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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 23, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

घोटाला : फर्जी तरीके से निकाले छात्रवृत्ति के 31 लाख, अफसरों पर कार्रवाई नहीं

इसमें सहायक ग्रेड- दो के कर्मचारी को निलंबित कर उससे राशि की रिकवरी के लिए आदेश भी दे दिए हैं।

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Publish Date: Mon, 23 Jul 2018 11:18:44 AM (IST)Updated Date: Mon, 23 Jul 2018 11:22:36 AM (IST)
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घोटाला : फर्जी तरीके से निकाले छात्रवृत्ति के 31 लाख, अफसरों पर कार्रवाई नहीं

रायपुर। आदिम जाति विभाग में फर्जी तरीके से 31 लाख रुपए की छात्रवृत्ति आहरण कर लिया गया था। इस प्रकरण का इसी विभाग के अफसर ने जांच प्रतिवेदन तैयार कर डाला। इसमें सहायक ग्रेड- दो के कर्मचारी को निलंबित कर उससे राशि की रिकवरी के लिए आदेश भी दे दिए हैं।

2006-07 से 2012-2013 तक कई किस्त में राशि की निकासी हुई। वह एक ऐसी संस्था कॉलेज ऑफ बॉयोटेक्नोलॉजी का कोई वजूद ही नहीं था। हैरत वाली बात है कि छात्रवृत्ति जारी करने से पूर्व विभाग के नोडल अधिकारी ने सत्यापन तक नहीं किया था, जबकि इस मामले में विभाग के उच्च अफसर भी शामिल थे।


सवाल उठता है कि विभागीय प्रमुख के यहां लाखों रुपए के घोटाले की जांच भी पूरी कर दी। पूरा का पूरा ठीकरा सहायक ग्रेड-दो कर्मचारी के सिर मढ़ दिया। बहरहाल उस दौरान अपर कलेक्टर एसएन राठौर ने जांच भी की। इनकी रिपोर्ट में कई तथ्यात्मक बिंदु नहीं हैं।

निलंबित कर्मचारी की दलीले हैं कि मैंने केवल पत्र आगे प्रस्ताव के लिए बढ़ाया था, लेकिन इसके भौतिक सत्यापन की भी जिम्मेदारी नोडल अधिकारिोयों की भी थी, लेकिन आज तक फर्जी कॉलेज ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के किस खाते में राशि गई, इसका कौन आहरण किसने किया।

इन सवालों के जवाब खोजने के बजाय सीधे दोषी ठहराकर निलंबित करना समझ से परे है। वैसे अब पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।

ये है जांच प्रतिवेदन में रिपोर्ट

अध्ययनरत अनूसूचित जाति के छात्रों के वर्ष 2011-12 में पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के प्रस्ताव कार्यालयीन प्रक्रिया के विपरीत सीधे शाखा में प्राप्त कर संस्था का परीक्षण किए बगैर स्वीकृति के लिए प्रस्तुत कर दिया गया। दूसरे आरोप में यह है कि इसमें फर्जी तरीके से 57 छात्रों को अध्ययनरत बता दिया गया।

इसके साथ ही 2008-2009 में भी 37 अनुसूचित जाति के छात्रों को 10 लाख 95 हजार और 58 छात्रों को 17 लाख 32 हजार रुपए का भुगतान गलत तरीके से करा लिया गया। इसके पूर्व भी 2006-07 में गुस्र्कुल महाविद्यालय रायपुर में 21 अनुसूचित जनजाति के छात्रों को फर्जी तरीके अध्ययनरत बताकर भुगतान कर राशि से मिलकर निकाल ली गई।

निलंबित ग्रेड कर्मचारी से वसूली के लिए कटी आरसी

2008-09 व 2011-12, 2012- 2013 से लगातार कई किश्त में करीब 31 लाख 87 हजार 810 स्र्पये जारी कर दिए गए थे। ज्ञात हो कि एक ही शिक्षण संस्था कॉलेज ऑफ बायो टेक्नोलॉजी को समय-समय पर छात्रवृत्ति का भुगतान कर दिया गया था। जांच प्रतिवेदन में इसका खुलासा होने के बाद कलेक्टर कोर्ट में भी केस चला। इसमें पूर्व में निलंबित सहायक ग्रेड दो कर्मचारी से समस्त राशि की वसूली के निर्देश दिए गए हैं।

- जांच पूरी हो गई है। अब सहायक ग्रेड दो के कर्मचारी से वसूली होगी। वही जिम्मेदार हैं। - आरके सिदार, सहायक आयुक्त, आदिम जाति विभाग

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