
रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि
गुरु घासीदास बाबा के द्वितीय पुत्र गुरु बालकदास का 158वां बलिदान दिवस सतनामी समाज ने श्रद्धा-उल्लास से मनाया। न्यू राजेन्द्र नगर स्थित सांस्कृतिक भवन में आयोजित कार्यक्रम में समाज के लोगों ने उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
गुरु घासीदास साहित्य एवं संस्कृति अकादमी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ छायाचित्र पर दीप प्रज्ज्वलन व पुष्पांजलि अर्पित कर हुआ। प्रवक्ता चेतन चंदेल ने बताया कि कार्यक्रम में भिलाई की अहिल्या बाई बंजारे एवं राजकुमारी दिवाकर ग्रुप ने 'आरती हो बाबा हो तोर आरती', 'गिरौधपुरी के माटी चंदन होगे', 'जय हो बलिदानी राजा' आदि भजनों की प्रस्तुति दी। गुरु बालकदास के साथ उनके दो अंगरक्षक रहे सरहा एवं जोधाई के भी कृतित्व एवं व्यक्तित्व को याद किया।
अंग्रेजों ने दी थी गुरु को राजा की उपाधि
कार्यक्रम में अकादमी के प्रदेश अध्यक्ष केपी खण्डे ने कहा कि गुरु बालकदास के सामाजिक आंदोलन व वीरता से प्रभावित होकर तत्कालीन अंग्रेज गर्वनर ने सन 1828 में उन्हें सोने का मुकुट, स्वर्ण जड़ित तलवार और सफेद हाथी भेंटकर राजा की पदवी से नवाजा था। इस दौरान उन्हें भाला, पट्टा, घुड़सवार व अंगरक्षक रखने की भी अनुमति प्रदान की थी। महासचिव डॉ. जेआर सोनी ने कहा कि आज गांव-गांव में भंडारी, साटीदार, महंत, राजमहंत जैसे पद सृजित हैं, वह गुरुजी की देन है, जिन्होंने समाज को व्यवस्थित रूप से संचालित करने की व्यवस्था दी थी।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
कार्यक्रम को सुन्दर लाल लहरे, सर्वोत्तम साहेब, अमृतलाल जोशी व धनेश्वरी डांडे ने भी संबोधित किया। इस मौके पर पर एलएल कोसले, सुन्दर लाल जोगी, डीएस पात्रे, लक्ष्मीकांत गायकवाड़, चेतन चंदेल, घासीदास कोसले, उतित भारद्वाज, शैलेन्द्र बघेल, डीडी भारती, बाबा डहरिया, राजेश रातड़े, पं.अंजोर दास बंजारे, बसंत चतुर्वेदी, सेवाराम कुर्रे महिलाओं में चम्पादेवी गेंदले, उमा भतपहरी, बिंदु महेश्वरी, शकुंतला डेहरे, स्वाति कोसले, डॉ. करूणा कुर्रे, प्रियदर्शनी दिव्य, अर्चना कुर्रे, मनुजा बेरवंश, दीपा महिलवार, सुनंदा बघेल, मैनादेवी मांडले, अनुसुईया कुर्रे, प्रीति बघेल, सावित्री नवरंगे समेत काफी संख्या में समाज के लोग मौजूद थे।