
दीपक अवस्थी, रायपुर । भगवान राम पथ के रूप में छत्तीसगढ़ भी शामिल कर लिया गया है। केंद्र और राज्य सरकार दोनों भगवान राम के पदचिन्हों को पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विस्तारित कर रही हैं। दोनों ही योजनाएं लागू हो गईं तो रामायण सर्किट का लाभ छत्तीसगढ़ को मिलेगा। रामायण सर्किट की थीम में नौ राज्यों के 15 स्थानों को विकसित करने की योजना बनाई गई है।
इसमें केंद्र सरकार ने स्वदेश योजना के तहत रामायण परिपथ थीम में छत्तीसगढ़ समेत उत्तरप्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु को शामिल किया है। हाल ही में केंद्रीय पर्यटन मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने राज्यसभा में रामायण सर्किट की जानकारी दी थी।
व्यापक अन्वेषण की आवश्यकता
वरिष्ठ इतिहासकार डॉ.रमेन्द्र नाथ मिश्र का कहना है कि छत्तीसगढ़ का रामायणकाल से गहरा नाता है। ये बातें पुराणों में पढ़ने और सुनने को तो मिलती हैं। किवंदति है या सत्य, इस पर गहन शोध और व्यापक अन्वेषण करने की आवश्यकता है। जिन-जिन स्थलों को रामायणकालीन होने की बातें कही-सुनी जाती है, उन जगहों की खुदाई करके सत्यता का पता लगाया जा सकता है। छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिकता के लिए सरकार को विश्वस्तरीय सर्वेक्षण कराने की आवश्यकता है।
सिहावा पर्वत पर वाल्मीकि का जन्म
इतिहासकार डॉ. एलएस निगम बताते हैं कि राम वनगमन मार्ग को चित्रित करने के लिए अयोध्या से रामेश्वरम तक सड़क मार्ग से यात्रा की थी, जो वाल्मीकि रामायण के अनुसार थी। शोध में पाया कि चंदखुरी, आरंग क्षेत्र के दक्षिण कोसल नरेश महाराज भानुमंत की पुत्री भानुमति ही भगवान श्रीराम की मां कौशिल्या थीं। भगवान श्रीराम का प्रमाणिक इतिहास वाल्मीकि रामायण है। छत्तीसगढ़ के आदि कवि वाल्मीकि ने उस काल के छत्तीसगढ़ का जीवंत इतिहास लिखा है।
श्रीराम के साथ 14 साल वन-वन घूमते हुए प्रत्येक घटना की आंखों देखी कथा लिखी है। छत्तीसगढ़ में श्रीराम का ननिहाल, वनवास काल के 13 चौमासे छत्तीसगढ़ के दंडकारण्य में गुजारने जैसे अनेक प्रसंग मिलते हैं। महर्षि वाल्मीकि का जन्म सिहावा व कांकेर के मध्य ऋक्ष पर्वत के इकवारा गांव में हुआ था। टांगरी डोंगरी पहाड़ी पर उनका निवास था।
ये है इतिहास
संपूर्ण भारत में रामराज्य स्थापित करने के लिए भगवान श्रीराम ने छत्तीसगढ़ के कोसीर (वर्तमान में सारंगढ़) को अपनी नई राजधानी बनाई थी। यहां उनके वंशजों ने वैदिक काल तक शासन किया था। यह दावा भगवान श्रीराम के इतिहास पर पिछले 10 वर्षों से शोध कर रही संस्था रामायण शोध संस्थान ने किया है।
संस्था का दावा है कि प्राचीन भारत में कोसल राज्य और कोसली भाषा (छत्तीसगढ़ी) की सर्वाधिक प्रतिष्ठा थी। छत्तीसगढ़ का गौरवशाली इतिहास, भाषा, सभ्यता, संस्कृति, कला विश्व के लिए अनुकरणीय थी। भगवान श्रीराम के वंशजों ने छत्तीसगढ़ में लगभग साढ़े तीन हजार वर्ष तक शासन किया था।
कोसीर रामराज्य की राजधानी
भगवान राम द्वारा निर्मित कुशावती नगरी सारंगढ़ से 15 किलोमीटर दूर कोसीर में है। दक्षिण कोसल की प्राचीन राजधानी आरंग को माना जाता है, जिसे भगवान राम ने प्रशासनिक, व्यावसायिक व आवागमन की सुविधा के लिए नई राजधानी कोसीर में बनाई।
कोसीर से रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, विदर्भ, संबलपुर, बस्तर, आंध्रप्रदेश, मगध, गया, बंगाल की यात्रा सुलभ हो गई। कोसीर में किला और खाई के अवशेष आज भी उपलब्ध हैं। महानदी के तट पर तीन किलोमीटर से अधिक लंबा बंदरगाह भी विद्यमान है। श्रीराम ने कोसल राज्य की अधिष्ठात्री देवी का मंदिर बनवाया, जिसका नाम कोसलेश्वरी देवी रखा गया।
- दण्डकारण्य को रामायण सर्किट में शामिल किया गया है। इसमें सिहावा, राजीम, शिवरीनारायण का प्रस्ताव बनाकर एक साल पहले ही भेज दिया गया था। - डॉ. संजय सिंह, महाप्रबंधक, पर्यटन मंडल