
रायपुर। Shri Ram- Janki Vivah: राजधानी के पुरानी बस्ती बनियापारा में स्थित 250 साल पुराने गोपीदास मठ मंदिर में श्रीराम-सीता विवाहोत्सव मनाया गया। सुबह प्रतिमा का दुग्धाभिषेक, पूजा के बाद विधिवत हवन करके विवाह के मंत्र पढ़े गए। महिलाओं ने बधाई गीत गाकर भक्ति भाव और उत्साह जगाया।
श्रृंगार के बाद महाआरती
गोपी दास मठ में प्राचीन प्रतिमा का श्रृंगार करने के बाद महा आरती की गई। श्रीराम सीता विवाह की खुशी में रिसेप्शन रूपी भंडारे का आयोजन किया गया।
मठ में 40 साल से निकल रही बारात, इस बार बिना बारात के मनाई खुशियां
मठ में पिछले 40 साल से श्रीरामजी की भव्य बारात निकाली जाती रही है। इसमें श्रद्धालु बाराती बनकर शामिल होते थे। बारात निकलकर वापस मठ पहुंचती थी, बारातियों का स्वागत किया जाता था। इस बार कोरोना महामारी में शासन के नियमों के चलते श्रीरामजी की बारात नहीं निकाली गई। मठ परिसर में ही सीमित भक्तों की मौजूदगी में खुशियां मनाई गई।
मठ के महंत राजीव नयन शरण महाराज ने बताया कि 40 साल पहले महंत स्व राम अभिलाष दास ने विवाहोत्सव की शुरुआत की थी। उसी परंपरा का पालन हर साल किया जाता है। सुबह हवन अभिषेक के बाद श्रृंगार किया गया। इस दौरान महिलाएं बधाई गीत, विवाह के गीत गाकर झूम उठी। कोरोना के चलते 40 साल से बारात निकाले जाने की परंपरा टूट गई। विवाह में शामिल हजारों भक्तों को रिसेप्शन में बिठाकर भोजन करवाया जाता था। इस बार भंडारा रूपी प्रसादी का पैकेट में वितरण किया गया।
पांच दिनों तक निभाई हल्दी रस्म
श्रीराम सीता विवाहोत्सव में पांच दिनों तक श्रीराम-माता के श्रीविग्रह को हल्दी लगाने की रस्म निभाई गई।
वीआईपी रोड मंदिर में छाया उत्साह
तीन साल पहले अयोध्या के श्रीराम मंदिर की तर्ज पर वीआईपी रोड में भव्य मंदिर बनाया गया है। यहां भी शनिवार को श्रीराम सीता विवाहोत्सव की धूम रही। मंदिर परिसर में ही दूल्हा के रूप में श्रीराम और दुल्हन के रूप में सीताजी का श्रृंगार करके महा आरती की गई।
दूधा धारी मठ
500 साल पुराने दूधा धारी मठ में महंत रामसुंदर दास के सानिध्य में प्राचीन प्रतिमाओं का श्रृंगार दर्शन करने भक्त पहुंचे। विवाह हवन पूजन के बाद महा आरती और प्रसाद वितरण किया गया। इसी तरह जैतुसाव मठ, बैरन बाजार के श्रीराम जानकी मंदिर, गुढ़ियारी के हनुमान मंदिर में भी श्रीराम सीता विवाह पर विशेष श्रृंगार, आरती में भक्तों ने उत्साह दिखाया।