
दिपेंद्र सोनी, नईदुनिया. रायपुर। राजधानी रायपुर में साइंस कॉलेज मैदान के सामने से विस्थापित कर आमानाका ब्रिज के नीचे बसाई गई चौपाटी अब प्रशासनिक लापरवाही और बदहाल व्यवस्था की मिसाल बन चुकी है। रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड और नगर निगम द्वारा लगभग छह करोड़ रुपये की लागत से कुल 60 स्मार्ट कियोस्क तैयार किए गए थे। लेकिन विडंबना यह है कि उद्घाटन और बसाहट के दावे हवा-हवाई साबित हुए और ये सभी कियोस्क पिछले 11 महीनों से पूरी तरह बंद पड़े हुए हैं।
लंबे समय से ताले में बंद इन दुकानों की हालत दिन-प्रतिदिन बद से बदतर होती जा रही है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण कई दुकानों के ताले टूट चुके हैं। दुकानों के भीतर रखे स्टील के पाटे, पंखे और व्यावसायिक संचालन में उपयोग होने वाले तमाम कीमती सामान चोरी हो चुके हैं।
बिना किसी पर्याप्त तैयारी और अधूरी सुविधाओं के बीच दुकानदारों का अचानक विस्थापन कर दिया गया था, जिसका खामियाजा अब उन्हें भुगतना पड़ रहा है। ग्राहकों के पास तक पहुंचने के साधन और मार्ग सुलभ न होने के कारण कारोबार शुरू ही नहीं हो सका है। कई युवा उद्यमियों ने अपने स्टार्टअप और इन दुकानों में लाखों रुपये का निवेश किया था, लेकिन दुकानें बंद रहने के कारण उनके सपने और पूंजी दोनों दांव पर लग गए हैं।
पिछले 11 महीनों से चौपाटी के वीरान रहने और ठप पड़े कारोबार के कारण दुकानदारों में भारी रोष व्याप्त है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जनता के करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार किए गए इन स्मार्ट कियोस्क को कब संवारा जाएगा और ये कब गुलजार होंगे। प्रशासन की इस उदासीनता के चलते सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर संकट गहराता जा रहा है, और संबंधित विभाग इस पर चुप्पी साधे बैठा है।