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छत्तीसगढ़ में दिव्यांग कल्याण के नाम पर 40 करोड़ का घोटाला, CBI जांच में पूर्व मुख्य सचिव तक के नाम आए सामने

सीबीआई ने जांच पूरी कर ली है और अब कई अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल करने की तैयारी में है।

By Satish PandeyEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Tue, 06 Oct 2026 07:19:18 AM (IST)Updated Date: Tue, 06 Oct 2026 07:19:18 AM (IST)
छत्तीसगढ़ में दिव्यांग कल्याण के नाम पर 40 करोड़ का घोटाला, CBI जांच में पूर्व मुख्य सचिव तक के नाम आए सामने
रायपुर में दिव्यांग पुनर्वास घोटाला (AI Generated Image)

HighLights

  1. CBI ने पूरी की जांच, चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी
  2. 2004 से 2018 के बीच फर्जी वेतन आहरण का आरोप
  3. 30 अफसरों से पूछताछ, सचिव का भी दर्ज बयान

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। राज्य में दिव्यांगों के पुनर्वास और कल्याण के लिए चल रही संस्थाओं में करीब 40 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आई है। इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी जांच पूरी कर ली है।

पहले करीब एक हजार करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगा था, लेकिन जांच में फिलहाल वर्ष 2004 से 2018 के बीच लगभग 40 करोड़ रुपये की गड़बड़ी के तथ्य मिले हैं। अब सीबीआई इस केस में कई अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल करने की तैयारी कर रही है। इस दौरान समाज कल्याण विभाग से जुड़े करीब 30 अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की गई है।


फर्जी कर्मचारियों के नाम पर वेतन आहरण

यह पूरा मामला समाज कल्याण विभाग के अधीन दिव्यांग पुनर्वास से जुड़े स्टेट रिसोर्स सेंटर (SRC) और फिजिकल रेफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर (PRRC) से जुड़ा है। आरोप है कि इन संस्थाओं में कागजों पर कर्मचारियों की नियुक्ति दिखाकर उनके नाम पर वेतन और अन्य मदों में सरकारी राशि निकाली गई। सीबीआई ने पिछले साल अक्टूबर में माना स्थित दोनों केंद्रों पर छापेमारी कर कई अहम दस्तावेज जब्त किए थे। जांच के दौरान समाज कल्याण विभाग के सचिव का बयान भी दर्ज किया गया है।

हाईकोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई थी FIR

कुशालपुर निवासी कुंदन सिंह ठाकुर की याचिका पर हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी। इसमें आपराधिक षड्यंत्र, सरकारी कर्मचारी द्वारा विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं लगाई गई थीं। FIR में संस्थाओं के गठन और संचालन से जुड़े कई तत्कालीन अधिकारियों पर भी आरोप लगे थे। इनमें पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड, एमके राऊत, बीएल अग्रवाल और पीपी श्रोती समेत अन्य अधिकारियों की भूमिका को लेकर आरोप सामने आए थे।

14 साल में 40 करोड़ के भुगतान का हिसाब नहीं

जांच में वर्ष 2004 से 2018 के बीच इन संस्थाओं पर करीब 40 करोड़ रुपये खर्च होने का ब्योरा मिला है। आरोपों का मुख्य आधार कर्मचारियों के नाम पर वेतन निकालना है। हाईकोर्ट में पेश रिकॉर्ड के मुताबिक राज्य सरकार की जांच में भी बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का जिक्र था। आरोप यह भी है कि पीआरआरसी में वास्तविक गतिविधियां ठीक से नहीं चल रही थीं, लेकिन कर्मचारियों के नाम पर लगातार राशि निकाली जाती रही। सीबीआई ने दस्तावेजों और बयानों के आधार पर जांच पूरी की है और अब आरोपित अधिकारियों की भूमिका को अंतिम रूप दिया जा रहा है।