
रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। राष्ट्रीय लोक अदालत शुक्रवार को जिला न्यायालय परिसर रायपुर, जिला गरियाबंद, तहसील तिल्दा, राजिम और देवभोग के सिविल व राजस्व न्यायालयों में आयोजित की गई। इधर, जिला रायपुर प्रदेश का पहला जिला बना, जहां घरेलू हिंसा के मामले न्यायालय में दाखिल होने से पहले ही पति-पत्नी की आपसी सहमति से प्री-लिटिगेशन के माध्यम से निराकृत हो गए।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर, महिला एवं बाल विकास तथा सखी वन स्टाप सेंटर के संयुक्त प्रयास से यह संभव हो सका और 11 परिवार बिखरने के कगार पर थे, जो न्यायाधीश मनोज कुमार प्रजापति के प्रयास से एक हो गए। सभी परिवार में हिंसा के प्रमुख कारण अविश्वास या केवल आपसी मनमुटाव मात्र था। न्यायाधीश ने सभी दंपती को समझाया कि नर का अस्तित्व नारी के बिना अपूर्ण है और हमर अंगना तभी खुशहाल रह सकता है, जब अंगना से हिंसा बाहर हो जाए।
न्यायाधीश के समझाने पर 11 परिवार एक हो गए और हिंसा का रास्ता छोड़कर प्रेम के रास्ते पर चलने का वचन देकर राजीखुशी घर साथ-साथ गए। विदित हो कि घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 के तहत किसी भी महिला को एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, तब उसका मामला न्यायालय तक पहुंच पाता था।
भारत की आजादी का अमृत महोत्सव मनाया गया
नालसा तथा सालसा के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर द्वारा नेशनल लोक अदालत के माध्यम से आजादी के 75वें वर्ष को आजादी के अमृत महोत्सव के रूप में मनाया गया। इस बार अमृत महोत्सव के तहत पैरालीगल वालेन्टियर्स के माध्यम से लोक अदालत में उपस्थित पक्षकार को नालसा तथा सालसा की विभिन्न मुफ्त विधिक योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त भारत सरकार तथा राज्य सरकार की किन-किन योजनाओं का लाभ जनता को प्राप्त हो सकता है उसकी भी जानकारी दी गई।
जिला न्यायाधीश ने दुखियारी महिलाओं को दिया न्याय, लाखों रुपये का किया अवार्ड पारित
जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार वर्मा के न्यायालय में वीडियो कालिंग के माध्यम से लाखों रुपये का मुआवजा मिला। विदित है कि रायपुर परिक्षेत्र के मोटर दुर्घटना के दो मामले जिला एवं सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में लंबित थे। एक प्रकरण में पीड़िता इरमा लकड़ा ग्राम सराईटोली कस्तूरा जिला जशपुर, एक पीड़िता पूनम देवी थाना डंडारी जिला बेगुसराई बिहार में रह रहे थे।
दोनों ही परिवार के कमाई करने वाले व्यक्तियों की मृत्यु दुर्घटना से हो गई थी। दोनों ही परिवारों में बुजुर्ग सास-ससुर तथा चार साल तक के बच्चे थे, जिनका कोरोना काल में जीवन-यापन संकटपूर्ण हो गया था। किसी भी अड़चन को न लाते हुए न्यायाधीश द्वारा केवल न्याय का दीप एक परिवार तक पहुंचाने के उद्देश्य को लेकर दोनों पक्षों से वीडियो कालिंग कर इरमा लकड़ा को 13,95,000 और पूनम देवी को नौ लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया।
न्याय तुंहर द्वार को किया चरितार्थ
पिछली बार की तरह इस बार विशेष रूप से नेशनल लोक अदालत में उन पक्षकारों के लिए मोबाइल वेन की व्यवस्था की गई थी, जो की किसी भी निर्योग्यता के कारण न्यायालय में उपस्थित होने में असमर्थ थे। इसी तारतम्य में विक्रम प्रताप चंद्रा अतिरिक्त मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण रायपुर द्वारा सुखबती यादव उम्र करीब 65 साल जो कि लकवाग्रस्त होने के कारण से चलने-फिरने व न्यायालय आने में असमर्थ थी, जिसको मोबाइल वेन के माध्यम से खंडपीठ से जोड़ा गया और पांच लाख रुपये मुआवजे के रूप में प्रदान कराया गया।
आंकड़े एक नजर में
27,628 मामले नेशनल लोक अदालत में सुनवाई के लिए रखे गए
22,770 प्रकरणों का निराकरण हुआ
156 मामले श्रम न्यायालय से संबंधित
37 मामले कुटुम्ब न्यायालय से संबंधित
22 मामले स्थायी लोक अदालत में
812 मामले चेक बाउंस के
4,863 मामले राजीनामा योग्य आपराधिक मामले, लघु अपराध
28 करोड़ रुपये तक का मुआवजा राशि पक्षकारों को प्राप्त हुआ