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डानकुनी-सूरत कॉरिडोर: कृषि भूमि को औद्योगिक कर रचा 40 गुना मुआवजे का खेल, रोक के बाद भी जमीनों के डायवर्जन

रायपुर में डानकुनी-सूरत रेल माल गलियारे के लिए जमीन अधिग्रहण से पहले मुआवजा बढ़ाने का बड़ा खेल सामने आया है। कलेक्टर के स्पष्ट प्रतिबंध के बावजूद, एसड...और पढ़ें

By Jitendra DahiyaEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Wed, 12 Aug 2026 09:52:24 AM (IST)Updated Date: Wed, 12 Aug 2026 10:23:31 AM (IST)
डानकुनी-सूरत कॉरिडोर: कृषि भूमि को औद्योगिक कर रचा 40 गुना मुआवजे का खेल, रोक के बाद भी जमीनों के डायवर्जन
मुआवजे को लेकर खेले गए खेल का प्रतीकात्मक ai विजुअल।

HighLights

  1. डानकुनी सूरत रेल परियोजना में मुआवजा का खेल
  2. कलेक्टर के प्रतिबंध के बावजूद हुआ डायवर्जन
  3. कृषि जमीन को व्यावसायिक बताकर मुआवजा बढ़ाया

जितेंद्र सिंह दहिया, रायपुर। डानकुनी-सूरत रेल माल गलियारे के लिए जमीन अधिग्रहण से पहले रायपुर में मुआवजा बढ़ाने का नया खेल उजागर हुआ हैं। नईदुनिया की पड़ताल में सामने आया कि कलेक्टर के प्रतिबंध के बावजूद करीबन 25 प्रकरणों की (करीब 35 एक कृषि भूमि को औद्योगिक और व्यवसायिक में बदले जाने) जमीनों का डायवर्जन रायपुर एसडीएम नंद कुमार चौबे ने कर दिया।

15 जून को जमीनों की खरीदी-बिक्री, बटांकन और डायवर्जन पर रोक लगाई गई थी। इसके बाद भी 20 जून, 19 जुलाई और 30 जुलाई को जमीनों के डायवर्जन की कार्रवाई होने का दावा किया जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि प्रतिबंध के बावजूद राजस्व अमला कार्रवाई कैसे करता रहा? कृषि जमीन को आवासीय या व्यावसायिक घोषित करने से अधिग्रहण में मुआवजा बढ़ने का खेल किया गया। यही कारण है कि पूरे मामले को भारतमाला की तर्ज पर मुआवजा बढ़ाने की कोशिश से जोड़कर देखा जा रहा है।


आदेश कलेक्टर का, फिर भी कार्रवाई कैसे?

15 जून को जारी प्रतिबंध आदेश में जमीनों की खरीदी-बिक्री, बटांकन और डायवर्जन रोकने के स्पष्ट निर्देश थे। यह आदेश रायपुर, आरंग, तिल्दा और अभनपुर के संबंधित अधिकारियों को भेजा गया था। इसके बावजूद बाद की तारीखों में डायवर्जन होने का दावा सामने आया है। पुनरनिरीक्षण में दोबरा प्रकरण लेकर निरस्त कर दिया गया। लेकिन पूरे मामले एसडीएम को साफ-साफ बचा लिया गया।

मुआवजा बढ़ने की आशंका ने बढ़ाई चिंता

रेल परियोजना के लिए जिन गांवों की जमीनें अधिग्रहण के दायरे में आने की बात है, उनमें गुमा, तेंदुआ, कोरा, कुम्हारी, चिखली, मुरठी और परसराई शामिल हैं। आरोप है कि कुछ कृषि जमीनों का उपयोग बदलकर उनका मूल्य बढ़ाने की कोशिश हुई। अधिग्रहण से पहले जमीन आवासीय या व्यावसायिक दर्ज हो जाती है तो उसके मूल्यांकन और मुआवजे पर असर पड़ सकता है। इसलिए प्रतिबंध के दौरान हुए प्रत्येक डायवर्जन की तारीख, जमीन का रकबा, आदेश और संबंधित अधिकारी की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।

रोक के आदेश ने और बढ़ाए सवाल

प्रतिबंध के आदेश की प्रतियां राजस्व विभाग के सचिव, रायपुर संभाग आयुक्त, संबंधित अनुविभागीय अधिकारियों, भू-अर्जन अधिकारियों, जिला पंजीयक और तहसीलदारों को भेजी गई थीं। आदेश में प्रतिबंध का पालन कराने के निर्देश दिए गए। ऐसे में सवाल है कि जब प्रशासन को भूमि अधिग्रहण से जुड़े संभावित फर्जीवाड़े और गलत मुआवजे की आशंका पहले से थी, तब प्रतिबंध के बाद हुए डायवर्जन की जांच क्यों नहीं हुई?

भारतमाला में भी ऐसे ही हुआ था मुआवजा घोटाला

बतादें कि इसी मुआवजा घोटाला की शुरूआत भारतमाला परियोजना में भी हुई थी। जमीनों के छोटे-छोटे टुकड़े कर 40 गुना ज्यादा मुआवजा हड़पा गया था। रसूखदारों ने किसानों की जमीन अधिसूचना जारी होने के बाद अधिग्रहण किया। अब डानकुनी-सूरत रेल परियोजना से पहले रायपुर में हुए कथित डायवर्जन को उसी तरह के मुआवजा बढ़ाने के खेल से जोड़कर सवाल उठाए जा रहे हैं।

अपर कलक्टर को सौंपा मामला

मामला मेरी जानकारी में आया था। पुनरनिरीक्षण कर प्रकरण के निस्तारण के आदेश अपर कलेक्टर को दे दिए गए हैं।

- डॉ. गौरव सिंह कलेक्टर रायपुर