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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 23, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Pitru Paksha 2021 In Chhattisgarh: पूर्वजों के साथ ऋषि, देव, यम और पवित्र आत्माओं को करें तर्पण

Pitru Paksha 2021 In Chhattisgarh: ब्राह्मणों को भोजन करवाकर यथाशक्ति दान-दक्षिणा देकर परिवार की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा।

By Kadir KhanEdited By: Kadir Khan
Publish Date: Thu, 23 Sep 2021 06:05:00 AM (IST)Updated Date: Thu, 23 Sep 2021 06:05:33 AM (IST)
Pitru Paksha 2021 In Chhattisgarh: पूर्वजों के साथ ऋषि, देव, यम और पवित्र आत्माओं को करें तर्पण

Pitru Paksha 2021 In Chhattisgarh: श्रवण शर्मा. रायपुर। पितृ पक्ष के दूसरे दिन बुधवार को द्वितीया तिथि का श्राद्ध किया गया। छत्तीसगढ़ी परंपरा के अनुरुप श्राद्ध करने वाले परिवारों ने अपने पितरों को आमंत्रित करने के लिए घर के मुख्य द्वार की सफाई की। स्नान करके पितरों के निमित्त अर्घ्य देकर घर के बाहर दातून, पानी का लोटा रखने की रस्म निभाई। इसके बाद काैओं, गोमाता, कुत्ता और चीटींओं के लिए भोजन का ग्रास निकाला। ब्राह्मणों को भोजन करवाकर यथाशक्ति दान-दक्षिणा देकर परिवार की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा।

शरीर निरोगी और मन को शांति

ज्योतिषाचार्य डा.दत्तात्रेय होस्केरे के अनुसार पितृ पक्ष में अपने पूर्वजों के अलावा अनेक देवताओं, ऋषियों, वायु, अग्नि, यम, सूर्य को भी तर्पण करने की शास्त्रीय मान्यता है। जो व्यक्ति पितृ पक्ष में प्रतिदिन तर्पण करता है, उस पर देवों, पितरों की विशेष कृपा होती है। जीवन सुखमय, शरीर निरोगी और मन को शांति मिलती है। पितृ पक्ष पारिवारिक सदस्यों में प्रेम, सद्भावना, सहयोग की भावना विकसित करता है।


श्रीराम ने किया पिता दशरथ और जटायु का श्राद्ध

धर्मग्रंथों में मनुष्य पर तीन प्रकार के ऋण प्रमुख माने गए हैं- पितृ ऋण, देव ऋण तथा ऋषि ऋण। इनमें पितृ ऋण को विशेष प्राथमिकता दी गई है। ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने पिता दशरथ और जटायु के लिए तथा भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मामा कंस के लिए श्राद्ध किया था। पितृ ऋण का खास महत्व है।

प्रमुख तर्पण

देव तर्पण - यह तर्पण ब्रम्हा, विष्णु, शिव, वायु, वरुण, अग्नि, सूर्य देव के लिए किया जाता है। इसमें चावल और जौ से तर्पण करते हैं।

ऋषि तर्पण - सप्त ऋषियों, सनक, सनंदन, सनातन, सनत कुमार, नारद, कपिल, दधीचि, व्यास, वशिष्ठ, विश्वामित्र, अत्रि आदि के लिए किया जाता है। इसे जौ और जल द्वारा किया जाता है।

दिव्यमान तर्पण - यह तर्पण दिव्यमान हुए लोगों के लिए किया जाता है, जिसमें ऐसे लोग आते हैं जो लोक मंगल के लिए अपना सब कुछ समर्पित कर देते हैं, कई महापुरुषों जैसे राजा जनक, हरिशचंद्र आदि आते हैं। शहीद हुए देशभक्तों, वीरों, सैनिकों, भूतपूर्व राजाओं, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के लिए भी शुद्ध जल से तर्पण कर सकते हैं।

दिव्यपितृ तर्पण - जिनके पूर्वजों ने देशहित, समाज हित के लिए कुछ विशेष कार्य किया होता हैं उनके पुत्र या उत्तराधिकारी तर्पण करते हैं। यह तर्पण जल और श्वेत पुष्प द्वारा किया जाता है।

यम तर्पण - यह तर्पण यम देव के लिए दक्षिण की ओर करना चाहिए, जिसमें कुश के मूल भाग और काले तिल का विशेष महत्व रहता है।

साधारण मनुष्य पितृ तर्पण - यह तर्पण अपने पूर्वजों, पितरों के लिए सफेद तिल और कुश से करना चाहिए।