
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। राजधानी रायपुर और आसपास के अंचलों में रेत खनन को लेकर खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिले के आठ प्रमुख रेत घाटों से अब तक कितनी रेत निकाली गई, खनन किस सीमा तक हुआ और ठेकेदारों ने स्वीकृत मात्रा से अधिक दोहन तो नहीं किया, इन बुनियादी सवालों का हिसाब-किताब किए बिना ही खदानों के रिनिवल और नए टेंडर की तैयारी शुरू कर दी गई है।
विभाग अब तक इन घाटों का भौतिक सीमांकन पूरा नहीं कर सका है। इसके बावजूद पूर्व ठेकेदारों को दोबारा खनन की खुली छूट मिल गई है, जिससे उपभोक्ताओं से मनमानी वसूली करने वाले रेत सिंडीकेट की पकड़ और मजबूत होती दिख रही है।
रेत के अवैध सिंडीकेट और विभागीय अनदेखी का सीधा असर आम नागरिकों की जेब पर पड़ रहा है। खनिज विभाग द्वारा 500 घन फीट रेत वाले प्रति हाईवा के लिए 5,500 रुपये की सरकारी दर तय की गई है। इसके उलट, खदानों पर सक्रिय सिंडीकेट के प्रभाव के चलते यही रेत 10,000 रुपये तक में बेची जा रही है। इतना ही नहीं, विभाग द्वारा निर्धारित 650 रुपये लोडिंग चार्ज के स्थान पर प्रति वाहन 3,000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। तय दर से लगभग तीन गुना अधिक वसूली होने से मकान निर्माण की लागत आसमान छूने लगी है।
नियमों के अनुसार रेत घाटों के आवंटन में केवल स्थान तय नहीं होता, बल्कि खनन का दायरा और गहराई की सीमा भी तय की जाती है। बारिश से पूर्व सीमांकन कराने का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि ठेकेदार ने स्वीकृत कोटे से अधिक रेत तो नहीं निकाली। मानसून के दौरान नदी के बहाव से नई रेत भर जाने के कारण पुराने खनन का वास्तविक वैज्ञानिक आकलन असंभव हो जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को दरकिनार कर खदानों को नवीनीकृत कर दिया गया है।
रेत घाटों के आवंटन में पारदर्शिता लाने के लिए ऑनलाइन ई-टेंडरिंग को सबसे प्रभावी व्यवस्था माना जाता है। इसके विपरीत खनिज विभाग इस बार भी ऑफलाइन टेंडर जारी करने की तैयारी में है। विशेषज्ञों और स्थानीय कारोबारियों का आरोप है कि ऑफलाइन प्रक्रिया अपनाने से प्रतिस्पर्धा सीमित हो जाती है और रसूखदार सिंडीकेट आसानी से खदानों पर अपना एकाधिकार जमा लेता है।
विभागीय पक्ष रखते हुए खनिज विभाग के उप संचालक राजेश माल्वे ने बताया कि रेत घाटों का सीमांकन वर्तमान में प्रक्रियाधीन है और इसे शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि टेंडर प्रक्रिया ऑनलाइन के बजाय ऑफलाइन माध्यम से ही की जाएगी, जिसका विधिवत प्रकाशन इसी सप्ताह किए जाने की पूरी संभावना है।