
रायपुर। Raipur Local Edit: त्योहारी मौसम आने के साथ ही बाजार की खोई हुई रौनक वापस लौटने लगी है। प्रदेश के बाजारों में ग्राहकों की भीड़ बता रही है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार व्यापारियों को उत्साहजनक परिणाम मिल रहे हैं। वित्त मंत्रालय की मासिक रिपोर्ट ने भी अर्थव्यवस्था में तेज सुधार के संकेत दिए हैं। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) द्वारा जारी नवीनतम अनुमानों के अनुसार 2021 में भारतीय अर्थव्यवस्था 9.5 फीसदी तथा 2022 में 8.5 फीसदी की दर से बढ़ सकती है।
यह सब कोरोना महामारी पर नियंत्रण का प्रभाव है। लोगों का स्वास्थ्य ठीक हुआ है। बाजार को सरकार से सहयोग भी मिला है। त्योहारी सीजन ने लोगों को बाजार तक लाने का काम किया। त्योहारों ने कोरोना से लड़ रही अर्थव्यवस्था को संजीवनी देने का काम किया है। देश के सांस्कृतिक तत्व बाजार की शक्तियों की तुलना में अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने में अधिक महत्वपूर्ण प्रतीत होते हैं। व्यापारी वर्ग में बाजार में आई रौनक को लेकर काफी उत्साह है। वे ग्राहकों के स्वागत के लिए तैयार बैठे हैं।
आनलाइन की तरह आफलाइन बाजारों में भी ग्राहकों के लिए आकर्षक छूट, आफर और उपहार रखे गए हैं। चाहे मिट्टी का सामान बनाने वाला हो या सोने-चांदी के आभूषण बनाने वाला, मशीन से बने उत्पाद हों या हाथ से बने हुए, सभी प्रकार के उत्पादों से राजधानी और प्रदेश के अन्य शहरों का बाजार सज चुका है। मांग और आपूर्ति में कमी न हो, इसके लिए उत्पादन पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है।
ग्राहक और व्यापारी की उम्मीदों को धक्का न लगे, इसके लिए सरकार और प्रशासन को अपनी तैयारी पूरी रखनी है। प्रदेश में जिस तरह से आपराधिक घटनाएं बढ़ी हैं, उनके मद्देनजर जन-धन की सुरक्षा आगामी त्योहारी सीजन में बड़ी चुनौती होगी। इसके साथ जमाखोरी, मिलावट, महंगाई आदि को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी भी सरकार पर होगी। वित्त मंत्रालय के साथ स्वास्थ्य मंत्रालय की सलाह पर भी ध्यान देने की जरूरत है।
कोरोना की तीसरी लहर और हमारे मध्य उन्न्त और परिवर्धित जीवनशैली खड़ी हुई है। कोविड अनुकूल व्यवहारों और टीकाकरण, खासकर दूसरी डोज के प्रति उदासीनता अवसर को त्रासदी में बदल सकती है, इसलिए बाजार में भीड़ इतनी न हो कि स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चुनौती बन जाए। सरकार द्वारा जारी निर्देशों का पालन और प्रशासन के कार्य में सहयोग किया जाना चाहिए।
कोरोना त्रासदी के बाद मुश्किल से स्थितियां सामान्य होने लगी हैं, अर्थव्यवस्था और जन व्यवहार में सकारात्मकता देखी जा रही है। आज बुराई पर अच्छाई की विजय का उत्सव है और इसकी प्रासंगिकता बनाए रखने तथा इसकी शिक्षाओं को चरितार्थ करने का यह एक अनुकूल समय है। उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार की तरफ से सुरक्षा उपायों से संबंधित घोषणाओं को वास्तविक रूप से कार्यांवित किया जाएगा।