रायपुर। शादी से पहले लड़का-लड़की किसी हिल स्टेशन, समुद्र के किनारे जाकर गलबहियां डाले वीडियो-फोटो शूट करवा रहे हैं। फिर उसे शादी के दिन रिसेप्शन पार्टी में सार्वजनिक रूप से प्रोजेक्टर पर प्रदर्शित किया जा रहा है। कुछ वीडियो ऐसे हैं, जिन्हें समाज के लोग देखकर शर्मिन्दगी महसूस करने लगे हैं।
समाज के लोगों की चिंता इस बात को लेकर है कि कहीं आने वाले दिनों में अश्लीलता चरम सीमा को न लांघ जाए। किसी रिसेप्शन पार्टी में प्री वेडिंग शूटिंग देखकर समाज के उन युवक-युवतियों का मन भी शूटिंग करवाने के लिए मचलने लगा है, जिनका निकट भविष्य में विवाह होने जा रहा है।
भविष्य में कहीं समाज के युवाओं पर इसका गलत प्रभाव न पड़े, इसलिए प्री वेडिंग शूटिंग करवाने और इसका समाज में सार्वजनिक प्रदर्शन करने पर प्रतिबंध लगाने की आवाज बुलंद होने लगी है।
रोक लगाने होगी प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक
सिंधी समाज की संस्था भारतीय सिंधु सभा के सदस्यों ने गत दिनों प्री वेडिंग शूटिंग करने के खिलाफ आवाज उठाई है। सिंधी समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों से अनुरोध किया है कि जिस तरह मध्यप्रदेश के कुछ शहरों में सिंधी समाज ने प्री वेडिंग शूटिंग पर प्रतिबंध लगा दिया है उसी तरह छत्तीसगढ़ में भी प्रतिबंध लगाया जाए। इस संबंध में शीघ्र ही सिंधी समाज के प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक होने जा रही है जिसमें चर्चा की जाएगी।
भारतीय सभ्यता के खिलाफ
भारतीय सिंधु सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ.जेके लाल का कहना है कि प्री वेडिंग शूटिंग में जिस तरह से युवक-युवतियां स्वच्छंद होकर शादी से पहले अश्लीलतापूर्ण वीडियो शूटिंग करा रहे हैं, जो भारतीय सभ्यता के खिलाफ है। शादी एक पवित्र गठबंधन होता है।
शादी से पहले ही सार्वजनिक कर देने से शादी की मर्यादा का हनन होता है। दो युवाओं का पवित्र बंधन अंतरंग और निजी संबंध होता है। शादी के पहले इसे सार्वजनिक करने से कभी-कभी अप्रिय स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। शादी से पहले अपनी निजी फोटो को समाज के सामने प्रदर्शित करना गलत है। पति-पत्नी को अपने संबंधों और आपसी प्यार को गुप्त रखना चाहिए।
चकाचौंध से दिग्भ्रमित हो रहे युवा
समाजसेवी प्रेमप्रकाश मंध्यानी का कहना है कि प्री वेडिंग शूटिंग में कई बार मर्यादा विहीन दृश्य भी फिल्माए जाते हैं और बाकायदा स्वागत समारोह में प्रदर्शन भी किया जाता है, जिससे दूसरे युवा भी शूटिंग की चकाचौंध में आकर दिग्भ्रमित होने लगे हैं। वरिष्ठजनों को शर्मसार होकर आंखें बंद करने को मजबूर होना पड़ रहा है। सिंधु सभ्यता एवं भारतीय परंपरा की रक्षा के लिए ऐसे आयोजनों पर प्रतिबंध लगाना जरूरी है।
सबसे पहले माहेश्वरी समाज ने लगाया प्रतिबंध
माहेश्वरी सभा द्वारा प्री वेडिंग शूटिंग पर पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका है। माहेश्वरी सभा के संगठन मंत्री राजकुमार राठी बताते हैं कि एक तरह से प्री वेडिंग शूटिंग पाश्चात्य संस्कृति को बढ़ावा देने वाली है। माहेश्वरी समाज के पदाधिकारियों ने महसूस किया कि यदि प्रतिबंध नहीं लगाया गया तो भविष्य में संस्कृति पर विपरीत असर पड़ेगा। प्रतिबंध लग जाने से अब कोई प्री वेडिंग शूटिंग नहीं करवा रहा है। प्रतिबंध नहीं लगाया गया होता तो हर घर में प्री वेडिंग शूटिंग करने का सिलसिला चल पड़ता।