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छत्तीसगढ़ में अंधविश्वास टूटा तो सर्पदंश से मौतों पर लगा ब्रेक, जागरूकता ने बचाईं 25 हजार से ज्यादा जानें

छत्तीसगढ़ में मानसून के साथ सर्पदंश की घटनाएं बढ़ी हैं। हालांकि, पिछले साढ़े तीन वर्षों में 29 हजार मामलों के बावजूद मौतों का आंकड़ा 345 तक सीमित रहा है...और पढ़ें

By Abhishek RaiEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Tue, 07 Jul 2026 10:00:27 AM (IST)Updated Date: Tue, 07 Jul 2026 10:04:40 AM (IST)
छत्तीसगढ़ में अंधविश्वास टूटा तो सर्पदंश से मौतों पर लगा ब्रेक, जागरूकता ने बचाईं 25 हजार से ज्यादा जानें
जागरूकता के कारण कम हुए सर्पदंश के मामलों की प्रतीकात्मक तस्वीर। एआई

HighLights

  1. सर्पदंश मामलों में मौतों का आंकड़ा हुआ कम
  2. ओझा-गुनिया के बजाय अस्पताल पहुंच रहे लोग
  3. सर्पदंश पर चार लाख रुपये का है मुआवजा

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया,रायपुर। प्रदेश में मानसून के आगमन के साथ ही वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश (सांप काटने) का खतरा मंडराने लगता है। कभी शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में सांप के काटते ही सबसे पहले ओझा-गुनिया को बुलाया जाता था। झाड़फूंक और तंत्रमंत्र के चक्कर में कई बार अस्पताल पहुंचने में इतनी देर हो जाती थी कि मरीज की जान नहीं बच पाती थी। लेकिन, अब लोग अंधविश्वास छोड़कर सीधे अस्पताल पहुंच रहे हैं और यही बदलाव हजारों परिवारों के लिए राहत की वजह बना है।

प्रदेश में सर्पदंश के मामले तो बढ़ रहे हैं, जो चिंता का विषय है। लेकिन, राहत की बात है कि असमय मौतों में कमी आई है। विगत साढ़े तीन वर्षों में प्रदेश में सर्पदंश के करीब 29 हजार मामले सामने आए, लेकिन इस दौरान मौतों का आंकड़ा 345 तक सीमित रहा।


छह माह में आए सर्पदंश के 1,858 मामले

इस वर्ष के विगत छह माह (जनवरी से मई) में सर्पदंश के 1,858 मामले सामने आए हैं, जिसमें नौ की मौत हुई है। बेमेतरा में एक, धमतरी में एक, जशपुर में दो, कांकेर में दो, कवर्धा में एक और मनेंद्रगढ-चिरमिरी-बैकुंठपुर में सर्पदंश से दौ मौतें हुई हैं। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि जागरूकता बढ़ने और समय पर इलाज मिलने से सर्पदंश अब पहले जितना जानलेवा साबित नहीं हो रहा है।

दो घंटे के भीतर एंटी वेनम से बच सकती है जान

सर्पदंश के दो घंटे के भीतर पीड़ित अस्पताल पहुंच जाए तो एंटी वेनम इंजेक्शन की मदद से 90 प्रतिशत मामलों में जान बचाई जा सकती है। वर्तमान में सभी सरकारी अस्पतालो में एंटी वेनम इंजेक्शन का पर्याप्त स्टाक उलपब्ध हैं।

जून से अगस्त के बीच ज्यादा मामले

विशेषज्ञों का कहना है कि आमतौर पर जून से अगस्त के बीच खेती-किसानी के सीजन में सर्पदंश के मामले ज्यादा सामने आते हैं। बाढ़ के कारण सांपों के बिलों में पानी भरने से वे सूखे ठिकानों की तलाश में रिहायशी इलाकों में आ रहे हैं, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ रही हैं। वन विभाग और नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी जैसे संगठन सांपों के रेस्क्यू और जागरूकता अभियान में अहम भूमिका निभा रहे हैं। नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी के सचिव मोईज अहमद ने बताया कि हर दिन 40 से 50 काल प्रदेशभर से आते हैं।

सर्पदंश की घटनाएं एक नजर में

वर्ष - सर्पदंश- मौत

2023 - 8,644 - 118

2024 - 8,645 - 153

2025 - 9,603 - 65

2026 - 1,858 - 9

(इस वर्ष का जनवरी से मई तक की स्थिति)

साढ़ तीन वर्षों में जिलेवार सर्पदंश की घटनाएं

बालोद- 277, बलरामपुर- 2186, बलौदाबाजार- 1120, बस्तर- 773, बेमेतरा- 800, बीजापुर- 936, बिलासपुर- 544, दंतेवाड़ा- 533, धमतरी- 859, दुर्ग- 597, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही- 1002, गरियाबंद- 1345, जशपुर- 1258, जांजगीर-चांपा- 1201, कांकेर- 905, कवर्धा- 1207, कोंडागांव- 46, कोरबा- 2231, कोरिया- 541, महासमुंद- 1985, मुंगेली- 639, नारायणपुर- 236, रायपुर- 1085, रायगढ़- 1641, राजनांदगांव- 409, सरगुजा- 1751, सूरजपुर- 755, सुकमा- 94, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई - 415, मनेंद्रगढ-चिरमिरी-बैकुंठपुर- 244, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी - 360, सारंगढ-बिलाईढ- 610, सक्ति- 115

क्या करें और क्या न करें

पीड़ित को शांत रखें, प्रभावित अंग को स्थिर रखें, गहने या तंग कपड़े हटा दें और तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाएं।

घाव को काटें नहीं, न ही उसे जलाएं या चूसें। झाड़फूंक, जहरीले पदार्थों का उपयोग या सांप को पकड़ने की कोशिश न करें।

चार लाख मुआवजे का प्रविधान

केंद्र सरकार ने 2030 तक सर्पदंश से होने वाली मौतों को आधा करने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत नेशनल एक्शन प्लान फार प्रिवेंशन एंड कंट्रोल आफ स्नेकबाइट एनवेनमिंग लागू किया गया है। इसके अंतर्गत सर्पदंश को ‘नोटिफिएबल डिजीज’ घोषित किया गया है। साथ ही, सांप के काटने से होने वाली मृत्यु पर राजस्व विभाग द्वारा चार लाख रुपये के मुआवजे का प्रविधान है।

सांपों के रेस्क्यू के लिए इनसे करें संपर्क

रायपुर- मोइज अहमद, मो.न.- 9303345640, चेतन सिंह, मो.न.- 9770868835।

दुर्ग एवं भिलाई नगर- अजय चौधरी, मो.न.- 9753807733, एम सूरज, मो.न.- 9993454757

कोरबा- जितेंद्र कुमार, मो.न.- 8817534455

कवर्धा- निलेश सोनी, मो.न.- 9993600938 व अविनाश ठाकुर, मो.न.- 7987904596

गरियाबंद - अशु कंसारी, मो.न.- 79740 18288

80 प्रतिशत सांप गैर- विषैले

समय पर अस्पताल पहुंचने से सर्पदंश से होने वाली अधिकांश मौतें रोकी जा सकती हैं। लगभग 80% सांप गैर-विषैले होते हैं। विषैले सांप के काटने पर भी यदि तुरंत उपचार शुरू हो जाए, तो बचने की संभावना अधिक रहती है। देर से अस्पताल पहुंचने पर सांस रुकने से मस्तिष्क में हाइपाक्सिक का खतरा बढ़ जाता है।

- डा. योगेंद्र मल्होत्रा, मेडिसिन विभाग, आंबेडकर अस्पताल, रायपुर

जागरूकता बढ़ने से मौत के आंकड़े घटे

बारिश शुरू होते ही सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं, इसलिए मेडिकल कालेजाें और स्वास्थ्य संस्थानों में एंटी वेनम इंजेक्शन उपलब्ध कराया गया है। अंधविश्वास को दूर करने समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। लोगों में जागरूकता बढ़ी है, जिससे मौत के आंकड़ों में गिरावट आई है।

- डा. वीआर भगत, राज्य टीकाकरण अधिकारी