
रायपुर। रायपुर के औद्योगिक इलाके उरला और खेतीबाड़ी वाले क्षेत्र भाटागांव का भूजल पीने के लायक नहीं है। भाटागांव के भूमिजल में जहां 60 फीसदी से अधिक सैंपल में लवणता मानक से अधिक मिली है वहीं औद्योगिक इलाके उरला के भूमि जल में खनिज खुलने से पानी के खारेपन और टीडीएस यानी कुल घुलित ठोस की मात्रा अधिक है।
यह दावा किया जा रहा है पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के भूगोल अध्ययनशाला की ओर से किए गए अध्ययन में। अनुसंधानकर्ता डॉ. केएन प्रसाद, डॉ.एनके बाघमार, डॉ. दुर्गापद कुइति और शोधार्थी संजीव प्रमानिक के इस शोध का प्रकाशन हाल ही में जनरल ऑफ एप्लाइड जियोकेमेस्ट्री हैदराबाद में प्रकाशित हुआ है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक किसी भी जल में टीडीएस, लवणता और प्रवाहक तत्व की मात्रा 1.5 पीपीटी (पार्ट्स पर टेरिलियन) से अधिक नहीं होना चाहिए लेकिन यहां उरला में टीडीएस की मात्रा 1.55 पीपीटी से भी अधिक है। जबकि उरला में प्रवाहक तत्व 2.32 पीपीटी तक मिला है। उरला में इस स्थिति की वजह यहां चल हरे कल-कारखानों से निकलने वाले विभिन्न तरह के धातुओं के अवशेष आदि हैं।
भाटागांव के इलाके में कृषि भूमि पर भी खतरा
शोधकर्ताओं का दावा है कि भाटागांव में किसानों द्वारा खेती के लिए इस्तेमाल की जा रही फर्टिलाइजर की वजह से भूमिगत जल प्रभावित हो रहा है। इसमें 60 प्रतिशत ऐसे सैंपल मिले हैं जिनमें लवणता की मात्रा मानक से कई गुना ज्यादा है। बताया जाता है कि यहां भूमिगत जल से कृषि की सिंचाई होने के कारण यहां की कृषि मिट्टी में भी लवणता अधिक हो रही है। भविष्य में यहां उर्वरक शक्ति कमजोर होने का खतरा है।
ऐसे किया अध्ययन
शोधकर्ताओं ने उरला औद्योगिक क्षेत्र, भाटागांव कृषि क्षेत्र और उदयन सोसायटी टांटीबंध रहवासी इलाके से 15-15 सैंपल यानी कुल 45 सैंपल जांच के लिए लिए थे। इनमें अध्ययनकर्ताओं ने पहले तो गहराई के आधार पर पानी की गुणवत्ता जानने की कोशिश कि तो पाया कि 20 फुट से लेकर 400 फुट की गहराई में भूजल की गुणवत्ता के लिए कोई तार्किक अंतर नहीं है। हालांकि अलग-अलग जगह के सैंपल में अवांछनीय तत्वों की मात्रा अलग-अलग मिली है।
फैक्ट फाइल
- 45 भूजल के सैंपल लिए गए 20 से 400 फुट की गहराई से
- 40 फीसदी सैंपल में प्रवाहक तत्व मिले उरला के भूमिगत जल में
- 60 फीसदी सैंपल में लवणता की मात्रा मिली भाटागांव इलाके से
क्या है टीडीएस ?
टीडीएस यानी कुल घुलित ठोस से है। पानी में मिट्टी में उपस्थित खनिज घुले रहते हैं। भूमिगत जल में ये छन जाते हैं। सतह के पानी में खनिज उस मिट्टी में रहते हैं जिस पर पानी का प्रवाह होता है। इसमें जो अवांछनीय तत्व होते हैं उन्हें प्रवाहक तत्व कहा जाता है। खनिज मूलतः कैल्शियम, मैग्नीशियम और सोडियम के अवयव होते हैं। पानी में खारापन इन्हीं के कारण होता है।
शोध के दौरान औद्योगिक इलाके उरला और कृषि क्षेत्र भाटागांव का पानी पीने योग्य नहीं मिला है। जबकि रहवासी इलाके टाटीबंध का पानी पीने योग्य है। यहां महज एक ही सैंपल फेल हुआ है। - संजीव प्रमानिक, शोधकर्ता, भूगोल अध्ययनशाला, रविवि
एक्सपर्ट व्यू
आमतौर पर भूमिगत जल मानव द्वारा किए जा रहे कार्यकलापों के कारण ही प्रदूषित हो रहा है। औद्योगिक इलाकों में इसके अवशेष बारिश के बाद भूमिगत जल में घुल रहे हैं और कृषि क्षेत्रों में खेतों में फसल उगाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा फर्टिलाइजर का अवशेष भूमिगत जल दूषित कर रहा है। - डॉ. दुर्गापद कुइति, रिटायर्ड प्रोफेसर, भूजल अध्ययनशाला, पंरविवि