
सीमेंट व्यापारियों के अनुसार, ईंधन कीमतों में हुई बढ़ोतरी से ट्रांसपोर्ट लागत में इजाफा हुआ है। एक ट्रक औसतन एक लीटर डीजल में करीब तीन किलोमीटर चलता है। ऐसे में 500 से 600 किलोमीटर की दूरी तय करने पर भाड़ा खर्च में लगभग 500 से 1,000 रुपये तक की वृद्धि दर्ज की जा रही है। इसका असर ओपीसी और पीसीसी सीमेंट की कीमतों पर पड़ा है।
बाजार में कई प्रमुख कंपनियों ने सीमेंट के दाम बढ़ा दिए हैं। अल्ट्राटेक सीमेंट की कीमत 285 रुपये से बढ़कर 290 रुपये प्रति बोरी हो गई है। एसीसी सीमेंट में 20 रुपये की बढ़ोतरी के बाद इसका भाव 285 रुपये प्रति बोरी पहुंच गया है। अंबुजा सीमेंट 10 रुपये महंगा होकर 288 रुपये प्रति बोरी बिक रहा है, जबकि बंगर सीमेंट की कीमत 15 रुपये बढ़कर 260 रुपये प्रति बोरी हो गई है।
कारोबारियों का कहना है कि बड़ी कंपनियों की तुलना में छोटी कंपनियों ने अधिक मूल्य वृद्धि की है। जंगरोधक सीमेंट, जो पहले 250 से 260 रुपये प्रति बोरी बिक रही थी, अब करीब 290 रुपये प्रति बोरी तक पहुंच गई है। डीजल संकट और सप्लाई प्रभावित होने का सबसे ज्यादा असर छोटे ब्रांडों पर देखा जा रहा है।
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सीमेंट कीमतों में बढ़ोतरी का असर मकान निर्माण, छोटे निर्माण कार्यों और व्यावसायिक परियोजनाओं पर पड़ना तय माना जा रहा है। बिल्डर रोहित श्रीवास्तव और ठेकेदार राजेश जांगड़े के मुताबिक सीमेंट, सरिया और परिवहन लागत बढ़ने से निर्माण बजट प्रभावित होगा। उनका कहना है कि यदि ईंधन कीमतों में और वृद्धि होती है तो आने वाले समय में निर्माण सामग्री और महंगी हो सकती है।