
रायपुर । पोलावरम बांध परियोजना को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि केंद्र की यूपीए सरकार में पोलावरम परियोजना का छत्तीसगढ़ राज्य की ओर से लगातार विरोध किया जा रहा था, लेकिन केंद्र में भाजपा की सरकार बनते ही विरोध शांत हो गया। प्रदेश कांग्रेस कमेटी मीडिया विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा कि आन्ध्रप्रदेश की पोलावरम बांध परियोजना का समर्थन कर भाजपा के सांसदों ने छत्तीसगढ़ के हितों के साथ धोखा किया है। पोलावरम बांध का बनना छत्तीसगढ़ और बस्तर के हितों के खिलाफ है। श्री त्रिवेदी ने कहा कि पोलावरम बांध के संबंध में जब संसद में विधेयक प्रस्तुत किया गया, तब ओडिशा और तेलंगाना के सांसदों ने विरोध किया, लेकिन छत्तीसगढ़ के भाजपा सांसदों ने कोई विरोध नहीं किया। बस्तर में भाजपा के सांसद दिनेश कश्यप हैं, जो विरोध करने की जगह चुप्पी साधे हुए थे। पोलावरम बांध के कारण तेलंगाना, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के 360 से अधिक गांव पूरी तरह डूब जाएंगे। अकेले सुकमा के 18 गांव पूरी तरह डूब जाएंगे।
आदिवासियों का हित नहीं चाहती भाजपा सरकार
श्री त्रिवेदी ने कहा कि बस्तर की जनता ने हमेशा से ही इस परियोजना का विरोध किया है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व छत्तीसगढ़ के आदिवासियों का संवर्धन नहीं चाहता, इसका परिणाम यह पोलवरम विधेयक है, जिसके कारण प्रदेश के हजारों आदिवासी बेघर हो जाएंगे। केन्द्र की भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकार है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह चाहते तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह से अनुरोध कर प्रदेश के आदिवासियों के हित में इस विधेयक को रुकवा सकते थे, लेकिन मुख्यमंत्री ने पोलवरम विधेयक को रोकने के लिए कोई प्रयास नहीं किया।