
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने अटल विहार योजना में तय मानकों की अनदेखी और सेवा में घोर कमी को लेकर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के विरुद्ध फैसला सुनाया है। आयोग ने मंडल की कार्यप्रणाली को अनुचित व्यापार व्यवहार करार देते हुए निर्देश दिया है कि वह पीड़ित उपभोक्ता को जमा कराई गई 21.83 लाख रुपये की पूरी रकम 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस करे। इसके अलावा मानसिक क्षतिपूर्ति और वाद व्यय का हर्जाना भी चुकाना होगा।
मामला राजनांदगांव के पेंड्री स्थित अटल विहार योजना का है। जूना हटरी (सिनेमा लाइन) निवासी अधिवक्ता गीता शुक्ला और उनके पति निर्मल शुक्ला ने योजना के तहत जूनियर एमआईजी टाइप-1 भवन 21,83,567 रुपये में खरीदा था। आवंटन के बाद जब उन्होंने पाया कि मकान का निर्माण निर्धारित तकनीकी विशेषताओं और वादे के मुताबिक नहीं हुआ है, तो उन्होंने मंडल से सुधार का अनुरोध किया। कई बार की शिकायतों पर कोई संज्ञान न लिए जाने पर उन्होंने आवंटन निरस्त कर अपनी जमा राशि ब्याज सहित लौटाने का लिखित आवेदन दिया।
मंडल ने उपभोक्ता का पैसा लौटाने के बजाय मामले को लटकाए रखा और प्रकरण विचाराधीन रहने के दौरान ही दिसंबर 2019 में उक्त मकान को किसी अन्य व्यक्ति को ऊंचे दामों पर बेच दिया। इसके बावजूद परिवादी दंपती की मूल राशि रोक कर रखी गई। आयोग के समक्ष गृह निर्माण मंडल ने तर्क दिया कि नियमों के तहत राशि वापसी पर 10 प्रतिशत की कटौती की जाती है और कोई ब्याज देय नहीं होता।
राज्य आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया और सदस्य प्रमोद कुमार वर्मा की न्यायपीठ ने मंडल की दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने व्यवस्था दी कि यदि कोई उपभोक्ता गुणवत्ता में कमी या मनमानी से असंतुष्ट होकर पंजीयन रद्द कराता है, तो वह ब्याज सहित पूरी राशि पाने का हकदार है। आयोग ने मंडल को आदेश दिया कि वह 30 दिनों के भीतर 21,83,567 रुपये पर 19 फरवरी 2019 से भुगतान की तिथि तक 7.5% ब्याज, मानसिक क्षतिपूर्ति के 50 हजार रुपये और मुकदमा खर्च के 20 हजार रुपये अदा करे।