• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • AI बूटकैंप
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • Mutual Funds मास्टरी
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • रायपुर

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 30, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Raipur: पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजन का लेना है स्वाद तो आइए गढ़कलेवा, गर्मी में जल्द शुरू होगा आम पना और बेल शर्बत

यहां आकर एकदम से आर्डर देने की बाध्यता भी नहीं है। आराम से बैठकर बातचीत कीजिए और जब मन करें पसंदीदा व्यंजन का आर्डर करें।

By Vinita SinhaEdited By: Vinita Sinha
Publish Date: Thu, 30 Mar 2023 10:11:53 PM (IST)Updated Date: Thu, 30 Mar 2023 10:11:53 PM (IST)
Raipur: पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजन का लेना है स्वाद तो आइए गढ़कलेवा, गर्मी में जल्द शुरू होगा आम पना और बेल शर्बत

रायपुर। Gadhkaleva Raipur छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का स्वाद लोगों तक पहुंचाने की उपलब्धि गढ़कलेवा को जाता है। गढ़कलेवा रायपुर शहर के बीचोबीच स्थित महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय मेें स्थित छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के खान-पान का स्थल है। यहां केवल पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजन ही परोसे जाते है। अगर आप भी चिला, फरा, बड़ा, बोरे-बासी,आम पना, अंगाकड़ रोटी, चावल की रोटी के साथ मिर्च की चटनी के शौकीन है तो गढ़कलेवा आइए। खास बात यह है कि इसका संचालन भी महिला स्व सहायता समूह द्वारा किया जा रहा है। गढ़कलेवा की स्थापना 26 जनवरी 2016 में हुई थी। यहां खाद्य पदार्थों को परोसने के लिए भी छत्तीसगढ़ के पारंपरिक संस्कृति में इस्तेमाल किए जाने वाले कांसे और पीतल के बर्तनों की व्यवस्था है।

छत्तीसगढ़ी खानपान के साथ पूरा माहौल छत्तीसगढ़िया

गढ़कलेवा में छत्तीसगढ़ी खानपान के साथ पूरा माहौल भी ग्रामीण परिवेश में है। इस स्थान पर बस्तर के मुरिया जनजाति के कलाकारों ने लकड़ी पर कारीगरी के आधार पर आकर्षक सौंदर्य का अंकन है। इसके साथ ही सरगुजा के कारीगरों ने भी मिट्टी के रिलीफ वर्क और जाली तथा पारंपरिक लिपाई-पुताई के नमूने दीवार पर अंकित है। इसका संचालन ज्ञानदीप महिला स्व सहायता समूह द्वारा किया जा रहा है। इसकी अध्यक्ष रेखा तिवारी, सदस्य मंजू अर्जरिया, राजेश्वरी अग्रवाल सहित 40 से 50 महिलाएं है।


naidunia_image

अपनों के साथ बैठकर खाने का अलग ही मजा

गढ़कलेवा में चिला-फरा सहित अन्य छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के शौकीन अपने पूरे परिवार के साथ आते है और यहां ग्रामीण परिवेश में बैठकर बड़े ही आराम से बातचीत करते व्यंजन का लुत्फ उठाते है। यहां ग्रामीण परिवेश में पेड़ के नीचे या मितान, संगवारी, घरौंदा, पहुना,ठिहा आदि में बैठकर अपने मनपसंद छत्तीसगढ़ी व्यंजन खाता है। साफ-सफाई व सर्विस के मामले में भी यहां कभी कोताही नहीं बरती जाती। सुबह खुलने से लेकर रात बंद होने तक यहां छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की खुशबू फैलती है। यहां आकर एकदम से आर्डर देने की बाध्यता भी नहीं है और आराम से बैठकर बातचीत कीजिए और जब मन करें पसंदीदा व्यंजन का आर्डर करें। अब बढ़ती गर्मी को देखते हुए जल्द ही यहां शुरू होने वालाा है आम पना, बेल शर्बत और बोरे-बासी। naidunia_image

आनलाइन पार्सल सुविधा भी उपलब्ध

बड़े-बड़े होटलों व रेस्टारेंट के ही समान गढ़कलेवा में भी आनलाइन पार्सल की सुविधा उपलब्ध है। उपभोक्ता अपने मनपसंद छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का लुत्फ घर बैठे ही उठा सकते है।

naidunia_image

इनका यह है कहना

तेलीबांधा में रहने वाली खिलेश वर्मा का कहना है कि उन्हें छत्तीसगढ़ी व्यंजन काफी पसंद है और इसके लिए ही यहां आते रहते है, यहां का स्वाद ही अलग है। हमेशा आते रहते हैं। इसी प्रकार नया रायपुर के सूरज साहू का भी कहना है कि जब भी उन्हें छत्तीसगढ़ी व्यंजन खाने होते है,यहां आ जाते है। यहां का स्वाद ही लाजवाब रहता है।