
रायपुर(ब्यूरो)। बस्तर में स्टील प्लांट लगाने के लिए टाटा स्टील को मिला पूर्वेक्षण का काम निर्धारित समय पर पूरा न होने के कारण राज्य सरकार ने पूर्वेक्षण लाइसेंस निरस्त कर दिया है। बताया गया है कि कंपनी ने कुछ महीने पहले पूर्वेक्षण लाइसेंस की अवधि बढ़ाने के लिए राज्य सरकार को आवेदन किया था, लेकिन राज्य सरकार ने इसे नामंजूर कर दिया।
राज्य के खनिज साधन विभाग के सचिव सुबोध कुमार सिंह ने 'नईदुनिया' को बताया कि टाटा स्टील ने समयावधि में पूर्वेक्षण का काम पूरा नहीं किया, जिसकी वजह से पूर्वेक्षण लाइसेंस की अवधि नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। अब टाटा स्टील को आवंटित लौह अयस्क खदान क्षेत्र की नीलामी की जाएगी। इसी तरह एस्सार कंपनी भी पूर्वेक्षण का कार्य नहीं कर पाई है। उसके पूर्वेक्षण लाइसेंस की अवधि भी नहीं बढ़ाई जा सकेगी।
टाटा स्टील समूह द्वारा बस्तर के लोहंडीगुड़ा में स्टील प्लांट की स्थापना का प्रस्ताव था। टाटा स्टील ने प्लांट लगाने के लिए तीन जून 2006 को राज्य सरकार के साथ एमओयू किया था। राज्य सरकार ने टाटा स्टील को बैलाडीला में लौह अयस्क के करीब ढाई हजार हेक्टेयर क्षेत्र में पूर्वेक्षण के लिए लाइसेंस दिया था। कंपनी को पांच साल के भीतर पूर्वेक्षण का काम पूरा करना था। इसके बाद ही टाटा स्टील को माइनिंग लीज दी जा सकती थी। अब लौह अयस्क खदान का पूर्वेक्षण लाइसेंस निरस्त होने से टाटा स्टील को माइनिंग लीज भी नहीं मिल पाएगी।
उल्लेखनीय है कि टाटा स्टील समूह ने बस्तर के लोहंडीगुड़ा में प्रस्तावित स्टील प्लांट के लिए करीब दस गांवों के किसानों की लगभग पांच हजार हेक्टेयर जमीन अधिगृहीत करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी। लगभग पंद्रह सौ हितग्राहियों को करीब एक अरब की राशि मुआवजा के रूप में वितरित भी की जा चुकी है। उद्योग के लिए जो जमीन अधिगृहीत की गई है, उसका आधिपत्य भी टाटा के पास नहीं है। जमीन सीएसआईडीसी के आधिपत्य में है।