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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 22, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

रायपुर एयरपोर्ट बनेगा कार्गो हब, कोदो-कुटकी का एमएसपी घोषित करेगी केंद्र, मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में लिया गया निर्णय

बैठक में छत्तीसगढ़ छाया रहा। 19 एजेंडे में आठ छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सुझाए गए। एमपी के तीन, यूपी के एक एजेंडों पर चर्चा हुई।

By Pramod SahuEdited By: Pramod Sahu
Publish Date: Mon, 22 Aug 2022 06:55:02 PM (IST)Updated Date: Mon, 22 Aug 2022 06:55:02 PM (IST)
रायपुर एयरपोर्ट बनेगा कार्गो हब, कोदो-कुटकी का एमएसपी घोषित करेगी केंद्र, मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में लिया गया निर्णय

रायपुर (राज्य ब्यूरो)। मध्य क्षेत्रीय परिषद की भोपाल में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के प्रस्ताव पर कई महत्वपूर्ण निर्णय हुए। रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर कार्गो हब बनाने के प्रस्ताव को स्वीकृति मिली है। इसके साथ ही केंद्र सरकार की ओर से कोदो-कुटकी का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित करने पर सहमति बनी है। बैठक में छत्तीसगढ़ छाया रहा। 19 एजेंडे में आठ छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सुझाए गए। इसके साथ ही मध्य प्रदेश शासन के तीन, उत्तर प्रदेश के एक और उत्तराखंड शासन के दो एजेंडे चर्चा में लिए गए।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। भोपाल का मौसम खराब होने के कारण मुख्यमंत्री की फ्लाइट को उड़ान भरने की अनुमति नहीं मिल पाई। बैठक में छत्तीसगढ़ सरकार के आग्रह पर गोधन न्याय योजना में बने वर्मी कंपोस्ट को रासायनिक खाद की तर्ज पर सब्सिडी देने का प्रस्ताव दिया।


मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप राज्य सरकारों को विकास के समुचित अधिकार दिए जाएं। बघेल ने कोदो-कुटकी का तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी करने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने लाख उत्पादन के लिए किसान क्रेडिट कार्ड और फसल बीमा योजना का लाभ देने की मांग की। मुख्यमंत्री ने बैठक में बताया कि अतिशेष धान से बायो-एथेनाल उत्पादन के लिए 25 निवेशकों के साथ एमओयू किया गया है। प्लांट के लिए हर वर्ष अनुमति लेने का प्रविधान है, जिसे समाप्त करना चाहिए। आधिक्य अनाज घोषित करने का अधिकार एनवीसीसी की जगह राज्य को मिलना चाहिए।

नक्सल क्षेत्र में सड़क के लिए मांगे 1,700 करोड़

मुख्यमंत्री ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क और पुल-पुलिया के लिए 1,700 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में बनी सड़कों में लगभग 426 वृहद पुल छूटे हुए हैं। बस्तर संभाग में 562 किलोमीटर लंबी 154 सड़कें तैयार हो चुकी हैं।

मुख्यमंत्री ने पांच हैक्टेयर की जगह 40 हैक्टेयर तक वनभूमि के व्यपवर्तन की अनुमति का प्रस्ताव दिया। उन्होंने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की 14 योजनाओं के लिए व्यपवर्तन की अनुमति समाप्त हो गई है, जिसे एक बार फिर स्वीकृत किया जाए। नक्सल प्रभावित क्षेत्र, बस्तर संभाग और राजनांदगांव क्षेत्र में केंद्रीय योजना के अंतर्गत 624 करोड़ रुपये की लागत से 95 सड़कों व 63 पुलों की स्वीकृति सशर्त प्रदान की गई है। इसे मार्च 2023 तक पूर्ण करना है, जिसकी समयसीमा मार्च 2024 तक बढ़ाई जाए।

फिर उठाया केंद्रीय बलों का 11 हजार करोड़ का मुद्दा

मुख्यमंत्री बघेल ने छत्तीसगढ़ में तैनात केंद्रीय सुरक्षाबलों के सुरक्षा व्यय के 11 हजार 828 करोड़ रुपये की मांग एक बार फिर की। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में केंद्रीय सुरक्षाबलों के 40 कैंप स्थापित किए गए हैं। राज्य सरकार ने 15 अतिरिक्त केंद्रीय सशस्त्र बल की मांग की है, जिसमें बस्तरिया बटालियन और आइआर बटालियन शामिल हैं। पुलिस आधुनिकीकरण योजना में छत्तीसगढ़ को भी कश्मीर और उत्तर-पूर्वी राज्यों की तरह समूह एक में रखा जाए और 90 फीसद केंद्रीय सहायता दी जाए।

मुख्यमंत्री बघेल की ओर से रखे गए अन्य प्रस्ताव

- त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओं की मूलभूत योजनाओं के लिए राशि का अनुपात 50:50 रखा जाए।

- खनिजों से मिलने वाली एडिशनल लेवी 4,170 करोड़ रुपये का हस्तांतरण शीघ्र किया जाए।

- न्यू पेंशन स्कीम की राज्य की लगभग 17 हजार 240 करोड़ रुपये की राशि वापस मिलनी चाहिए।

- जीएसटी क्षतिपूर्ति को आगामी पांच वर्ष के लिए बढ़ाया जाए।

- केंद्रीय बजट में अंतरण की प्रवधानित राशि के विरुद्ध 13 हजार 89 करोड़ रुपये छत्तीसगढ़ को कम प्राप्त हुए हैं।

- 10 आकांक्षी जिलों में जहां वृक्षों की संख्या कम है, वहां पर पांच मेगावाट तक के सोलर संयंत्रों की अनुमति दी जाए।

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