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चार माह में ही उखड़ी 16 करोड़ से बनी सड़क, रायपुर में NH-53 के कुम्हारी ब्रिज पर हादसों को न्योता दे रहे गड्ढे

रायपुर-दुर्ग-भिलाई को जोड़ने वाले एनएच-53 के कुम्हारी-खारुन पुल की सड़क चार महीने में ही उखड़ गई।

By Jitendra DahiyaEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Sun, 18 Oct 2026 09:24:15 AM (IST)Updated Date: Sun, 18 Oct 2026 09:38:28 AM (IST)
चार माह में ही उखड़ी 16 करोड़ से बनी सड़क, रायपुर में NH-53 के कुम्हारी ब्रिज पर हादसों को न्योता दे रहे गड्ढे
16 करोड़ की मरम्मत के बाद भी चार महीने में उखड़ गई कुम्हारी-खारुन पुल की सड़क

HighLights

  1. बजरी से पाटे गड्ढे, दोबारा हुए गहरे
  2. रोज डेढ़ लाख वाहन, हादसे का खतरा
  3. टोल वसूली जारी, रखरखाव पर सवाल

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। करोड़ों रुपये खर्च करने और 10 दिन तक पुल बंद रखकर मरम्मत कराने के बाद भी सड़क नहीं टिक सकी। रायपुर-दुर्ग-भिलाई को जोड़ने वाले एनएच-53 पर स्थित कुम्हारी-खारुन नदी पुल पर सफर अब जोखिम भरा हो गया है।

25 और 26 सितंबर को हुई बारिश के बाद सड़क पर गड्ढे नजर आने लगे। ठेकेदार ने गड्ढों में बजरी डालकर भरने की कोशिश की, लेकिन वाहनों की लगातार आवाजाही से बजरी भी उखड़ गई और गड्ढे फिर सामने आ गए। अब सड़क की ऊपरी परत कई जगह से उखड़ चुकी है और सरिया बाहर निकल आए हैं।


बजरी से गड्ढे पाटने का जुगाड़ भी फेल

बारिश के बाद पुल पर सड़क की ऊपरी परत उखड़ी और गड्ढों में पानी भर गया। इससे वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लगा। परेशानी बढ़ने पर ठेकेदार ने गड्ढों में बजरी डाल दी। यह अस्थायी उपाय भी टिक नहीं पाया। भारी वाहनों के पहियों से बजरी निकल गई और गड्ढे दोबारा खुल गए।

कई हिस्सों में सरिया बाहर आने से दोपहिया चालकों के फिसलने और टायर फटने का खतरा है। तेज रफ्तार में अचानक गड्ढा सामने आने पर चालकों को अचानक ब्रेक या दिशा बदलनी पड़ रही है। पीछे से आ रहे वाहनों के बीच यह स्थिति हादसे का कारण बन सकती है। भारी दबाव वाले इस पुल पर सिर्फ बजरी डालना समाधान नहीं है।

35 साल पुराने पुल की 16 करोड़ में हुई थी मरम्मत

खारुन नदी पर बना यह पुल 35 साल से ज्यादा पुराना है। इसमें बेयरिंग और स्लैब से जुड़ी खामियां आई थीं। भारी वाहन गुजरने पर कंपन की शिकायत भी थी। इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए 16 करोड़ रुपये की लागत से मरम्मत कराई गई। 5 से 15 अप्रैल तक पुल पर यातायात पूरी तरह बंद रखकर काम पूरा किया गया। इसके बाद आवाजाही शुरू हुई, लेकिन चार महीने में ही सड़क की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए। अब चर्चा गड्ढों की नहीं, बल्कि मरम्मत की गुणवत्ता और टिकाऊपन की हो रही है।

रोज डेढ़ लाख वाहन, सफर जोखिम में

यह पुल रायपुर और दुर्ग-भिलाई के बीच यातायात की सबसे अहम कड़ी है। यहां से हर दिन करीब डेढ़ लाख छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। ऐसे में सड़क पर गड्ढे और खुले सरिये बड़ी परेशानी बन गए हैं। दोपहिया वाहन असंतुलित हो रहे हैं। गड्ढों से बचने के लिए अचानक ब्रेक लगाने से पीछे से टक्कर का डर बना रहता है। सरिये निकलने से वाहन क्षतिग्रस्त होने की भी शिकायतें आ रही हैं।

टोल वसूली जारी, रखरखाव का जिम्मा दूसरे पर

कुम्हारी टोल प्लाजा पर वाहन चालकों से नियमित टोल लिया जा रहा है। चालकों का सवाल है कि शुल्क के बदले सुरक्षित सड़क क्यों नहीं मिल रही। टोल कर्मचारियों का कहना है कि उनका काम सिर्फ टोल लेना है, पुल का रखरखाव दूसरे ठेकेदार के जिम्मे है।

गुणवत्ता की जांच होनी चाहिए

रायपुर और दुर्ग के बीच सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल पुल की सड़क मरम्मत के चार महीने बाद ही खराब होना गंभीर मामला है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी गड्ढे बन रहे हैं तो निर्माण और मरम्मत की गुणवत्ता की जांच होनी चाहिए।

श्रीकुमार मेमन, शहर कांग्रेस जिला अध्यक्ष

जल्द राहत देने का दावा

मरम्मत के लिए निर्देश दिए गए हैं। संबंधित ठेकेदार प्रक्रिया कर रहा है और जल्द लोगों को राहत मिलेगी।

ज्ञानेश्वर कश्यप, चीफ इंजीनियर, स्टेट एनएच