
रायपुर/ बिलासपुर (ब्यूरो)। बिलासपुर में नसबंदी के दौरान महिलाओं की मौत के मामले में गुरुवार को बुलाई गई कैबिनेट की आपात बैठक में स्वास्थ्य विभाग में फैले भ्रष्टाचार पर मंत्री जमकर बरसे। इस बीच सरकार ने ऑपरेशन करने वाले (गिरफ्तार) डॉ. आरके गुप्ता और प्रभारी सीएमओ डॉ. आरके भांगे को बर्खास्त करते हुए घटना की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं। कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए पंचायत मंत्री अजय चंद्राकर ने बताया कि न्यायिक जांच आयोग के कार्यक्षेत्र, अवधि, जांच के बिंदु व जज की नियुक्ति की घोषणा दो दिन में कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल सरकार का ध्यान पीड़ितों को सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर है।
पीड़ितों का हाल जानने गुरुवार को लगातार दूसरे दिन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने बिलासपुर का दौरा किया। वहां से राजधानी लौटते ही डॉ. सिंह ने कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई। बैठक में मुख्यमंत्री के सामने मंत्रियों का गुस्सा फूट पड़ा। मंत्रियों ने कहा कि नसबंदी से मौत के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार दवाओं की खरीदी में शामिल अधिकारी हैं। मंत्री प्रेमप्रकाश पांडे, अजय चंद्राकर और बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री से कहा कि प्रदेश में दवाओं की खरीदी के लिए छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कार्पोरेशन का गठन तो कर दिया गया, लेकिन इसमें एक भी मेडिकल के जानकार और विशेषज्ञ को शामिल नहीं किया गया है। सभी के सभी 90 अधिकारी और कर्मचारी संविदा पर हैं। ऐसे में दवा की खरीदी की गुणवत्ता पर सवाल तो उठेगा ही।
उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार कैबिनेट में सबसे तीखे तेवर मंत्री अजय चंद्राकर के थे। श्री चंद्राकर बिलासपुर जिले के प्रभारी मंत्री हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री के साथ अस्पताल का दौरा भी किया, जिसके बाद बैठक में उनकी नाराजगी खुलकर सामने आ गई। मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की कार्यप्रणाली और दवा खरीदी में गड़बड़ी पर अन्य मंत्रियों ने भी मुख्यमंत्री के सामने नाराजगी जताई। सबसे पहले स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल ने कैबिनेट में पूरे मामले की विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह बेहद गंभीर नजर आ रहे थे। सभी मंत्रियों ने अमर अग्रवाल की बात सुनने के बाद अपना-अपना पक्ष भी रखा।
दरअसल सभी मंत्री इस बात को लेकर भी चिंतित नजर आए कि नगरीय निकाय चुनाव पर इसका सीधा असर पड़ेगा। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को आश्वासन दिया कि सभी दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। मंत्रियों ने पीड़ितों के बेहतर इलाज और राहत देने की बात कही। इस पर मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि किसी भी पीड़ित के इलाज में सरकार की ओर से कोई कोताही नहीं बरती जाएगी।
सरकार ने स्वीकारी नैतिक जिम्मेदारी
नसबंदी कांड पर चौतरफा हमले झेल रही राज्य सरकार ने आखिरकार मामले की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार कर ली है। कैबिनेट की बैठक के बाद पंचायत मंत्री अजय चंद्राकर ने यह स्वीकार किया कि नसबंदी से हुई मौतों के लिए सरकार नैतिक रूप से जिम्मेदार है। जब उनसे यह सवाल किया गया कि क्या स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल भी इसके लिए दोषी हैं? तो उन्होंने कहा कि अभी सरकार का ध्यान पीड़ितों के बेहतर से बेहतर इलाज पर है। कैबिनेट में स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे पर कोई चर्चा नहीं हुई है। पंचायत मंत्री अजय चंद्राकर से 'नईदुनिया' ने सवाल किया कि सरकार घटना के लिए जवाबदेह है तो क्या मंत्री जिम्मेदार नहीं हैं? इस पर उन्होंने कहा कि यह गंभीर मानवीय त्रासदी है। इस मामले में सरकार ने जो कदम उठाए हैं, उससे सरकार के प्रति आम जनता का विश्वास लौटेगा। नईदुनिया ने सवाल किया कि बच्चों की परवरिश के लिए सरकार क्या कदम उठाने जा रही है? उन्होंने कहा कि पीड़ितों को अधिक से अधिक मुआवजा राशि देने की घोषणा की गई है।