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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 25, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Raipur Local Edit: पर्यटन केंद्रों में सुरक्षा प्रबंध नाकाफी, पर्यटन को उद्योग बनाने के लिए करने होंगे काम

सरकार को इस बारे में गंभीरता से विचार करना होगा कि किस तरह की सुरक्षा व्यवस्था की जाए, ताकि लोग खतरनाक स्थानों तक नहीं पहुंचें।

By Shashank.bajpaiEdited By: Shashank.bajpai
Publish Date: Wed, 25 Aug 2021 10:51:48 AM (IST)Updated Date: Wed, 25 Aug 2021 10:51:48 AM (IST)
Raipur Local Edit: पर्यटन केंद्रों में सुरक्षा प्रबंध नाकाफी, पर्यटन को उद्योग बनाने के लिए करने होंगे काम

रायपुर। Raipur Local Edit: प्रदेश की मनोरम प्राकृतिक छटा का आनंद लेने के लिए बारिश का मौसम सर्वोत्तम है। उत्तर में कोरिया, सरगुजा और जशपुर से लेकर दक्षिण में बस्तर की बादियों में नदियों, पहाड़ों और जंगलों की खुशबू जलप्रपातों की मौजदूगी में और मनभावन हो जाती है। बस्तर में तो हर 60 से 70 किलोमीटर की दूरी पर एक से बढ़कर एक आकर्षक जलप्रपात हैं, जहां की दिल को सुकून देने वाली चुंबकीय ताकत पर्यटकों को अनायास ही खींच लेती है। जशपुर के रानीदाह और राजपुरी प्रपात, सरगुजा के देवधारा और कोरिया के अमृतधारा जलप्रपात देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी पहुंचते हैं।

इसी तरह जगदलपुर का इंद्रावती नदी पर चित्रकोट और सप्तधारा प्रपात हो या शबरी नदी पर गुप्तेश्वर जलप्रपात, वहां पहुंचकर कोई भी व्यक्ति खुद को प्रत्यक्ष रूप से प्रकृति की गोद में पाता है। देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यटकों का यहां पहुंचना रोजगार के नए अवसरों का सृजन कर रहा है। प्रदेश की सीमा सात राज्यों से सटी है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र से प्रदेश के लोगों के जीवंत संबंध हैं और यहां की प्रकृति और पुरातात्विक विशिष्टताएं सभी को आकर्षित करती हैं।


यही कारण है कि हर वर्ष जलप्रपातों तक पहुंचने वाले पर्यटक तय सीमाओं का उल्लंघन करते हुए जान जोखिम में डाल लेते हैं। इनमें से अधिकांश उत्साही युवा होते हैं। प्रतिदिन झरने में पैर फिसलने से मौत की खबरें विचलित करने वाली हैं। पर्यटन को उद्योग के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर काम करने वाली सरकार को इस बारे में गंभीरता से विचार करना होगा कि किस तरह की सुरक्षा व्यवस्था की जाए, ताकि लोग खतरनाक स्थानों तक नहीं पहुंचें।

यद्यपि इन पर्यटन केंद्रों के पास चेतावनी के बोर्ड लगे हैं, परंतु यह काफी नहीं है। पूरा मामला उसी तरह है, जैसे बिना हेलमेट पहने दोपहिया वाहन चालक खुद अपने और परिवार के लिए मुश्किलों में डाल देता है। पर्यटकों सेे दिशा-निर्देशों का पालन कराने के लिए पर्याप्त संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती जरूरी है। सीमाओं का निर्धारण भी ठीक से किया जाना चाहिए, ताकि लोग दुर्घटना संभावित क्षेत्रों तक न पहुंच सकें।

राहत और बचाव दल की भी इन केंद्रों पर तैनाती जरूरी है। पर्यटकों की कम संख्या को देखते हुए इसे भले ही बहुत व्यावहारिक और आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं माना जाए, परंतु यह भी सत्य है कि भविष्य की दृष्टि से यह निवेश लाभकारी ही होगा। सरकार के प्रयासों से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलने शुरू हो गए हैं। पर्यटन विकास की योजनाओं को अमली जामा पहनाते समय इस बात का विशेष तौर पर ध्यान रखना होगा कि सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध सबसे पहले विकसित कर लिए जाएं।