
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। राजधानी के रेलवे स्टेशन पर यात्रियों से चाय के नाम पर लंबे समय से अवैध वसूली का मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि स्टेशन पर 10 रुपये में बेची जाने वाली चाय के लिए निर्धारित क्षमता से छोटे डिस्पोजेबल कप इस्तेमाल किए जा रहे थे। कप के आकार में की गई इस कटौती के जरिए प्रतिदिन करीब 28 हजार रुपये की अतिरिक्त कमाई की जा रही थी। हैरत की बात यह है कि कोरोना काल से जारी इस व्यवस्था पर रेल प्रबंधन की नजर छह वर्षों तक नहीं पड़ सकी।
छोटे कप बनाने वाली फैक्ट्री पर शुक्रवार को हुई कार्रवाई के बाद शनिवार को मुख्य वाणिज्य निरीक्षक टी. नाग सहित अधिकारियों की टीम रेलवे स्टेशन के निरीक्षण पर पहुंची। इसी दौरान स्टेशन की व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचे रिपोर्टर ने प्लेटफार्म क्रमांक-5/6 पर अधिकारियों को नींबू पानी और स्नैक्स का आनंद लेते देखा। सवाल यह उठ रहा है कि यदि नियमित और गंभीर निरीक्षण होते तो यह अनियमितता इतने वर्षों तक कैसे चलती रही।
जानकारी के अनुसार रेलवे स्टेशन के एक स्टाल पर प्रतिदिन लगभग 200 कप चाय और कॉफी की बिक्री होती है, जिससे करीब 2000 रुपये का कारोबार होता है। छोटे कपों के उपयोग से प्रति कप लगभग चार रुपये मूल्य की चाय बचाई जा रही थी। इस तरह एक स्टाल पर रोजाना करीब 800 रुपये की अतिरिक्त बचत हो रही थी। रायपुर स्टेशन पर लगभग 35 लाइसेंसी स्टाल संचालित हैं। इस हिसाब से यात्रियों से प्रतिदिन लगभग 28 हजार रुपये की अवैध कमाई की जा रही थी।
निरीक्षण के दौरान स्टाल संचालकों ने अधिकारियों से पूछा कि आइआरसीटीसी ब्रांडिंग वाला वास्तविक 170 एमएल का मानक कप बाजार में कहां उपलब्ध है। हालांकि अधिकारियों के पास इसका स्पष्ट जवाब नहीं था। स्टाल संचालकों का कहना है कि कोरोना काल के बाद से बाजार में आइआरसीटीसी ब्रांडिंग वाला मानक आकार का कप उपलब्ध ही नहीं हुआ। शनिवार को भी दुकानदारों ने ऐसे कप की तलाश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। सूत्रों का दावा है कि इन्हीं छोटे कपों में अधिकारियों के कार्यालयों तक भी नियमित रूप से चाय पहुंचाई जाती रही है।
रेलवे स्टेशन परिसर में अवैध वेंडरों की गतिविधियां भी लगातार जारी हैं। जानकारी के अनुसार वर्तमान में 100 से अधिक अवैध वेंडर स्टेशन परिसर में सक्रिय हैं। इनमें से 20 से 25 वेंडर मात्र 50-50 एमएल के छोटे कपों में चाय बेचकर यात्रियों से पूरे 10 रुपये वसूल रहे हैं। इन वेंडरों के पास न तो कोई वैध पहचान पत्र है और न ही निर्धारित ड्रेस कोड। वे ट्रेनों के भीतर जाकर खुलेआम सामान बेच रहे हैं, जिससे यात्रियों को लगातार परेशानी और विवादों का सामना करना पड़ रहा है। करीब दो महीने पहले विशेष जांच अभियान में कई अवैध वेंडर पकड़े गए थे, लेकिन कार्रवाई की रफ्तार धीमी पड़ते ही उनकी गतिविधियां फिर बढ़ गई हैं।
स्टेशन पर बैठे अधिकारियों के मौजूदगी में ऐसे गतिविधियों का होना संदेह पैदा करता है। कप कटिंग के खेल की जांच चल रही है। संलिप्तता मिलने पर जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- अवधेश कुमार त्रिवेदी, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक