रायपुर में बाढ़ का पानी उतरा पर दर्द कायम: किताब काॅपी बर्बाद, वर्षो की मेहनत, घंटों की तपस्या पानी-पानी
बंगाल की खाड़ी के मौसमी तंत्र और गंगरेल बांध से पानी छोड़े जाने के कारण रायपुर के चंदनीडीह स्थित श्रीलंका नगर बस्ती में भीषण बाढ़ आ गई। तीन दिनों तक ज...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 28 Sep 2026 05:54:35 PM (IST)Updated Date: Mon, 28 Sep 2026 06:24:49 PM (IST)
बच्चों की कापी किताब सुखाती परिजन। परितोष दुबेHighLights
- श्रीलंका नगर में बाढ़ से मची भीषण तबाही
- किताबों और प्रमाणपत्रों के भीगने से विद्यार्थी मायूस
- मकानों में पड़ी दरारें सुरक्षित पुनर्वास की मांग
परितोष दुबे, नईदुनिया, रायपुर। हावड़ा मुंबई रोड पर टाटीबंध के आगे चंदनीडीह शांत गांव है। अब ये रायपुर नगर निगम में शामिल हो गया है। गांव के अंदर रेलवे लाइन से लगी बस्ती का नाम श्रीलंका नगर है। जैसे श्रीलंका चारों ओर पानी से घिरा हुआ है। वही हाल इस 100 से भी कम घरों की बस्ती का रहा। बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम के प्रदेश के ऊपर से गुजरने से भारी बारिश हुई और गंगरेल के 14 गेट खोलने पड़े। इधर आस-पास के इलाकों का पानी भी इस बस्ती को चारों ओर से घेरने लगा। एक तरफ रेलवे की पटरियों ने बांध की दीवार जैसा काम किया तो दूसरी ओर से पानी निकलता रहा। शुक्रवार की दोपहर से इलाके में प्रत्येक कुछ मिनट में इंच-इंच पानी बढ़ता रहा।
बस्तीवासी बताते हैं कि सामान एक जगह से दूसरी जगह करने का मौका भी नहीं मिला। आसमान से लगातार पानी गिर रहा था और नीचे चारों ओर से पानी चढ़ रहा था। पहले घुटने फिर कमर उसके बाद शाम तक गले तक पानी आ गया तो बस्ती के बीच की ऊंची जगह पर सभी ने शरण ली। ऐसा हाल तीन दिनों तक चला। रविवार की शाम तक इलाके से पानी उतरा। लोगों ने आलमारियां, संदूक खोले, पेटियों का ताला भी खुला, स्कूल के बैग भी खोले।
मार्कशीट प्रमाणपत्र भी भीग गए। - परितोष दुबे
कैसे होगी पढ़ाई चिंता में बच्चियां
आठवीं में पढ़ने वाली रितु निषाद ने बताया कि पेटी में रखी पुरानी मार्कशीट, प्रमाण पत्र पानी पानी हो गए हैं। घंटों की लगन से तैयार ड्राइंग बुक का हर पन्ना भीग गया है। पुस्तकें, कापियां, नोट्स सब मटियामेट हो गए हैं। आगे की पढ़ाई कैसे करूंगी यह सोच कर नींद नहीं आ रहा है। उसने अपनी ड्राइंग बुक में कुछ दिन पहले आंके गए गणेश दिखाते हुए कहा कि मोहल्ले मे बच्चों ने गणेश की प्रतिमा स्थापित की थी। पानी ऐसा चढ़ा कि उनका विसर्जन भी नहीं हो पाया। खारुन मैया उनके पंडाल तक आ गईं और उसकी ड्राइंग बुक में आंके गए गणेश भी पानी -पानी हो गए।
ड्राइंग बुक में आंके गए गणेश जी भी भींग गए। - परितोष दुबे
सुखाकर बचाने का प्रयास
पास के ही मकान में रहने वाली कंचन ने बताया कि दसवीं के सारे टेस्ट पेपर, गाइड भींग गए हैं। कापी किताब का भी यही हाल है। पढ़ाई कैसी होगी यह सोच कर रात में नींद नहीं आती है। खाट में कापी किताब सुखाते हुए उसकी दादी ने बताया कि घर के बच्चे पढ़ाई लिखाई में बहुत ध्यान देते हैं। स्कूल की अलग-अलग प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लेते हैं। उनके प्रमाण पत्र सहेज कर रखे गए थे। पानी बढ़ा तो सब टीवी, फ्रिज, सोफा, पलंग, कपड़े, राशन बचाने में लग गए। संदूक में पानी भर गया। उसी में सारे दस्तावेज रखे थे। अब उन्हें किसी तरह से सुखाने का प्रयास कर रहे हैं।
बस्ती के घर मे आई दरार।
घर में दरार, कमरे धंसे
बस्ती के कई घरों में दरार आ गई है और बहुत से घरों के कमरे धंस गए हैं। कई लोगों के घर में चूल्हा तक नहीं जल रहा है। पास के आंगनबाड़ी में पका पकाया भोजन दिया जा रहा है लेकिन वह नियमित नहीं है और पर्याप्त भी नहीं है। सोमवार की दोपहर इलाके में बिजली आई है। इलाके में पेयजल नहीं है। निगम के टैंकर सेवा दे रहे हैं।
कुछ घंटों में चढ़ गया पानी
बस्तीवासी गनेशू ने बताया कि मोहल्ले में गणेश पूजा की चहल पहल थी, बच्चे नाच गा रहे थे। पानी शुरू हुआ और रुकने का नाम नहीं ले रहा था। पास के ही तालाब की जल कुंभी उफनने लगी। घर के आंगन में पहले जल कुंभी आई फिर पानी आने लगा उसके बाद हर मिनट जलस्तर बढ़ता रहा। सभी घरों का यही हाल रहा। लोग एक दूसरे को चीख पुकारते हुए अपना सामान, बच्चों को बचाने में लगे रहे। लोगों को तो बचा लिए सामान नहीं बचा पाए।
नहीं रहना चाहते
बस्ती की कई महिलाओं ने रुंआसे होकर बताया कि अब यहां रहने का मन नहीं करता। शासन प्रशासन हमें यहां से हटा कर और कहीं सुरक्षित जगह पर स्थान दे दे। पानी में 48 घंटों तक घिरे रहने के बाद अब यहां रहने की हिम्मत नहीं हो रही है। एक बार पानी भरा है अगली बार नहीं भरेगा इसकी क्या गारंटी है। सामान का नुकसान हुआ कहीं किसी के साथ कोई हादसा हो जाता तब क्या करते।