया रायपुर परियोजना पर पड़ेगा असर