
रायपुर(निप्र)। खम्हारडीह के वीआईपी स्टेट में चल रही दवा की अवैध फैक्ट्री नौ माह पहले ही सील हो सकती थी। कॉलोनी की रेसीडेंशियल सोसाइटी ने कलेक्टर से लेकर नगर निगम आयुक्त, नगर निवेशक और जोन आयुक्त को रिहायशी कॉलोनी में अवैध रूप से चल रही दुकानों, गोदामों और कार्यालयों की ढेरों शिकायतें कीं, लेकिन केवल खानापूर्ति के लिए कुछ ही दुकानों को नोटिस जारी कर दी गई। कॉलोनी का निरीक्षण नहीं किया, वरना अवैध दवा फैक्ट्री पहले ही बंद हो चुकी होती।
वीआईपी स्टेट रेसीडेंट एसोसिएशन के पदाधिकारियों से जानकारी मिली है कि कॉलोनी में लगभग सवा सौ मकान हैं, जिनमें लगभग सौ परिवार निवासरत हैं। 10-15 मकानों का व्यवसायिक उपयोग हो रहा है। रिहायशी कॉलोनी में एक बिल्डर के कार्यालय, एक हार्डवेयर स्टोर, सीमेंट गोदाम व दुकान, दो स्कूल, दो ब्यूटी पार्लर समेत कुछ और दुकानें हैं। एसोसिएशन ने 10 मार्च 2014 को कलेक्टर को इसकी जानकारी देकर कार्रवाई की मांग की थी। उस वक्त कॉलोनी में अवैध दवा कंपनी की फैक्ट्री चल रही थी। 14 जुलाई को कलेक्टर को दोबारा ज्ञापन देकर उन्हें रिमाइंड कराया गया। ज्ञापन की प्रति पंजीयक सहकारी संस्थाएं को भी दी गई। उसके बाद रेसीडेंट एसोसिएशन ने नगर निगम आयुक्त को ज्ञापन सौंपा। आयुक्त ने नगर निगम के नगर निवेशक एमएन ठाकुर को जांच के निर्देश दिए। नगर निवेशक ने 24 जुलाई को जोन-2 आयुक्त आरके डोंगरे को पत्र भेजा और जांच कर तीन दिन में रिपोर्ट मांगी। इसके बाद नगर निगम ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
रेसीडेंट एसोसिएशन ने एक सितंबर को नगर निगम आयुक्त को फिर से ज्ञापन सौंपा। उन्हें दवा की अवैध फैक्ट्री समेत बाकी दुकानों और कार्यालयों की सूची भी सौंपी गई। उसकी प्रति कलेक्टर, संचालक नगर तथा ग्राम निवेश, पुलिस अधीक्षक और जोन-2 आयुक्त को भी भेजी गई। लेकिन सभी अधिकारियों ने इस शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया।
आरटीआई में जानकारी नहीं दी
अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया तो रेसीडेंट ऐसोसिएशन ने नगर निगम से ही आरटीआई के तहत कॉलोनी में अवैध रूप से चल रहे व्यवसायिक स्थलों की जानकारी मांग ली। 24 सितंबर को नगर निवेशक ने जोन-2 आयुक्त को पत्र भेजकर जानकारी भेजने के लिए कहा। जोन आयुक्त ने अब तक वह जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है।
बिना निरीक्षण आधे को दे दी नोटिस
आरटीआई के तहत आवेदन आने के बाद जोन-2 ने कॉलोनी का निरीक्षण ही नहीं किया। रेसीडेंट ऐसोसिएशन ने पूर्व में जिन दुकानों और कार्यालयों की सूची उपलब्ध कराई थी, उसमें से आठ को नोटिस जारी कर दी, जिन्हें नोटिस पहुंची, उन्हें बिना अनुमति व्यवसायिक स्थल चलाने के कारण जुर्माने की चेतावनी दी गई लेकिन, एक से भी जुर्माना वसूला नहीं गया।
अधिकारी के भी मकान में दुकान
राज्य प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी का भी मकान वीआईपी स्टेट में है। इस अधिकारी ने अपने मकान को किराए पर दे रखा है, जहां किराएदार ने सोलर सिस्टम वाले उपकरणों की दुकान खोल रखी है।
कॉलोनी में अवैध रूप से रिहायशी मकानों का इस्तेमाल व्यवसायिक तौर पर होने की शिकायत लगातार की जाती रही है। अगर जिला प्रशासन और नगर निगम इसे गंभीरता से लेते तो निश्चित तौर पर अवैध रूप से चल रही दवा की फैक्ट्री का भंडाफोड़ पहले ही हो जाता।
विकास गोयल
अध्यक्ष, वीआईपी स्टेट रेसीडेंट एसोसिएशन