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महिंद्रा शोरूम में 10.24 लाख की 'बुकिंग ठगी', टीम लीडर ग्राहकों से अपने खाते में जमा कराता रहा रकम

रायपुर के महिंद्रा शोरूम में टीम लीडर ने वाहन बुकिंग और डाउन पेमेंट के नाम पर 11 ग्राहकों से 10.24 लाख रुपये ठग लिए। आरोपी फरार है।'

By Deepak ShuklaEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Mon, 20 Jul 2026 09:48:11 AM (IST)Updated Date: Mon, 20 Jul 2026 09:48:11 AM (IST)
महिंद्रा शोरूम में 10.24 लाख की 'बुकिंग ठगी', टीम लीडर ग्राहकों से अपने खाते में जमा कराता रहा रकम
महिंद्रा शोरूम का टीम लीडर ग्राहकों से रकम अपने खाते में जमा कराता रहा। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. टीम लीडर ने निजी खाते में डाउन पेमेंट की रकम मंगवाई।
  2. 11 ग्राहकों से कुल 10.24 लाख रुपये की ठगी की।
  3. कंपनी के खाते में एक भी भुगतान जमा नहीं हुआ।

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। राजधानी के तेलीबांधा थाना क्षेत्र स्थित लाभांडी के शिवनाथ मोटर्स (महिंद्रा शोरूम) में गाड़ियों की बिक्री के बीच धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। शोरूम में टीम लीडर के पद पर कार्यरत कर्मचारी ने ग्राहकों का भरोसा जीतकर वाहन बुकिंग और डाउन पेमेंट के नाम पर करीब 10 लाख 24 हजार 853 रुपये अपने निजी खाते में जमा करा लिए।

रकम लेने के बाद न तो ग्राहकों को वाहन की प्रक्रिया पूरी कराई गई और न ही पैसा कंपनी के खाते में जमा हुआ। मामला सामने आने पर आरोपित मोबाइल बंद कर फरार हो गया। शिकायत के आधार पर तेलीबांधा पुलिस ने उसके खिलाफ धोखाधड़ी का अपराध दर्ज किया है।


अपने निजी खाते में जमा कराता था कार का डाउनपेमेंट

  • पुलिस के अनुसार, अमलेश्वर निवासी सूरज ढलाई, जो शिवनाथ मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड में एचआर मैनेजर हैं, ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि आरोपी नीरज चंद्राकर 16 फरवरी 2026 से 25 जून 2026 तक शोरूम में टीम लीडर के रूप में कार्यरत था।
  • इस दौरान उसे वाहन खरीदने वाले ग्राहकों से संपर्क करने, बुकिंग और डाउन पेमेंट की प्रक्रिया पूरी कराने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसी जिम्मेदारी का फायदा उठाकर उसने सुनियोजित तरीके से ग्राहकों को कंपनी के बजाय अपने निजी यूपीआइ आइडी और नकद के माध्यम से भुगतान करने के लिए राजी किया।

11 ग्राहकों से अलग-अलग किस्तों में वसूली

एफआइआर के अनुसार आरोपित ने अलग-अलग ग्राहकों से लाखों रुपये वसूले। इनमें राजकुमार जैन से 21 हजार रुपये, सीमा बेदी से 29 हजार रुपये, हर्षवीर सिंह से 21 हजार रुपये, अजित कुमार मंडावी से 1.64 लाख रुपये, प्रशांत सिंह से 2.30 लाख रुपये, रजत शर्मा से 2.70 लाख रुपये, देवचरण निषाद से 50 हजार रुपये, अजय सिंह से 30,500 रुपये, हर्ष भगत से 1,700 रुपये, जितेंद्र कुमार तिवारी से नौ हजार रुपये तथा सुस्तिका मेश्राम से 1.69 लाख रुपये नकद और 21 हजार रुपये आनलाइन लिए। इन सभी रकम को मिलाकर कुल 10,24,853 रुपये की हेराफेरी की गई।

बुकिंग का भरोसा, लेकिन कंपनी तक नहीं पहुंचा पैसा

  • जांच में पता चला कि आरोपित ग्राहकों को भरोसा दिलाता था कि राशि जमा होते ही वाहन की बुकिंग और आगे की प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी। कई ग्राहकों ने उस पर विश्वास करते हुए उसके बताए यूपीआइ आइडी पर भुगतान कर दिया, जबकि कुछ ने नकद राशि भी सौंप दी।
  • उसके बाद में जब ग्राहकों ने वाहन की डिलीवरी या बुकिंग की स्थिति जाननी चाही तो कंपनी के रिकार्ड में उनके भुगतान का कोई उल्लेख नहीं मिला। यहीं से पूरे फर्जीवाड़े का राजफाश हुआ।

मोबाइल बंद कर गायब हुआ आरोपी

जब शोरूम प्रबंधन ने आरोपी से हिसाब मांगा तो उसने टालमटोल शुरू कर दी। कुछ समय बाद उसने अपना मोबाइल बंद कर लिया और संपर्क से बाहर हो गया। इसके बाद कंपनी ने अपने स्तर पर लेन-देन की जांच की, जिसमें पता चला कि ग्राहकों से ली गई राशि कंपनी के खाते में जमा ही नहीं हुई। इसके बाद एचआर मैनेजर ने तेलीबांधा थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।

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