
रायपुर। शासकीय नगार्जुन स्नातकोत्तर विज्ञान महाविद्यालय को 'छत्तीसगढ़ इंस्टिट्यूट आफ साइंस' के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही छात्राओं के अध्ययन सुविधा बढ़ाने के लिए कालेज में ई-लाइब्रेरी की स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने यह घोषणा की है। साइंस कालेेज के हीरक जयंती के अवसर पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय आडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम 'हीरक जयंती समारोह 2023' में सीएम बघेल ने अपने कालेज के जमाने के सहपाठियों को याद करते हुए कार्यक्रम में उपस्थित साथियों के नाम पुकारे और उनसे जुड़े रोचक संस्मरण सुनाए। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी इस कालेज के छात्र रहे हैं।
आडिटोरियम के नाम में जोड़ा जाएगा कालेज का नाम :
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि आज जिस आडिटोरियम में समारोह आयोजित हो रहा है, वह पंडित दीनदयाल जी के नाम पर है क्योंकि इसके लिए जमीन साइंस कालेज से दी गई थी, इसलिए आडिटोरियम के नाम में शासकीय नागार्जुन स्नात्तकोत्तर विज्ञान महाविद्यालय का नाम भी जोड़ा जाएगा। उन्होंने महाविद्यालय के वर्तमान छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि देश और प्रदेश को आप से बड़ी उम्मीदें हैं, आप हमसे भी ज्यादा ऊंचाइयां छुएं, इस महाविद्यालय के छात्रों ने हर क्षेत्र में श्रेष्ठ स्थान हासिल किया है, कालेज में बिताया समय जीवन का बहुत ही महत्वपूर्ण समय होता है। इसी दौरान हम अपने अपने सपनों को बुनते हैं, उन्हें पूरा करने का प्रयास करते हैं। कार्यक्रम में राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन, पद्मश्री से सम्मानित डा. एटीके दाबके, वर्ष 1948 कालेज के प्रथम बैच के छात्र डा. आर एस गुप्ता, विद्या भूषण शुक्ला, अंजय शुक्ल, कालेज के प्राचार्य डा. पीसी चौबे के साथ पूरा आडोटोरियम कालेज के छात्रों से खचाखच भरा हुआ था।
36 वर्ष पुरानी यादे ताजा हो गई : राघवेन्द्र मिश्रा
साइंस कालेज से वर्ष 1987 में भूविज्ञान में पोस्ट ग्रेजूएट पास आउट भूतपूर्व छात्र राघवेन्द्र मिश्रा अपने कालेज के बीते दिनों को याद करते हुए कहा कि यहां आते ही सबसे पहले मैं कालेज भवन को देखने गया तो मेरी 36 वर्ष यादे पुरानी यादे ताजा हो गई। कालेज ने हमें जीवन में अनुसाशित रहना सिखाया जिसके कारण यहां से पढ़ाई करने वाले भूतपूर्व छात्र आज बड़े-बड़े पदों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
वार्डन के घर से चुराए आम : सुरेश कुमार जेना
सुरेश कुमार जेना बताते है कि हास्टल में रहते हुए मैंने अपने दोस्तों के साथ खुब मस्तियां और शरारते की। उन्होंने बताया कि एक जब भी दूधवाला दूध देने आता तो उसका दूध चुराकर उसके पात्र में पानी मिला देते थे। फिर हास्टल के पूरे छात्र उसी दूध के बने चाय की चुस्कियां लेते थे। एक बार हमें आम खाने का मन किया ताे हमने बहाने से वार्डन के घर में जाकर उनके बगीचे के वृक्ष का पूरा आम झड़ा दिया जिसके लिए हमें काफी डाट पड़ी थी।
फाइन के पैसे से की पार्टी : जेठमल कोटारिया और धनेश सोलंकी
मुंगेली के रहने वाले बचपन के जिगरी यार जेठमल कोटारिया और धनेश सोलंकी कालेज की पढ़ाई के दौरान हास्टल में भी साथ में रहे। दोनों ने 1965 के काफी गुदगुदा देने वाले किस्से सुनाए। उन्होंने बताया कि एक बार उनकी अनुपस्थिति ज्यादा थी जिसके लिए दोनों को 20-20 का फाइन लगाया गया। लेकिन दोनों ने चालाकी ने प्राचार्य से फाइन माफ कराने में सफल रहे। बाहर जब दोस्तों को यह बात पता चली तो उन्होने पार्टी की मांग की। जिसके बाद उन पैसों से सभी दोस्त ने फिल्म देखी और पार्टी किया।