यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 09, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Politics On Drought: छत्तीसगढ़ में सूखे पर सियासत: जिलों से नहीं पहुंची रिपोर्ट, राहत पर सवाल
Politics On Drought: छत्तीसगढ़ के 23 जिलों की 72 तहसीलों में 80 फीसद से कम बारिश, अब तक सरकार ने नहीं किया सूखा घोषित।
By Kadir KhanEdited By: Kadir Khan
Publish Date: Thu, 09 Sep 2021 11:05:00 AM (IST)Updated Date: Thu, 09 Sep 2021 11:05:59 AM (IST)

Politics On Drought: रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक बार फिर सूखे पर सियासत शुरू हो गई है। प्रदेश के 23 जिलों की 72 तहसीलों में 80 फीसद से कम बारिश हुई है, लेकिन अब तक सरकार ने सूखा घोषित नहीं किया है। हाल यह है कि राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने एक दिन पहले ही सभी कलेक्टरों को आकस्मिक योजना पर काम करने को कहा है। सरकार की सुस्त रफ्तार पर भाजपा ने निशाना साधा है।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने कटाक्ष किया- मंत्री, विधायकों और सीएम भूपेश बघेल के पास दिल्ली जाने का समय है। शक्ति प्रदर्शन और कुर्सी दौड़ करने का समय है, लेकिन सूखे की मार झेल रहे छत्तीसगढ़ के भोले भाले किसानों के लिए समय नहीं है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को बताना चाहिए कि बिना रिपोर्ट के किसानों तक राहत कैसे पहुंचाएंगे?
राजस्व विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 20 जिलों की 52 तहसीलों में 51 से 75 फीसद तक ही बरसात हुई है। 24 जिलों की 69 तहसीलें ऐसी हैं, जहां 76 से 99 फीसद बरसात दर्ज हुई है। वहीं, 17 जिलों की 46 तहसीलों में 100 प्रतिशत पानी बरसा है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव रीता शांडिल्य ने कलेक्टरों को लिखा कि सूखा प्रबंधन मैन्युअल के मुताबिक 80 प्रतिशत से कम बारिश होने पर सूखे की स्थिति बनती है। ऐसे में 80 प्रतिशत से कम बरसात वाली तहसीलों में सूखे की संभावना के आधार पर आकस्मिक योजना तैयार किया जाए। 31 अगस्त को भेजे पत्र में विभाग ने सात दिनों में नुकसान की रिपोर्ट मांगी थी। अभी तक जिलों से यह रिपोर्ट राजस्व विभाग को नहीं मिली है।
कुर्सी बचाने के लिए किसानों का कंधा इस्तेमाल कर रही सरकार: विष्णु भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने कहा कि सरकार केवल अपने राजनीतिक लाभ और अपनी कुर्सी बचने के लिए किसानों का कंधा इस्तेमाल करती है। यह सरकार ऐसी कमरों में बैठ कर किसानों का निर्णय करती है और मुख्यमंत्री बघेल खुद को किसान हितैषी बताते नहीं थकते।
छत्तीसगढ़ में सूखे को लेकर अब तक न तो कोई सर्वे हुआ हैं और न ही किसान हितैषी बताने वाले नेता किसानों के खेत तक पहुंचे हैं। सूखे की रिपोर्ट अब तक नहीं आई, इसका सीधा मतलब है कि किसानों को राहत में देर होगी। प्रदेशभर से सूखे की रिपोर्ट सोमवार तक आनी थी, जिसकी मियाद खत्म हो चुकी है। मुख्यमंत्री बिना रिपोर्ट के कैबिनेट में निर्णय करते हैं। ऐसे निर्णय पर किसान कैसे भरोसा करें।